विविध : प्रत्यक्ष कार्य करने वाले कार्यकर्ता थे आपटे जी
   दिनांक 02-सितंबर-2019
 
मंच पर उपस्थित (दाएं से चौथे) श्री दत्तात्रेय होसबाले, सी.विद्यासागर राव अन्य विशिष्टजन
‘‘स्व. बालासाहब आपटे जी का युवाशक्ति में गहरा विश्वास था। युवाओं का अनुभव कम है, उनकी आयु कम है, इस कारण उनका पीछे रहना आवश्यक नहीं। देश के युवा, विद्यार्थी परिवर्तन का माध्यम हैं। राष्ट्र निर्माण के कार्य में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रह सकती है। इसलिए विद्यार्थियों को स्वतंत्र नागरिक के रूप में देखना चाहिए।’’ उक्त विचार हैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले के। वे गत दिनों महाराष्ट्र शासन उच्च एवं तंत्र शिक्षा विभाग और मुंबई विश्वविद्यालय के तत्वावधान में ‘प्रो. बाल आपटे सेंटर फॉर स्टडीज इन स्टूडेंट्स एंड यूथ मूवमेंट’ केंद्र के भूमिपूजन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जाने-माने विधिज्ञ, विद्यार्थी आंदोलन के आधार, दिशा देने वाले शिक्षातज्ञ, अच्छे सांसद, सामाजिक कार्यकर्ता, विचारक और अपने शब्द को प्रमाण मानकर चलने वाले स्व. बालासाहेब आपटे जी बहुआयामी व्यक्तित्व के स्वामी थे। वे प्रत्यक्ष कार्य करने वाले कार्यकर्ता थे। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के माध्यम से, विद्यार्थी एवं युवा आंदोलन की जानकारी, युवा संगठन का तत्वज्ञान सर्वसामान्य लोगों तक ले जाने का काम किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने कहा कि हम परिवर्तन के दौर में हैं। भारत की 65 प्रतिशत जनसंख्या युवा है। 2020 में भारत की औसत आयु 29 वर्ष यानी अमेरिका और चीन से आठ वर्ष कम होगी। ऐसे में इस युवाशक्ति को योग्य दिशा में प्रवाहित करना आवश्यक है। समाज के विकास के लिए, मानव कल्याण के लिए, युवाओं को उत्तम शिक्षा देना और उन्हें रोजगारक्षम बनाना आवश्यक है। प्रो. बाल आपटे सेंटर फॉर स्टडीज के माध्यम से विद्यार्थियों से संबंधित विषय का अभ्यास होगा। इस शोध का उपयोग समाज के लिए नीतियां बनाने के लिए होगा। मुझे विश्वास है कि यहां से प्रशिक्षित होने वाला विद्यार्थी वर्ग नेतृत्व करेगा और देश को प्रगति के पथ पर आगे ले जाएगा।  विसंकें, मुंबई
 
‘‘अपनी पहचान को भूलना पतन है’’
 
पुस्तक का लोकार्पण करते (बाएं से) सर्वश्री प्रभात कुमार, प्रह्लाद सिंह,
डॉ. कृष्ण गोपाल, डॉ. सूर्यकांत बाली एवं अवनिजेश अवस्थी
‘‘धर्म, संस्कृति और परंपरा रूपी अपनी पहचान को भूल जाना पतन है। इसे दुबारा जागृत करना उत्थान है।’’ उक्त बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कही। वे 26 अगस्त को नई दिल्ली स्थित कॉस्टीट्यूशन क्लब में डॉ. सूर्यकांत बाली लिखित दो पुस्तकों ‘भारत की राजनीति का उत्तरायण’ और ‘भारत का दलित विमर्श’ के लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य और राष्ट्र दोनों अलग विषय हैं। राज्य, राष्ट्र (समाज व्यवस्था) को रक्षा और सुरक्षा प्रदान करता है। ऐसे में राजसत्ता के अभाव में व्यवस्था सिकुड़ती जाती है। कालांतर में देश में राजसत्ता बदलने के साथ व्यवस्था बिगड़ती चली गई, हिन्दू समाज सिकुड़ता चला गया। लेकिन आज फिर से स्थितियां बदली हैं। आज भारत में जम्मू-कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और पूरे भारत में जहां भी लोग रहते हैं, वह देश और धरती मां के पूजन का भाव रखते हैं। समाज में फिर से इस तरह के भक्ति भाव का जाग्रत होना देश का उत्तरायण है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री श्री प्रह्लाद सिंह ने कहा कि भारत की पहचान यहां का धर्म और अध्यात्म है, जिसे हमें आने वाली पीढ़ी को सौंपना है। इसके लिए लिए हमें अपने धर्म और संस्कृति के लिए खड़ा होना होगा। पुस्तक के लेखक डॉ. सूर्यकांत बाली ने कहा कि इस्लामी आक्रमण के कालखंड से लेकर 1925 तक देश पतन की ओर जाता रहा, लेकिन 1925 में राष्टÑीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई और देश फिर से उन्नयन की ओर बढ़ चला।