‘‘हमारा लक्ष्य है जनता को पारदर्शी शासन के साथ उसका अधिकार देना’’
   दिनांक 12-सितंबर-2019
यह उसी हरियाणा का दृश्य है जो कुछ समय पहले तक तीन कुनबों और दो वर्गों के लिए जाना जाता था। पर भाजपा की सरकार बनने के बाद बदलाव की बयार बह रही है। विकास की बात पर मुहर लग रही है। सही और गलत का आकलन हो रहा है। उपचुनाव, मेयर के चुनाव और हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने विजय पताका फहराकर जहां विरोधियों को राज्य में शिकस्त दी वहीं जनता ने भी अपना रुझान स्पष्ट कर दिया कि वह सिर्फ और सिर्फ विकास और राष्ट्रहित की नीतियों को साथ लेकर चलने वाले दल के साथ है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल से जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान राज्य के विभिन्न मुद्दों, चुनौतियों, विधानसभा चुनाव की स्थितियों पर पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर ने विस्तृत बात की। प्रस्तुत हैं बातचीत के संपादित अंश:-

पिछले पांच साल राज्य में भाजपा के लिए चुनावी सफलताओं के साल रहे हैं। चाहे मेयर का चुनाव हो, जींद का उपचुनाव या लोकसभा की सभी सीटों पर विजय पाना। ऐसे में इस यात्रा की जरूरत क्यों महसूस हुई, जबकि सकारात्मक माहौल तो स्पष्ट दिखाई दे रहा है?
देखिए, लोकतंत्र में तकाजा होता है कि चुनाव के समय जनसंपर्क जरूर करना चाहिए। इसलिए हम जनसंपर्क करते ही हैं, चाहे हमारे पक्ष में पूर्ण माहौल हो या न हो। जब हम विपक्ष में थे तब भी हमने इसी तरह यात्राएं निकालीं और राज्य के लोगों से संपर्क किया। दूसरी बात, आज हमारे पक्ष में माहौल बना हुआ है, ऐसे में यह यात्रा निकालना इसलिए आवश्यक है, क्योंकि जो माहौल हमारे पक्ष में बना हुआ है, वह बना रहे और हम इस यात्रा के माध्यम से लोगों से अधिकाधिक जुड़ सकें।
राज्य सत्ता में परिवर्तन तो आप ले ही आए थे। ऐसे में क्या यह कह सकते हैं कि आप इस यात्रा के माध्यम से हरियाणा की राजनीति बदलने के लिए निकले हैं?
यकीनन हमने पांच साल में राजनीति के तंत्र को बदला है। लेकिन चुनाव के समय जनता की अपेक्षा होती है कि एक राजनीतिक दल का मुखिया या विशिष्ट जन उनसे मिलने आए, संपर्क करने आए। दूसरी ओर इसके उलट हमने कितने भी अच्छे काम किए हों पर लोगों से संपर्क करने नहीं गए तो हमारे बहुत से अच्छे कामों का कोई मतलब नहीं रह जाता, क्योंकि इससे समाज को लगता है कि राजनीतिक दल द्वारा उसकी उपेक्षा की गई है। इसलिए इस तरह की यात्राओं में जब हम लोगों से मिलते हैं तो हमने पांच साल में उनके लिए क्या कुछ किया, वह बताते हैं। वे भी इस बात को अच्छे से समझते हैं और चीजों में फर्क करते हैं। इसलिए यह जनसंपर्क और इसे करने का अभ्यास हमारा बना रहे, सेवाभाव बना रहे, इसलिए इस तरह की यात्राओं की जरूरत होती है।
जब आपने हरियाणा की कमान थामी थी तो विपक्षी एक माहौल बनाने में लगे थे कि ‘अनाड़ी’ के हाथों में कमान थमा दी गई। लेकिन जिसे वे ‘अनाड़ी’ कहते थे वह आज सबसे बड़ा ‘खिलाड़ी’ बन गया है, इस यात्रा का रंग देखकर ऐसा ही लगता है। इस बदलाव के पीछे क्या है?
देखिए, हमने शासन करना शुरू किया तो शासन की पद्धति यह रही कि जनता की तकलीफों को समझो और उसकी समस्याओं को दूर करने के लिए काम करो। अगर आपने यह सब किया और उसकी तकलीफें दूर हो गर्इं तो वही जनता आपको सिर-माथे बिठाएगी। शासन क्या होता है, उसकी व्यवस्थाएं क्या होती हैं, जनता को इसका लाभ दिखना चाहिए। तब वह किसी दूसरे शासन से तुलना करेगी कि किसने सही व्यवस्था को लागू किया। हकीकत तो यह है कि अभी तक राज्य सही शासन व्यवस्थाएं लागू ही नहीं की गई थीं।
राज्य में कुछ ही समय बाद विधानसभा चुनाव हैं। आपका मुकाबला किससे है?
