यासीन मलिक ने केवल मेरे पति की हत्या ही नहीं कि उसने हमें बर्बाद कर दिया
   दिनांक 13-सितंबर-2019
एक अंग्रेजी अखबार से हुई बातचीत में स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना की 68-वर्षीय विधवा शालिनी ने कहा कि उन्हें 17 फरवरी, 2006 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को यासीन मलिक से हाथ मिलाते देख कर बहुत बुरा लगा था। “मुझे उम्मीद नहीं थी कि वह किसी आतंकवादी से हाथ मिलाएंगे

 पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से ​हाथ मिलाता आतंकी यासीन मलिक
आतंकवादी से अलगाववादी नेता बने यासीन मलिक और अन्य को 1990 में चार वायु सेना कर्मियों की हत्या के मामले में यहां टाडा कोर्ट के सामने पेश नहीं किए जा सकने के बाद स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना की 68-वर्षीय विधवा शालिनी खन्ना ने न्याय की मांग करते हुए कहा है कि मलिक को फांसी दी जानी चाहिए। अदालत ने बीते 7 सितंबर को इस मामले में ग़ैर-जमानती वारंट जारी किए थे।
एक अंग्रेजी अखबार से हुई बातचीत में दौरान उन्होंने कहा, “यासीन मलिक ने न केवल मेरे पति की हत्या की, बल्कि मेरी सास, मेरे ससुर और मेरी मां की भी हत्या कर दी।    मेरे दो बच्चों का बचपन खो गया। इस आतंकवादी ने एक क्षण में हमारी खुशियां छीन कर हमारी दुनिया उलट-पुलट कर दी थी। हमें बर्बाद कर दिया था।”
शालिनी ने 25 जनवरी, 1990 की भयावह सुबह को याद करते हुए बताया, “मैं रावलपोरा में रहती थी और हमारा घर घटनास्थल से सिर्फ 50 गज की दूरी पर था। कर्फ्यू लगा हुआ था। इसी बीच मुझे पटाखे चलने जैसी आवाज आई। जब मुझे कुछ समझ नहीं आया तो मैं छत पर गई और देखा कि कुछ दूरी पर सेना के कुछ वाहन और कुछ वर्दीधारी लोग हैं। मैं वहां जब यह देखने पहुंची कि हुआ क्या है तो मुझे अपने पति का ब्रीफकेस दिखाई पड़ा जिस पर गोली का निशान था। उसे देखते ही मुझे एहसास हुआ कि कुछ गलत हुआ है। ”
“मैंने निगाह आगे दौड़ाई तो वहां से कुछ ही दूरी पर मुझे खून में लथपथ मेरे पति दिखाई पड़े। मैंने देखा कि उनके पेट में गोली लगी थी। पहले अचानक मुझे लगा कि अगर मेरे पति एक भी गोली नहीं झेल सकते, तो हमारी सीमाएं कैसे सुरक्षित रह सकती हैं। हालांकि बाद में पता चला कि 38 वर्षीय स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना को एके- 47 असाल्ट राइफल की 27 गोलियां लगी थीं।”
“बादामी बाग छावनी अस्पताल पहुंचाए जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया और यहीं मुझे पता चला कि यासीन मलिक से छीना-झपटी होने के बाद उसने मेरे पति पर एके-47 की पूरी मैगज़ीन खाली कर दी थी।”
शालिनी ने कहा कि वहां मौजूद फ्लाइट लेफ्टिनेंट बीआर शर्मा, जो उनके पति के साथ थे, ने उन्हें बताया था कि उनके पति पर यासीन मलिक ने हमला किया था। शालिनी ने कहा, “उन्होंने मुझे बताया कि मलिक हमलावरों का नेतृत्व कर रहा था और उसने मेरे पति से नट्टीपोरा का रास्ता पूछा था। जब रवि उसे रास्ता बता रहे थे उसी समय मलिक ने पहली गोली उनके पेट पर चलाई थी। इसके बाद मेरे पति हमलावर से भिड़ गए और मलिक ने मेरे पति की पीठ पर एके-47 की पूरी मैगज़ीन खाली कर दी।”
शालिनी ने कहा कि उन्हें 17 फरवरी, 2006 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को यासीन मलिक से हाथ मिलाते देख कर बहुत बुरा लगा था। “मुझे उम्मीद नहीं थी कि वह किसी आतंकवादी से हाथ मिलाएंगे। प्रधानमंत्री होने के नाते उन्हें सही और गलत के बीच का अंतर पता होना चाहिए था। मनमोहन सिंह का मलिक से हाथ मिलाना मुझे अपने पति के सर्वोच्च बलिदान का घोर अपमान किए जाने जैसा महसूस हुआ था। ऐसा लग रहा था जैसे पूरी दुनिया मेरा मज़ाक उड़ा रही है, लेकिन प्रधानमंत्री को तो अपना कश्मीर एजेंडा चलाने के लिए मलिक से बातचीत करनी थी।”
“इस बात की चिंता किसे है कि मेरे पति ने अपनी बेटी को उसके जन्म के छह महीने बाद देखा था। ‘जिंदाबाद’ और ‘अमर रहे’ के नारों से शहीदों के परिवारों और बच्चों के खाली पेट नहीं भरते,” कहते हुए भी शालिनी ने भरोसा जताया है कि तीन दशकों के बाद ही सही, आखिरकार उसे न्याय मिलेगा।
“उस समय मेरे बेटे और बेटी की उम्र सिर्फ आठ और छह साल की थी। मेरे पति की हत्या होने के बाद उसके सदमे में मेरी सास, ससुर और मेरी माँ की मौतें जल्दी-जल्दी हो गईं। बीते तीन दशकों में मैं बहुत सारी मुश्किलों से गुजरी हूं। मैं खुद 38 साल की थी और मुझ पर दो छोटे बच्चों को पालने और उन्हें अच्छा नागरिक बनाने की जिम्मेदारी आ पड़ी थी। ऐसा कर पाने के लिए मैंने कड़ी मेहनत की है और फकीरों जैसी जिंदगी गुजारी है।”