अर्थजगत: मंद रफ्तार से उबरता उद्योग
   दिनांक 02-सितंबर-2019
प्रो. भगवती प्रकाश 
 
 
                मंदी से थमी रफ्तार: वैश्विक आर्थिक मंदी का असर भारत के वाहन निर्माण उद्योग पर भी पड़ा 
पिछले दिनों वित्त मंत्री ने देश को आर्थिक मंदी से उबारने के लिए कई उपायों की घोषणा की। इनसे एक ओर रुपये की गिरावट थमेगी तो शेयर बाजारों में भी कारोबार सुधरेगा। जीडीपी में वृद्धि और आर्थिक स्थायित्व आएगा। उल्लेखनीय है कि 2014 से 2019 के बीच भारत विश्व की चार बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ चुका है
 
वर्तमान वैश्विक आर्थिक मन्दी के दौर से अर्थव्यवस्था को उबारने एवं सही दिशा एवं वांछित गति देने के लिये केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के 23 अगस्त को घोषित 32 सूत्री उपायों से अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में उत्साह का संचार है। सरकार ने निजी निवेश और सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमों के लिये अतिरिक्त संसाधन सुलभ कराने के साथ ही अर्थव्यवस्था के अन्य सभी क्षेत्रों में गतिरोध दूर करने की पहल की है। मंदी के चलते स्वचालित वाहन उद्योग, टेक्सटाइल, स्टील, शेयर बाजार, खाद्य क्षेत्र आदि कई उद्योगों पर बुरा प्रभाव पड़ा है। इसीलिए सरकार ने 5 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज के साथ उद्योग जगत की चिंताओं को दूर कर बाजार को सकारात्मक संदेश देने के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं।
 
वर्तमान मंदी व प्रमुख आर्थिक समस्याओं के बाहरी व आन्तरिक दोनों प्रकार के कारण हैं। इनमें प्रमुख हैं-
 
बाहरी कारण: अंतरराष्टÑीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से बढ़े आयात बिल के कारण रुपये की कीमत में
भी गिरावट आई है और महंगाई पर असर पड़ा है। अमेरिकी डॉलर की तुलना में रुपये की दर 72 पर चली गई है। आयात के मुकाबले निर्यात में अपेक्षाकृत अधिक गिरावट से भी देश के व्यापार घाटे में वृद्धि हुई है। साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा शेयर बाजार से धन बाहर ले जाने से भी विदेशी मुद्रा भंडार में कमी के कारण रुपये की दर में गिरावट आई है। अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध से उपजी आर्थिक मंदी का भारत पर असर पड़ा है।
 
आन्तरिक कारण: घटती मांग के कारण कई उद्योगों के उत्पादन में आई गिरावट के इस दौर में आॅटो उद्योग में लगातर नौ महीने से बिक्री में गिरावट देखी गई है। कृषि के बाद सबसे ज्यादा 10 करोड़ लोगों को रोजगार देने वाले कपड़ा उद्योग में भी 34.6 फीसदी की गिरावट है। रियल एस्टेट क्षेत्र में मार्च 2019 तक 30 बडेÞ शहरों में 12,80,000 तैयार मकानों के खरीदार नहीं थे। रिजर्व बैंक के अनुसार मंदी से बैंकों के ऋणों में गिरावट आई है और पेट्रोलियम, खनन, टेक्सटाइल, उर्वरक एवं टेलिकॉम आदि क्षेत्रों ने कर्ज लेना कम कर दिया है। निवेश और औद्योगिक उत्पादन के घटने से भारतीय शेयर बाजार में भी मंदी का असर दिख रहा है। सेंसेक्स 40,000 का आंकड़ा छूकर फिर 37,000 पर आ गया था। केंद्रीय सांख्यिकी संगठन के अनुसार 2018-19 में देश की जी़डी़पी विकास दर भी 6़ 8 प्रतिशत ही रही है जो 5 वर्ष में न्यूनतम है।
 
ऐसे आएगी अर्थव्यवस्था में गति
वित्त मंत्री ने मंदी पर प्रभावी विराम लगाकर निवेश बढ़ाने, आॅटो सेक्टर को राहत देने, बैंकिंग तंत्र में तरलता बढ़ाने और एमएसएमई कंपनियों के लिये संसाधनों की वृद्धि के कई उपाय घोषित किये हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू इक्विटी पर नये बजट में बढ़ाए ‘सुपर-रिच’ सरचार्ज को वापस ले लिया गया है। इससे विदेशी संस्थागत निवेशकों की निकासी थमी है। आॅटो सेक्टर में मांग बढ़ाने के लिए सरकारी विभाग भी नए वाहन खरीदेंगे और एमएसएमई के लंबित सभी जी़ एस़ टी़ रिफंड एक महीने के भीतर जारी कर दिए जाने की बात कही गई है। इसके साथ ही एनबीएफसी तथा बैंकों को अतिरिक्त तरलता अर्थात् लिक्विडिटी उपलब्ध कराने और डीपीआईआईटी में पंजीकृत स्टार्ट-अप के लिए एंजल टैक्स का प्रावधान खत्म करने का फैसला किया गया है। रियल एस्टेट को मंदी से उबारने के लिए उपायों की घोषणा अगले कुछ दिन में करने का आश्वासन दिया गया है। इन घोषणाओं के पूर्व ही शेयर बाजार में सुधार से सेंसेक्स भी 228 बिंदु की बढ़त पर बंद हुआ।
 