मुकाबले की बात करें तो पार्टी के नाते कांग्रेस भी इस समय कई खेमों में बंट गई है। इनेलो भी दो फाड़ हो गया है। अन्य दल भी आपस में एकत्र होकर माहौल बना रहे हैं कि इकट्ठे हो जाएं तो मुकाबला कर लेंगे। लेकिन हकीकत वे भी जानते हैं। लोकसभा चुनाव में इन दलों ने बहुत प्रयत्न किए लेकिन भाजपा के सामने टिक नहीं पाए। देश में हर जगह भाजपा को अपार समर्थन मिला और इन दलों को जो मिला वह हमारे राज्य और देश के लोगों ने देखा। खासकर कांग्रेस की क्या गत हुई, वह जगजाहिर है। वर्तमान में चहुंओर राष्ट्रभाव की लहर चल रही है। ऐसे में लोग सही और गलत को भलीभांति समझते हैं। यही कारण है कि राज्य के लोगों में भाजपा के प्रति उत्साह और ज्वार उमड़ा हुआ है और टक्कर में कोई नहीं है। यात्रा के माहौल से इसे समझा जा सकता है।

माहौल आपके पक्ष में है। विरोधी पस्त और दम भर रहे हैं। ऐसे में, फिर भी भाजपा किसी के साथ हाथ मिलाएगी ?
भाजपा के हाथ मिलाने का कोई कारण ही नहीं बनता। स्वाभाविक रूप से यहां ऐसा कोई दल है ही नहीं राजग के नाते से, जो केंद्र में हमारा सहयोगी हो। और जो हमारे साथ केंद्र में हैं, वे राज्य में हमारे साथ हैं।
 
यकीनन भाजपा के पक्ष में हवा दिखाई दे रही है लेकिन इस हवा के झोंके में बाहरी चीजें भी उड़कर आ रही हैं। ऐसे में बाहरी व्यक्ति संगठन और टिकट वितरण में हावी न रहें, इस दिशा में आपने क्या सोचा है?
देखिए, हमने किसी को भी भाजपा की सदस्यता दिलाई है तो किसी शर्त के आधार पर नहीं दिलाई। बहुत से लोग तो ऐसे भी शामिल हुए हैं, जिन्होंने कहा कि हमें पार्टी में शामिल कर लो, चुनाव मत लड़ाना। इससे जो बात स्पष्ट है वह यह कि जिन दलों से लोग आ रहे हैं, उन्हें उस पार्टी में कोई भविष्य नहीं दिखता। क्योंकि कोई भी व्यक्ति डूबती नाव पर सवार नहीं होना चाहता और ऐसे लोग यह भी जानते हैं कि वे जिन दलों में हैं वहां से चुनाव जीतना संभव ही नहीं है। इसलिए क्यों कोई इन दलों
में रहे।
अपने पांच साल के कार्यकाल में आप काम के तरीकों में पारदर्शिता लाए हैं। लेकिन पिछले शासन में हुए भ्रष्टाचार के मामलों पर कार्रवाई की गति पर आपका क्या रुख है?
देखिए, यह एक प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में एजेंसी अपने काम करती रहती हैं। सरकार के पास जो भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारी व्यक्ति से संबंधित दस्तावेज होते हैं, सरकार सीबीआई एवं अन्य संबंधित एजेंसियों को वह उपलब्ध कराने का काम करती है। इसलिए अतत: निर्णय इन एजेंसियों को करना होता है कि भ्रष्टाचारी कौन है, किसमें दोष है! लेकिन इतना जरूर कहना चाहूंगा कि दोषियों को निश्चित ही सजा मिलेगी और निर्दोष को कोई हाथ नहीं लगाएगा।
आपकी पारदर्शिता की बात का संगठन और कार्यकर्ताओं पर क्या असर देखते हैं?
हरियाणा में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है। कई बार अपने कार्यकर्ताओं का अनुभव आया कि सरकार बनी है तो हमारे काम होने चाहिए। लेकिन जब उन्हें सैद्धांतिक पृष्ठभूमि का भान कराते हैं और बताते हैं कि हम-हमारे लिए नहीं, सबके लिए और सबमें ‘हम’ भी हैं। शुरुआत में उनको समझ में नहीं आता था लेकिन पारदर्शिता के जब परिणाम निकलने शुरू हुए तो उन सभी ने इसे स्वीकार किया। आज वही कार्यकर्ता कहते हैं कि आपने ठीक किया। देखिए, एक बात सभी को समझनी चाहिए कि कोई भी सरकार उसके दल के कार्यकर्ताओं की नहीं बल्कि जनता की होती है। हां, इसे बनाया कार्यकर्ताओं ने है और उसका श्रेय भी उन्हें जाता है लेकिन जब सरकार बनती है तो वह समस्त जन की होती है और सबके हित की कामना को लेकर काम करती है।

पहले हरियाणा की राजनीति को तीन कुनबों और दो वर्गों की राजनीति कहते थे। अब इस राजनीति को आप कैसे देखते हैं और यह बदलाव कैसे आया?
