नहीं सुधरा पाकिस्तान तो बिखर जाएगा
   दिनांक 30-अगस्त-2019
एक नापाक विभाजनकारी सोच पर बना पाकिस्तान अस्तित्व के संकट में है. भारत विरोध के दम पर जिंदा ये मुल्क अब खुद को एक देश के रूप में बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है. ऐसे में हमें तैयार रहना चाहिए उसकी साजिशों से. दुनिया भर से मायूसी के बाद पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ अब तीन सूत्री रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है.

 
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की हालत वही है, जबरा मारे, रोने भी न दे. जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन और 370 व 35 ए रद होने के बाद पाकिस्तान की बेचारगी, लाचारगी दुनिया ही नहीं, खुद पाकिस्तानियों के सामने है. दर भटकने, संयुक्त राष्ट्र पर सर पटकने और फिर परमाणु हथियारों की खोखली धमकी के बाद ये तय है कि पाकिस्तान सीधे भारत पर हमला नहीं करेगा. लेकिन अगर आप ये मानते हैं कि पाकिस्तान बाज आएगा, तो इतिहास देख लीजिए. एक नापाक विभाजनकारी सोच पर बना पाकिस्तान अस्तित्व के संकट में है. भारत विरोध के दम पर जिंदा ये मुल्क अब खुद को एक देश के रूप में बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है. ऐसे में हमें तैयार रहना चाहिए उसकी साजिशों से. दुनिया भर से मायूसी के बाद पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ अब तीन सूत्री रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है.
 पाकिस्तान हर स्तर पर अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है.
 पाकिस्तान के ऊपर दिवालिया होने का खतरा है. एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) ने आतंकवाद को फंडिग के चलते पाकिस्तान को काली सूची में डाल दिया है. इसके बाद पाकिस्तान को दुनिया से कोई आर्थिक सहायता हासिल होने के विकल्प बहुत कम बचे हैं. पाकिस्तान के ऊपर अपनी तुरंत देनदारियों को भी पूरा न कर पाने का संकट है. यह संकट इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि पाकिस्तान की आर्थिक हालत अपनी सेना का बोझ उठाने की भी नहीं है. अगले कुछ महीनों में सेना के खर्च, यहां तक कि वेतन तक का संकट खड़ा होने वाला है. सदा से पाकिस्तान की हर व्यवस्था से खुद को ऊपर समझती रही पाकिस्तान की फौज एक रुपये की कटौती को बर्दाश्त करेगी, इसमें संदेह है.
पाकिस्तान में पश्तून खफा हैं. सिंधी नाराज हैं. बलूचिस्तान में आजादी की मांग चल रही है. मोहाजिर (भारत से गए मुसलमान) आज भी लड़ रहे हैं. आर्थिक बदहाली, बिना वेतन की फौज क्या इन्हें पाकिस्तान के साथ रोक पाएगी.
 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान एक आतंकवाद समर्थक देश के रूप में बदनाम हो चुका है. अमेरिका भी तालिबान के साथ अफगानिस्तान में चल रही बातचीत के सिरे चढ़ने का इंतजार कर रहा है. अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज की वापसी तक अमेरिका भले ही पाकिस्तान पर बहुत सख्ती न कर सके, लेकिन किसी बड़ी मदद के लिए भी तैयार नही है. जी-7 समूह की मीटिंग में भी दुनिया के बड़े देशों का जो रुख नजर आया है, वह पूरी तरह पाकिस्तान के खिलाफ है. दुनिया के दमदार इस्लामिक मुल्क भारत के शीर्ष नेतृत्व को सम्मानित कर रहे हैं. इस्लामिक बम और इस्लामिक एकता की थ्योरी तार-तार हो चुकी है.
