कहते हैं शान से .... हम वंशज हैं श्री राम के
   दिनांक 10-सितंबर-2019

करोड़ों-करोड़ हिन्दू धर्मावलम्बियों की रामजन्म भूमि में गहरी आस्था है. यही वजह कि सुप्रीम कोर्ट के इस सवाल पर कि - भगवान राम का कोई वंशज है ? हजारों रघुवंशी क्षत्रिय अयोध्या पहुंचे. अखंड रघुवंशी समाज कल्याण परिषद के हजारों लोगों ने यह दावा किया कि वो लोग भगवान राम के वंशज हैं. अयोध्या ही उनका मूल स्थान है. देश में जहां कहीं भी रघुवंशी है वो लोग अयोध्या से ही गए हैं. इस सम्बन्ध में उन लोगों ने अयोध्या के जिलाधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा. ज्ञापन की प्रति सुप्रीमकोर्ट एवं राष्ट्रपति को भी भेजा.
हजारों की संख्या में रघुवंशी समाज के लोगों ने पैदल चलकर रामलला का दर्शन किया. ‘नो एंट्री’ लागू होने की वजह से इनके वाहनों को हनुमान गढ़ी तिराहे के पास ही रोक दिया गया था. इन लोगों ने अपने वृद्ध गुरु कनक बिहारी दास जी के लिए वाहन की अनुमति मांगी थी मगर पुलिस ने अनुमति नहीं दी. इसके बाद सभी लोग पैदल चल कर ही दर्शन करने गए.
रघुवंशी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरिशंकर सिंह ने कहा कि " रघुवंशी समाज के लोगों ने मध्य प्रदेश , महाराष्ट्र , राजस्थान सहित कई जगहों से यात्रा निकालते हुए अयोध्या में रामलला के दर्शन किए. इसके साथ ही एक पुस्तक हम लोगों नें तैयार की है जिसमे १३ करोड़ बार राम का नाम लिखा गया है. इस पुस्तक को अयोध्या के राम नाम बैंक में जमा किया गया. राजा अज से लेकर आखिरी रघुवंशी राजा का विवरण हम लोगों ने तैयार किया है. उसे भी अयोध्या के जिलाधिकारी को सौंपा गया.”
भगवान राम के निकट मित्र के तौर पर पक्षकार बने थे जस्टिस देवकी नंदन
यहां पर उल्लेखनीय है कि राम जन्म भूमि के मुकदमे की सुनवाई करते हुए जस्टिस देवकी नन्दन ने यह पाया था कि भगवान राम उस मुकदमे में पक्षकार ही नहीं थे. उन्हें लगा कि राम जन्म भूमि का मुकदमा है और भगवान राम ही इसमें पक्षकार नहीं हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट से अवकाश प्राप्त करने के बाद जस्टिस देवकी नंदन ने पक्षकार बनने के लिए हाईकोर्ट में अपने कागजात दाखिल किये. उन्होंने कोर्ट से प्रार्थना की कि उन्हें भगवान राम के निकट मित्र (As a next friend of Ram Lala ) के तौर पर इस मुकदमे का पक्षकार स्वीकार किया जाए. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी अर्जी स्वीकार करते हुए उन्हें इस मुकदमे का पक्षकार मान लिया.