पहली बात तो यह कि हमारा सैद्धांतिक मत यह है कि हम जात-पात की राजनीति नहीं करते और भाजपा का इसमें कोई विश्वास नहीं है। हम सबको बराबर मानकर चलते हैं। हां, सिद्धांतों के नाते से जो भारतीयता, राष्ट्र के सिद्धांत के साथ चलता है भाजपा उसको प्राथमिकता देती है।
लोकसभा चुनाव में भाजपा को देश सहित हरियाणा में भी अपार सफलता मिली। ऐसे में विधान सभा चुनाव में मुद्दे राष्ट्रीय होंगे या राज्य के ?
अभी-अभी लोकसभा का चुनाव हुआ है और उसमें सभी राष्ट्रीय मुद्दे आए। चाहे अर्थनीति की बात हो, तीन तलाक की बात हो, जीएसटी का विषय हो, रक्षा-सुरक्षा और विदेश नीति रही हो, सभी को देश की जनता ने सुना-समझा और विश्वास जताया और भाजपा को सिर-आंखों पर बिठाया। अब भी लोगों की भाजपा के प्रति वही आकर्षण और अच्छाई की भावना बनी हुई है। इसलिए जो राष्ट्रीय मुद्दे हैं वे तो जनता के सामने हैं ही, प्रदेश के मुद्दे भी हम जनता के समक्ष रखेंगे। ऐसे में दोनों को मिलाकर और भी आकर्षण पैदा होगा और लोग भाजपा की तरफ खिंचे चले आएंगे।
प्रशासनिक दक्षता और अमन-चैन के मॉडल के बावजूद मेवात जैसे क्षेत्रों से समय-समय पर असहिष्णुता और आपराधिक प्रवृत्ति की खबरें आती रहती हैं। ऐसे क्षेत्रों के लिए कोई कार्य योजना है?
जब कोई इलाका मुख्यधारा से अलग होकर सोचता है तो सबसे पहला काम होता है, ऐसे क्षेत्रों में जाकर वहां की स्थिति का आकलन करके वहां जो करना चाहिए, उस दिशा में हम काम करते रहते हैं। इससे उनकी सोच में परिवर्तन आता है। देखिए, आज के समय किसी को जोर-जबरदस्ती से ठीक नहीं किया जा सकता। ऐसे लोगों के कल्याण, उन्हें सही-गलत का भान कराकर, उन्हें सही दिशा दिखाकर ठीक किया जा सकता है और हम वह करते भी हैं।
पंजाब-दिल्ली के साथ पानी के बंटवारे पर आपकी क्या राय है?
यह बंटवारा तो हो चुका है और जो समझौता हुआ, उसमें सभी कुछ निश्चित है। इस पानी को लाने के लिए एसवाईएल चैनल है। सर्वोच्च न्यायालय में कुछ मामला लंबित है। जैसे ही वह आदेश आएगा तो हरियाणा को जितना पानी मिलना
चाहिए, वह मिलेगा।
हरियाणा से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की मुहिम शुरू हुई, जो देश के लिए मिसाल बनी। अगली बड़ी मुहिम-मुद्दा हरियाणा की तरफ से क्या होने वाला है ?
वैसे राष्ट्रीय स्तर के जो विषय समाज से जुड़े होते हैं, उन्हें आगे बढ़ाना और उन पर काम करना यह राष्ट्रीय नीति के अनुसार हम करते हैं। चाहे वह ‘बेटी बचाओ’ का विषय हो, जल संरक्षण की बात हो या आगे चलकर जनसंख्या वृद्धि पर कोई नीति बनती है तो उस पर भी हम काम करने को तैयार हैं। पर्यावरण के ऊपर भी हम काम करेंगे और समाज के लोग अच्छा जीवन जी सकें, इस पर भी काम करने की जरूरत है। ये सभी मुद्दे हमारे एजेंडे के तहत हैं।
दल-बदल के दौरान दागी दूर रहें, इस पर क्या चिंता है आपकी?
हरेक व्यक्ति का पिछला एक रिकॉर्ड और इतिहास होता है। जिनका इतिहास ठीक नहीं रहा है और जो भाजपा के अनुरूप नहीं हैं, उनसे स्वाभाविक तौर पर हम सचेत रहते हैं।
कांग्रेस-इनेलो की टूट को आप कैसे देखते हैं?