पाकिस्तान के पास दोस्त के रूप में अकेला देश चीन बचा है. लेकिन दुनिया का इतिहास और नक्शा उठाकर देखिए, चीन की दोस्ती किसी भी देश के लिए आर्थिक गुलामी की गारंटी है. श्रीलंका से लेकर मालदीव तक सब चीन की दोस्ती देख चुके हैं. पाकिस्तान भी चीन के सीपीईसी प्रोजेक्ट और बार-बार लिए कर्ज के कारण गिरवी हालात में है. पाकिस्तान के बंदरगाहों से लेकर राजमार्ग तक चीन के पास गिरवी हैं. आम पाकिस्तानी के अंदर चीन के साथ दोस्ती को लेकर अब कोई गर्मजोशी नहीं है. हर पाकिस्तानी समझ रहा है कि ड्रैगन पाकिस्तान के हर प्राकृतिक संसाधन, आधारभूत ढांचे पर अपनी जकड़ मजबूत करता जा रहा है.
-ये जगजाहिर है कि पाकिस्तान की पीटीआई सरकार फौज की कठपुतली है. पाकिस्तानी सेना बहुत उम्मीदों से इमरान खान को लेकर आई थी. लेकिन जिस तरीके से कूटनीतिक, आर्थिक, सुरक्षा और राजनीतिक मोर्चों पर इमरान खान नाकाम होते जा रहे हैं, फौज भी उकता चुकी है. पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को इमरान ने तीन साल का सेवा विस्तार देकर कम से कम इस बात की गारंटी करने की कोशिश की है कि किसी नए जनरल से उन्हें न टकराना पड़े. लेकिन खुद बाजवा एक सीमा तक ही इमरान खान की सरकार को बर्दाश्त करेंगे.

 
पकिस्तान की पश्तूनों के प्रति दमनदारी नीति से परेशान पश्तून लगातार पाकिस्तान आर्मी और वहां की सरकार के आवाज उठा रहे हैं। पश्तूनों के लिए युवा नेता मंजूर अहमद पश्तीन लगातार आवाज उठा रहे हैं 
टूटते, बिखरते, दिवालिया होते पाकिस्तान के पास हमेशा से एक ही हथियार रहा है. ये हथियार कश्मीर है. ये अकेला मुद्दा है, जिसके दम पर पाकिस्तान सोचता है कि उसका हर देशवासी एकजुट हो जाएगा. लेकिन जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद घाटी में जिस किस्म की शांति है, उससे पाकिस्तान हैरान है. उसे उम्मीद थी कि कितनी भी पाबंदियां लग जाएं, कश्मीर घाटी के मुसलमान सड़कों पर उतरेंगे. ऐसा नहीं हुआ. उसकी उम्मीद के उलट कश्मीर से जो खबरें अब आ रही हैं, वहां आम कश्मीरी नौकरी, विकास, कारोबार के अवसर देख रहा है. वह पत्थरबाजी, आए दिन के बंद, हड़ताल, अलगाववादियों व उनके भाड़े के आतंकवादियों की धमकियों से निजात का मौका देख रहा है. साफ है कि ये अब पाकिस्तान के अस्तित्व की लड़ाई है. पाकिस्तान के पास इस जंग में क्या विकल्प हैं.
 1971 हो या कारगिल, पाकिस्तान की सेना इस सबक को नहीं भूलती कि आमने-सामने की जंग में वह भारत से मुकाबला नहीं कर सकती. फिर भी पाकिस्तान ने पीओके में भारी तादाद में सैन्य बलों का जमावड़ा किया है. भारी तोपखाना तैनात है. कमांडरों को सीमा पर भेज दिया गया है. (बता दें कि पाकिस्तान के सेना कमांडर बहुत आराम परस्त और अय्याश हैं, इन्हें सीमापर भेजा नहीं जाता, धकेला जाता है). सामरिक नजरिये से देखा जाए, तो फौज का ये जमावड़ा खतरनाक है. लेकिन इसे पाकिस्तान के डर से जोड़कर देखा जा रहा है. आला सामरिक सूत्रों का कहना है कि ये पाकिस्तान ने आत्मरक्षा का इंतजाम किया है. भारत की मोदी सरकार के तेवर देखते हुए पाकिस्तान को ये आशंका है कि भारतीय सेना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को भी भारत में मिला सकती है. पाकिस्तान की तरफ से किसी सैन्य हमले का विकल्प बहुत दमदार नजर नहीं आ रहा है.
