टूटा चिदंबरम का भरम
   दिनांक 02-सितंबर-2019
एम. कुमार
 
पी. चिदंबरम 
 
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पी. चिदंबरम भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई के शिकंजे में आ ही गए। जिस तरह के साक्ष्य मिल रहे हैं, उनके आधार पर उनके इस चंगुल से जल्दी मुक्त होने के आसान नहीं हैं
पलानिअप्पन चिदंबरम के लिए मुसीबत का दौर शुरू हुआ उनके 74वें जन्मदिन (16 सितंबर) से ठीक 26 दिन पहले जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने 20 अगस्त को उनकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी और सर्वोच्च न्यायालय से भी उन्हें तत्काल कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद 21 अगस्त को भ्रष्टाचार से जुड़े आईएनएक्स मीडिया मामले में उनकी गिरफ्तारी की घड़ी आ गई और सीबीआई ने उन्हें घर में घुसकर अपने शिकंजे में ले लिया। तब से 28 अगस्त तक चिदंबरम की जिंदगी सीबीआई मुख्यालय और दिल्ली के राउज एवेन्यू अदालत परिसर के बीच सवाल-जवाबों तक सीमित हो गई है। अपने कानूनी ज्ञान की हनक के दम पर अदालत में दबदबा रखने वाले चिदंबरम अब आरोपी की हैसियत से अदालत के कठघरे में खड़े किए गए हैं। सीबीआई हिरासत से निकलने की उम्मीद में न्यायाधीश की तरफ देखने वाले चिदंबरम जब दोबारा सीबीआई हिरासत में भेजे गए तो उनके वकील भी थोड़ा निराश दिखे।
 
28 अगस्त को चिदंबरम के वकील सर्वोच्च न्यायालय में दलीलों पर दलीलें दिए जा रहे थे लेकिन अग्रिम जमानत पर बहस ही चलती रही। भ्रष्टाचार के मामले में फंसे चिदंबरम जिन दो विभागों (सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय) की जांच का सामना कर रहे हैं वे कभी इन दोनों के मुखिया थे। उच्च न्यायालय ने सिर्फ चिदंबरम की अग्रिम जमानत अर्जी ही खारिज नहीं की, बल्कि उन्हें मामले का ‘किंगपिन’ (सरगना) भी करार दिया था। यह टिप्पणी उन तथ्यों के आधार पर की गई जो जांच एजेंसी ने अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए थे।
 
आईएनएक्स मीडिया मामले में उन पर भ्रष्टाचार और ‘मनी लांड्रिंग’ के आरोप लगे हैं और सीबीआई और ईडी इनकी जांच कर रही है। चिदंबरम पर आरोप है कि वित्तमंत्री रहते 2007-08 में आईएनएक्स मीडिया नामक कंपनी में नियमों का उल्लंघन करके 305 करोड़ रुपए के विदेशी निवेश को मंजूरी दी और इसके बदले अपने बेटे कार्ति चिदंबरम को फायदा पहुंचाया। आईएनएक्स मीडिया की स्थापना इस वक्त एक अन्य मामले में सजा काट रही। इंद्राणी मुखर्जी और उनके पति पीटर मुखर्जी ने 2007 में की थी। कंपनी मीडिया कारोबार में थी और इसके टीवी चैनल भी थे। इंद्राणी मुखर्जी के सरकारी गवाह बनने से चिदंबरम और उनके बेटे की मुश्किलें बढ़ीं।
 