यह घर की फूट है। सामान्यत: क्षेत्रीय दलों के बारे में देखा जाता है कि ये दो-तीन पीढ़िया ही चलती हैं, उससे ज्यादा नहीं चलती। क्योंकि इनका कोई राष्ट्रीय विचार तो होता नहीं, अगर कुछ होता है तो सिर्फ राज करना और किसी तरह सत्ता में बने रहना। और जब इनका विस्तार होता है तो महत्वाकांक्षा बढ़ती है और इनमें टकराव आता है। लेकिन हम तो यही चाहते हैं कि वे एक रहें लेकिन फिर भी उनमें बीच में फांक पड़ रही, अलग हो रहें, तो इसमें उनका ही दोष है, किसी और का नहीं।
भाजपा कांग्रेस मुक्त भारत की बात करती है। ज्यादातर जगहों से कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो चुका है। मगर एक राजनीतिक दल को मिटाना क्यों जरूरी लगता है?
कांग्रेस मुक्त भारत का मतलब दल को मिटाना नहीं है, बल्कि उसका जो विचार है उसे ठीक करना है। इसलिए सोच को ठीक करने की जरूरत है। हम चाहते हैं कि पार्टी खत्म करने की बजाए वह अपनी सोच को ठीक करें।
हरियाणा में खेती-किसानी की एक समृद्ध परंपरा रही है। सांस्कृतिक विरासत के मामले में भी इसकी अपनी विशेष महत्ता है। इसके अलावा औद्योगीकीकरण और लोगों का पलायन भी देखा है। ऐसे में भविष्य का हरियाणा कैसा होगा?
हरियाणा कृषि प्रधान प्रदेश है। लेकिन बढ़ती आबादी और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के नाते से जमीन की उपलब्धता कम है। आबादी लगातार बढ़ रही है और बड़ी बात यह है कि एनसीआर का भार भी हरियाणा पर बढ़ रहा है। इस नाते से हमें औद्योगिकीकरण की ओर निश्चित रूप से जाना होगा ताकि लोगों को रोजगार मिल सके। दूसरी बात, जहां कृषि योग्य भूमि है वहां आधुनिक तरीके से खेती हो, कृषि उत्पादों के लिए बाजार की उपलब्धता हो, गुणवत्ता बेहतर और उसकी सही तरीके से मार्केटिंग हो, इस ओर हमें भविष्य में जाना ही होगा, ताकि कम खेती और छोटी जोत में भी किसानों की अच्छी आमदनी हो सके।
प्रधानमंत्री मोदी अक्सर गांव की आत्मा और शहरों की सुविधाओं का संदर्भ देते हैं। क्या ऐसा हरियाणा आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा?
यह हमारा सिद्धांत है कि गांव की आत्मा हो और शहरों जैसी सुविधाएं हों। हरियाणा ऐसा निश्चित बन सकता है।
अपने कार्यकाल की पांच उपलब्धियां और पांच चुनौतियां किन्हें मानते हैं ?
इस नाते मेरे मन में कभी कोई विचार नहीं आया। लेकिन फिर भी जैसे, पढ़ी-लिखी पंचायतें, स्किल डेवलपमेंट का अलग से विश्वविद्यालय बनाया, नौकरियों में पारदर्शिता लाने सहित कई क्षेत्रों में हमारी सरकार ने कार्य किए हैं। रही चुनौतियों की बात तो, रोजगार सृजन हमारे लिए चुनौती है। इसके लिए हम और प्रयत्न करेंगे। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के अंदर पीने के पानी का संकट है तो वहीं विकास का अभाव भी दिखता है, इसे भी दूर करने के लिए हम पूर्ण प्रयत्न करेंगे। मुझे विश्वास है कि हम जल्द ही इसमें सफलता पाएंगे। कुल मिलाकर हम जनता को एक ऐसा पारदर्शी शासन देना चाहते हैं, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को यह लगे कि मुझे मेरा अधिकार मिला है और उसके मन में रंच मात्र भी अन्याय का भाव न आए।
हमने शासन करना शुरू किया तो उसकी पद्धति यही रही कि जनता की तकलीफों को समझो और उसकी समस्याओं को दूर करने के लिए काम करो। अगर आपने यह सब किया और उसकी तकलीफें दूर हो गईं तो वही जनता आपको सिर माथे बिठाएगी।
हम जात-पात की राजनीति नहीं करते और भाजपा का इसमें कोई विश्वास नहीं है। हम सबको बराबर मानकर चलते हैं। हां, सिद्धांतों के नाते से जो भारतीयता, राष्ट्र के सिद्धांत के साथ चलता है, भाजपा उसको प्राथमिकता देती है।
कांग्रेस मुक्त भारत का मतलब किसी दल को मिटाना नहीं है, बल्कि उसका जो विचार है उसे ठीक करना है। इसलिए इस सोच को ठीक करने की जरूरत है। हम चाहते हैं कि पार्टी खत्म करने की बजाए वह अपनी सोच को ठीक करें।