 पाकिस्तान का हर मंत्री, हर राजनयिक और खुद इमरान खान परमाणु बमों की धमकी दे रहे हैं. ये जानते हुए कि भारत खुद एक परमाणु शक्ति है. नई दिल्ली ने भी साफ कर दिया है कि भारत की पहले परमाणु हथियार न इस्तेमाल करने की घोषित नीति परिस्थितियों के हिसाब से बदल भी सकती है. लेकिन सवाल ये कि पाकिस्तान क्या परमाणु हमला करेगा. जो देख आमने-सामने की लड़ाई नहीं लड़ सकता, वह परमाणु हमला करेगा, ये हास्यास्पद है. ये जानते हुए कि उसके ऐसे किसी दुस्साहस का मतलब पाकिस्तान का नामो-निशान मिट जाना होगा, पाकिस्तान ये हिमाकत नहीं करेगा. उसका परमाणु राग बस दुनिया को ये संदेश देने के लिए भारत और पाकिस्तान कश्मीर को लेकर परमाणु युद्ध के दहाने पर खड़े हैं. ये बात अलग है कि दुनिया में हर हकीकत जानता है और पाकिस्तान की इन बातों को तवज्जो नहीं दे रहा है.
पाकिस्तान न जंग लड़ेगा, न परमाणु युद्ध करेगा. पाकिस्तान एक विफल देश है. उसके पास ले-देकर एक विकल्प है. वह तीन सूत्री रणनीति पर काम कर रहा है. वह है, भाड़े का आतंकवाद. पाकिस्तान ने स्पेशल सर्विस ग्रुप के सौ कमांडो नियंत्रण रेखा पर उतारे हैं. ये पाकिस्तान की बार्डर एक्शन टीम (बैट) का संचालन करते हैं. बैट टीम का नेतृत्व ये एसएसजी कमांडो करते हैं. इस टीम में चार से पांच पाकिस्तान सेना के रेगुलर, आठ से दस प्रशिक्षित आतंकवादी शामिल होते हैं. यानी हमारा मुकाबला सीमा पर सौ बैट टीम्स, यानी सौ छोटे-छोटे हमलावर दस्तों से है. सीमा के अंदर मौजूद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई या लश्कर, हिज्बुल जैसे आतंकवादी संगठनों के स्लीपिंग सेल्स को पाकिस्तान एक्टिव कर सकता है. ये स्लीपिंग सेल पाकिस्तान की तरफ से आने वाले किसी भी आतंकवादी के साथ देश में गंभीर घटना अंजाम दे सकते हैं. हाल ही में एक वीडियो में पत्रकार बरखा दत्त ने पाकिस्तान को सुझावनुमा संदेश में चेतावनी दी कि पुलवामा जैसा हमला हो सकता है. इसके अलावा पाकिस्तान समुद्री रास्ते से घुसपैठ की फिराक में है, जिससे भारत के किसी बड़े व्यापारिक बंदरगाह या शहर को निशाना बनाया जा सके. भारत तैयार है. थलसेना प्रमुख जनरल विपिन रावत जम्मू-कश्मीर पहुंच चुके हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल अपने लंबे दौरों में ये इंतजाम कर आए हैं कि नियंत्रण रेखा या घाटी में ऐसी कोई हिमाकत पाकिस्तान न कर सके. भारतीय नौसेना के युद्धपोत अरब सागर में हाई अलर्ट पर हैं.
पाकिस्तान के ये इरादे और कोशिशें कब नहीं थीं. लेकिन अब बात अलग है. अब देश ऐसे हाथों में है, जिसे अपने हर देशवासी की जान की परवाह है. जिसके पास देश की सरहदों की हर कीमत पर हिफाजत की इच्छाशक्ति है. जिसके पास किसी भी हिमाकत का घर में घुसकर जवाब देने और मुंहतोड़ जवाब देने का हौंसला है.