विनम्र श्रद्धांजलि : नहीं रहीं पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज
   दिनांक 07-अगस्त-2019
 
दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का मंगलवार देर रात एम्स में निधन हो गया। सीने में दर्द की शिकायत के बाद 67 वर्षीय सुषमा स्वराज को रात 9:35 बजे एम्स लाया गया था। डॉक्टरों ने प्रयास किया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया रात 11 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्होंने अपने अंतिम ट्वीट में कश्मीर पर सरकार के कदम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी थी। उन्होंने कहा था कि वह इस दिन का पूरे जीवनभर इंतजार कर रही थीं।
 
गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई केंद्रीय मंत्री और नेता देर रात एम्स पहुंचे। उनका अंतिम संस्कार बुधवार दोपहर तीन बजे लोधी रोड श्मशान घाट पर किया जाएगा। इससे पहले पार्थिव शरीर को दर्शन के लिए भाजपा मुख्यालय में रखा जाएगा। भाजपा के ओजस्वी वक्ताओं में शुमार सुषमा स्वराज का जन्म 14 फरवरी 1952 को हरियाणा के अंबाला छावनी में हुआ था। 1977 में महज 25 साल की उम्र में वे हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री बन गई थीं।

इंदिरा गांधी के बाद दूसरी महिला विदेश मंत्री बनने का गौरव
नेतृत्व क्षमता के लिहाजा से सुषमा स्वराज को भाजपा में सबसे दमदार राजनेताओं में गिना जाता रहा है। 2014 में हुए लोकसभा चुनावों में उन्होंने विदिशा से जीत हासिल की। उनकी काबिलियत और पार्टी में उनके योगदान को देखते हुए मोदी ने उन्हें विदेश मंत्री बनाया। इंदिरा गांधी के बाद सुषमा स्वराज दूसरी ऐसी महिला थीं, जिन्होंने विदेश मंत्री का पद संभाला था।

राष्ट्रपति कोविंद और पीएम मोदी ने जताया दुख
सुषमा स्वराज के निधन पर राष्ट्रपति कोविन्द ने लिखा, "श्रीमती सुषमा स्वराज के निधन से बहुत दुःख हुआ है। देश ने अपनी एक अत्यंत प्रिय बेटी खोई है। सुषमा जी सार्वजनिक जीवन में गरिमा, साहस और निष्ठा की प्रतिमूर्ति थीं। लोगों की सहायता के लिए वे हमेशा तत्पर रहती थीं। उनकी सेवाओं के लिए सभी भारतीय उन्हें सदैव याद रखेंगे।"
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके कहा
 
"सुषमा जी का निधन मेरे लिए निजी क्षति है। वे उन महान कार्यों के लिए बड़ी आत्मीयता से याद की जाएंगी,जो उन्होंने देश के लिए किया।" मोदी ने स्वराज को असाधारण वक्ता और उत्कृष्ट सांसद बताया तथा कहा कि सभी राजनीतिक दलों के लोग उनकी प्रशंसा करते थे और उनका सम्मान करते थे। मोदी ने कहा,''जब बात विचारधारा की आती थी अथवा भाजपा के हितों की आती थी तो वह किसी प्रकार का समझौता नहीं करती थीं, जिसे आगे ले जाने में उनका बहुत योगदान था।"