एएमयू ने राजा महेन्द्र प्रताप को भुलाया योगी सरकार ने अपनाया
   दिनांक 17-सितंबर-2019
राजा महेंद्रप्रताप ने ही अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के लिए जमीन दान में दी थी लेकिन एमयू ने उन्हें भुला दिया. यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर भी जो तथ्य दिए गए हैं. उसमें सिर्फ सैय्यद अहमद खान के योगदान का जिक्र किया गया है.

 राजा महेंद्र प्रताप सिंह
जिस अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना के लिए राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने अपनी पूरी सम्पत्ति दान कर दी थी. उस अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने राजा महेंद्र प्रताप सिंह को कभी याद करने की भी जहमत नहीं उठाई. महिमामंडन सिर्फ सैय्यद अहमद खान का किया गया. हर जगह पर यही विवरण दर्ज है कि सैय्यद अहमद खान ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर भी जो तथ्य दिए गए हैं. उसमें सिर्फ सैय्यद अहमद खान के योगदान का जिक्र किया गया है. इस विवरण में कहा गया है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी 467.6 एकड़ भूमि में फ़ैली हुई है. मगर यूनिवर्सिटी के लिए जमीन का एक बड़ा हिस्सा दान करने वाले राजा महेंद्र प्रताप सिंह का कोई उल्लेख नहीं किया गया है.
अब, उत्तर प्रदेश की सरकार ने राजा महेंद्र प्रताप सिंह को याद किया है. अलीगढ़ जनपद में राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर राजकीय विश्वविद्यालय बनेगा. हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अलीगढ़ जनपद के एक कार्यक्रम यह घोषणा की. योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि "राजा महेंद्र प्रताप ने अपनी पूरी सम्पत्ति दान कर दी मगर उनके साथ न्याय नहीं हुआ. उन्हें भुला दिया गया. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के साथ भी भेदभाव किया जाता है. उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाता है. नौकरियों में भी लाभ नहीं दिया जा रहा है. संविधान के अनुसार इन सभी को आरक्षण मिलना चाहिए.”
राजा महेंद्र प्रताप ने बनाई थी अफगानिस्तान में आजाद हिन्दुस्तान की पहली सरकार
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के सम्बन्ध में यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि इस यूनिवर्सिटी के नाम में ही मुस्लिम शब्द जुड़ा हुआ था. स्थापना के पहले से ही साफ़ जाहिर था कि इस यूनिवर्सिटी में मुसलमानों का वर्चस्व अधिक रहने वाला है मगर फिर भी भाई – चारा की भावना में विश्वास रखने वाला राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने अपनी पूरी सम्पत्ति अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी को दान में दे दी थी. कम्युनिस्ट विचारधारा के इतिहासकार इरफ़ान हबीब का भी कथन है कि “राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने ब्रिटिश सरकार का विरोध किया था. वर्ष 1914 के प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान वह अफगानिस्तान​ गए थे. 1915 में उन्होंने आज़ाद हिन्दुस्तान की पहली निर्वासित सरकार बनवाई थी.” बाद में सुभाष चंद्र बोस ने 28 साल बाद उन्हीं की तरह आजाद हिंद सरकार का गठन सिंगापुर में किया था।
 एएमयू ने राजा महेंद्र प्रताप को भुलाया जबकि बीएचयू ने काशी नरेश के योगदान को हर अवसर पर याद किया
 अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी, दोनों की स्थापना में हिन्दू राजाओं ने भूमि दान की थी मगर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्थापक सर सैय्यद अहमद खान ने भूमि दान देने वाले राजा महेंद्र प्रताप सिंह को भुला दिया जबकि पंडित मदन मोहन मालवीय ने काशी नरेश के योगदान की भूरि -भूरि प्रशंसा की. पूरे वाराणसी के लोग काशी नरेश के योगदान को बड़े ही गर्व से याद करते हैं. बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी की स्थापना के समय की एक दन्त कथा काफी मशहूर है. कहा जाता है कि पंडित मदन मोहन मालवीय काशी के डोम राजा से मिले और यूनिवर्सिटी की स्थापना हेतु दान देने के लिए कहा. तब डोम राजा ने कहा कि “काशी नरेश जितना दान देंगे उससे ज्यादा दान मैं दूंगा.” मालवीय जी इसके बाद काशी नरेश से मिलने गए और उन्होंने यह बताया कि डोम राजा ने ज्यादा दान देने का वायदा किया है. काशी नरेश ने मालवीय जी से कहा कि "आप मुझसे जितना चाहिए जमीन ले लीजिए." मालवीय जी इसके लिए सहर्ष तैयार हो गए और उन्होंने जमीन ले ली . बाद में डोम राजा को उन्होंने बताया कि काशी नरेश ने जमीन दान में दी है तब डोम राजा ने कहा कि “जमीन के मामले में मैं उनका मुकाबला नहीं कर सकता. मैं स्वयं उनकी जमीन पर रहता हूं.”
काशी नरेश ने भूमि दान दी जो उद्देश्य उनके मन में था उसी के अनुरूप बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी बनी. मगर अलीगढ़ जनपद में राजा महेन्द्र प्रताप के उद्देश्यों के अनुरूप यूनिवर्सिटी नहीं बन पाई. राजा महेंद्र प्रताप की दान दी गई जमीन पर अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी की स्थापना तो हुई मगर वह मुस्लिम तुष्टीकरण की भेंट चढ़ गई.