वित्त मंत्री ने पूंजी बाजार में निवेश को बढ़ावा देने के लिए शेयर और यूनिट के स्थानांतरण से होने वाले दीर्घकालिक व अल्पकालिक कैपिटल गेन पर बढ़े हुए सरचार्ज को हटाने का निर्णय लिया है। वित्त मंत्री ने उद्योगों की समस्याओं को समझने के लिए देश के कई शहरों में प्रवास कर इन उपायों की घोषणा की है।
 
विकास के लिए संसाधन जुटाने के लक्ष्य से नवीन बजट में जब 40 प्रतिशत सरचार्ज लगाया गया तो विदेशी संस्थागत निवेशक भी इस बढ़े हुऐ सरचार्ज के दायरे में आ गये। इससे उन्होंने भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया था। अर्थव्यवस्था पर इसके विपरीत असर को देख वित्त मंत्री ने एफ़पी़आई़ पर अब बढ़ा हुआ सरचार्ज वापस लेकर बजट पूर्व स्थिति बहाल कर दी है। 26 अगस्त को ही सेंसेक्स बढ़कर 37494 के स्तर पर पहुंच गया।
 
सरकार के इस फैसले से घरेलू निवेशक भी प्रसन्न हैं। संस्थागत निवेशकों ने माना है कि सरचार्ज वापस लेना विदेशी निवेशकों के लिए बड़ी राहत है। बढ़े सरचार्ज के कारण भारतीय पूंजी बाजार से जुलाई महीने में भारी मात्रा में विदेशी निवेश के बाहर जाने से रुपये में गिरावट के साथ ही सेंसेक्स में भी 3,000 अंकों की गिरावट आई थी। इसके पहले यह अब तक के सर्वोच्च 40,000 के स्तर पर पहुंच गया था। इसके साथ ही कॉरर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी अर्थात् सी.एस.आर. की राशि खर्च न करने पर उसे अपराध की श्रेणी में मानने के निर्णय को भी सरकार ने वापस ले लिया है, अब यह लोक मामलों के तहत ही आएगा।
 
अर्थव्यवस्था को पुन: गति प्रदान करने, कारोबार को आसान करने और उद्योगों को राहत देने के लिए कैपिटल गेन टैक्स से बढ़ाया गया सरचार्ज हटाने के अतिरिक्त ई.एम.आई. कम करने, जी.एस.टी़ रिफंड 30 दिन में करने जैसी कई अन्य राहतें उद्योग जगत को दी गई हैं। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि वास्तव में तो वैश्विक मांग में आई कमी के कारण भारत में भी आर्थिक मंदी उपजी है अन्यथा भारत मंदीग्रस्त नहीं है। चीन, अमेरिका और यूरोपीय देशों की तुलना में भारत की अर्थव्यवस्था अत्यन्त बेहतर प्रदर्शन कर रही है। घरेलू उद्योगों को भी राहत देने के कई उपाय किये गए हैं-
 
एमएसएमई को राहत
एमएसएमई कानून में संशोधन के प्रस्ताव, जी़ एस़ टी. रिफंड मामलों का 60 दिन के अंदर समाधान करने की घोषणा के साथ ही अटके हुए जी.एस.टी. रिफंड 30 दिन में कर दिये जाएंगे। भविष्य में भी जी.एस.टी. रिफंड का समाधान 60 दिन में कर देने की घोषणा की गई है।
 
राहत पैकेज व मांग वृद्धि के उपाय: सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 70 हजार करोड़ रुपये की पंूजी डालेगी। इससे बैंक बाजार में पांच लाख करोड़ रुपये तक की नकदी जारी करने में सक्षम हो सकेंगे। घर व वाहन खरीदने पर और ज्यादा कर्ज सहायता दी जाएगी। करदाताओं को भी राहत: करदाताओं को परेशानियों से बचाने के लिए वित्त मंत्री ने कहा कि अब सभी कर नोटिस केन्द्रीयकृत व्यवस्था से जारी होंगे। सरकार ने आई.टी.आर. जांच को आसान बना दिया है।
 
कारोबार करना आसान
अब कर्ज चुकाने के बाद प्रतिभूति से जुड़े दस्तावेज संबंधित बैंकों को 15 दिन में देने होंगे। बीएस-4 वाहनों की समस्या हल करते हुए मंत्री महोदया ने कहा है कि 31 मार्च, 2020 तक खरीदे जाने वाले बीएस-4 वाहन अपने पंजीकरण काल तक बने रहेंगे। एकबारगी पंजीकरण शुल्क को जून 2020 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। उन्होंने घर बनाने की परियोजनाओं को पूंजी सुलभ करवाने हेतु, नये संस्थान की घोषणा का भी आश्वासन दिया गया है। विनिर्माण क्षेत्र के लिए 100 लाख करोड़ रु. का पैकेज दिया जाएगा। इस प्रकार इन सभी उपायों से एक ओर रुपये की गिरावट थमेगी, तो शेयर बाजारों में भी कारोबार सुधरेगा। इससे जी़डी़पी़ में वृद्धि और आर्थिक स्थायित्व आएगा। उल्लेखनीय है कि 2014 से 2019 के बीच भारत विश्व की 4 अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ चुका है। भारत ने सर्वप्रथम 2014 में रूस को पीछे छोड़कर 9वां स्थान प्राप्त किया, उसके बाद इटली को पछाड़ा। फिर ब्राजील और फ्रांस को पीछे छोड़ा। इस प्रकार 2014 में भारत जहां 10वें स्थान पर था, अब छठे स्थान पर है। (लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं)