यूपी सरकार अब मंत्रियों का इनकम टैक्स नहीं करेगी जमा
   दिनांक 15-सितंबर-2019

करीब 38 वर्षों से उत्तर प्रदेश सरकार अपने मंत्रियों के वेतन पर लगने वाला कर जमा कर रही है. कभी इस व्यवस्था की समीक्षा नहीं की गई. एक जमाने में जब मंत्रियों का वेतन और भत्ता काफी कम हुआ करता था. तब यह व्यवस्था बनाई गई थी. मौजूदा समय में मंत्रियों को वेतन के साथ कई भत्ते भी मिलते हैं. अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्णय लिया है कि मंत्री अपना कर स्वयं जमा करेंगे. वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि यह काफी पुरानी व्यवस्था है. सरकार पर कर का बोझ कम किया जाएगा. इस व्यवस्था को समाप्त किया जाएगा.
उत्तर प्रदेश मंत्री (वेतन , भत्ता , प्रकीर्ण उपबंध ) अधिनियम 1981 के बिंदु 3 (3 ) में व्यवस्था है कि प्रत्येक मंत्री , राज्य मंत्री एव उप मंत्री का वेतन उस कर के अतिरिक्त होगा जो उस वेतन ( जिसके अंतर्गत परिलब्धियां भी हैं ) के सम्बन्ध में आयकर से सम्बंधित उस समय लागू किसी विधि के अधीन देय हो. ऐसे कर का वहन राज्य सरकार के द्वारा किया जाएगा.
वर्ष 1981 में जब विश्वनाथ प्रताप सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे. उस समय इस अधिनियम को पारित किया गया था. इस अधिनियम के अनुसार मंत्रियों के वेतन पर जो आयकर बनेगा. उसे उत्तर प्रदेश सरकार जमा करेगी. 38 वर्ष से सरकार इस कर को बकायदे जमा करती आ रही है. अभी तक इस बारे में किसी ने समीक्षा नहीं की थी. मगर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फैसला किया है कि अब इस अधिनियम में आवश्यक बदलाव किये जायेंगे. पिछले माह मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद ही वित्त मंत्री का कार्यभार संभालते हुए सुरेश खन्ना ने फिजूल खर्ची रोकने की बात कही थी.
अधिनियम में बदलाव की आवश्यकता इसलिए भी है क्योंकि जिस समय यह व्यवस्था लागू की गई थी. उस समय मंत्रियों का वेतन काफी कम था. पूरा वेतन उन्हें प्राप्त हो सके इसलिए उस पर लगने वाला कर सरकार के जिम्मे लगा दिया गया था. वर्तमान समय में मंत्रियों का वेतन तो बहुत ज्यादा नहीं है मगर उनको मिलने वाले कई भत्ते ऐसे हैं जिसको मिलाकर उनकी मासिक आय ठीक - ठाक हो जाती है. बता दें कि वर्ष 1981 में सभी मंत्रियों को एक हजार रूपया प्रतिमाह वेतन मिलता था और उप मंत्री के लिए 650 रूपया महीना वेतन निर्धारित था. वर्तमान समय में मुख्यमंत्री, मंत्री और सभी राज्य मंत्री को 40 हजार रूपया प्रति माह वेतन मिलता है. चिकित्सा भत्ता 30 हजार रूपया महीना, दैनिक भत्ता 800 रूपये प्रतिदिन मिलता है. इसके साथ ही कुछ और भी भत्ते मिलते हैं.

19 मुख्यमंत्रियों ने उठाया लाभ
उत्तर प्रदेश के मंत्रियों के वेतन, भत्ते और विविध अधिनियम-1981 के तहत एक कानून लागू किया गया था. उस समय मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप (वीपी) सिंह थे. तब से लेकर अब तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, मायावती, कल्याण सिंह, राम प्रकाश गुप्ता, राजनाथ सिंह, श्रीपति मिश्र, वीर बहादुर सिंह और नारायण दत्त तिवारी सहित 19 मुख्यमंत्रियों ने इस कानून का जमकर लाभ उठाया.
विधानसभा में जब यह अधिनियम पारित किया गया था, उस समय वीपी सिंह ने सदन को बताया था कि राज्य सरकार को मंत्रियों के आयकर का बोझ उठाना चाहिए, क्योंकि अधिकांश मंत्री गरीब पृष्ठभूमि से हैं और उनकी आय कम है. उत्तर प्रदेश ट्रेजरी ने वर्ष 1981 से अब तक लगभग सभी मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के आयकर बकाये का भुगतान किया है.