इंद्राणी ने सीबीआई को दिए बयान में कहा कि 2006 में तत्कालीन वित्तमंत्री पी. चिंदबरम से कंपनी में विदेशी निवेश प्राप्त करने के लिए मुलाकात की थी। बदले में उन्होंने अपने बेटे कार्ति को व्यवसाय में मदद करने की बात कही थी। सीबीआई ने फरवरी, 2018 में इंद्राणी का बयान अदालत में दर्ज कराया था। इंद्राणी ने बयान में कहा कि कार्ति ने 10 लाख डॉलर की रिश्वत मांगी थी। इसी मामले में कार्ति को गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई का कहना है कि मार्च, 2007 में आईएनएक्स मीडिया ने विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) से अवैध तरीके से विदेशी निवेश की मंजूरी हासिल की थी। इसी मामले में चिदंबरम सीबीआई के शिकंजे में हैं और राउज एवेन्यू न्यायालय ने उन्हें दूसरी बार एजेंसी की हिरासत में पूछताछ के लिए भेजा है। विदेशी मुद्रा में हुए गोलमाल की जांच सीबीआई की जद से बाहर हो जाती है और उसकी जांच आती है ईडी के हाथ में। ‘मनी लांड्रिंग’ के मामले में ईडी भी चिदंबरम को गिरफ्तार कर पूछताछ करना चाह रही है। सर्वोच्च न्यायालय में अभी बहस प्रवर्तन निदेशालय के ‘मनी लांड्रिंग’ के मामले में चल रही है। इसमें फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें गिरफ्तारी से संरक्षण दिया है, लेकिन तकनीकी तौर पर इसका कोई फायदा उन्हें नहीं है, क्योंकि चिदंबरम सीबीआई की हिरासत में हैं और जब तक वे हिरासत में हैं ईडी उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकता। 28 अगस्त को महा न्यायवादी तुषार मेहता ने सर्वोच्च न्यायालय में साफ कहा, ‘‘हम बहुत अक्लमंद लोगों के साथ ‘डील’ कर रहे हैं। मूर्ख आदमी ‘मनी लांड्रिंग’ नहीं कर सकता। इसमें परतें होती हैं- ये हत्या बलात्कार जैसा मामला नहीं है, जिसमें फोरेंसिक साक्ष्य की जरूरत होती है। इसके साक्ष्य डिजिटल होते हैं और इन्हें अदालत के सामने प्रस्तुत करते ही ये आम हो जाएंगे और इन्हें तत्काल मिटाए जाने की भी आशंका है। लिहाजा आरोपपत्र दाखिल होने से पहले इन्हें आरोपियों से साझा करना ठीक नहीं होगा।’’
 
इंद्राणी ने सीबीआई को दिए बयान में कहा कि 2006 में तत्कालीन वित्तमंत्री पी. चिंदबरम से कंपनी में विदेशी निवेश प्राप्तकरने के लिए मुलाकात की थी। बदले में उन्होंने अपने बेटे कार्ति को व्यवसाय में मदद करने की बात कही थी।सीबीआई ने फरवरी, 2018 में इंद्राणी का बयानअदालत में दर्ज कराया था
 
 
चिदंबरम की तरफ से पैरोकारी में जुटे उनके दोस्त और दिग्गज वकीलों ने दिन-रात एक कर दिया पर उनको राहत नहीं दिला पाए हैं। आज चिदंबरम के सितारे गर्दिश में हैं। कुछ करोड़ के लेनदेन के आरोपों में घिरे चिदंबरम की आलीशान जीवनशैली है। उनका बेटा और इस मामले का अभियुक्त कार्ति चिदंबरम सर्वोच्च न्यायालय में दो बार 10-10 करोड़ रुपए जमा कर टेनिस मैच देखने विदेश गया था। सबूतों से छेड़छाड़ के आरोपों को नकार रहे उनके वकीलों ने सर्वोच्च न्यायालय में दलील दी है कि 11 साल पुराने मामले में वे अब क्या छेड़छाड़ करेंगे? 2014 तक वे खुद सत्ता में रहे हैं। यह भी कहा कि सीबीआई ने कार्रवाई पहले क्यों नहीं की? लेकिन सवाल उठता है कि 2014 तक जब चिदंबरम सत्ता में थे तब सीबीआई और ईडी जैसे महकमे उनकी सरकार के मातहत थे, लिहाजा उन पर कार्रवाई कैसे करते। यह भी दलील दी गई की एफआईपीबी मंजूरी के पहले छह सचिवों के समूह ने देखा। इसके बाद उनके पास फाइल लाई गई थी। वित्त मंत्री की हैसियत से उन्होंने सिर्फ हस्ताक्षर किए थे। सचिवों पर कोई आरोप नहीं लगाया गया। बचाव में दी गई इस कानूनी दलील को तैयार करते हुए शायद उनके पैरोकारों ने यह ध्यान नहीं दिया कि किसी एक को अभियुक्त न बनाने से दूसरे का जुर्म कम नहीं होता। दूसरी बात, कानून उनसे अपेक्षा करता है कि एक जिम्मेदार पद पर रहते हुए हस्ताक्षर करने से पहले उन्होंने फाइल जरूर पढ़ी होगी।
 
अदालत से इतर चिदंबरम की गिरफ्तारी में एक सियासी लड़ाई भी चल रही है। कांग्रेस लगातार कह रही है कि ‘उनकी गिरफ्तारी राजनीतिक बदले की भावना से की गई है।’ वहीं केंद्र की भाजपा सरकार भ्रष्टाचार को लेकर अपनी सख्त नीति पर अटल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साफ कह चुके हैं कि पिछली सरकार में हम भ्रष्टाचारियों को जेल के दरवाजे तक ले आए थे। आगे का काम अब होगा। जाहिर है जो लोग यह मानकर बैठ गए थे कि भ्रष्टाचार चुनाव में कोई मुद्दा नहीं होता, उनकी आंखें अब खुलेंगी कि यह मुद्दा भी है और इस पर समझौते की गुंजाइशनहीं दिखती।पहले से था गिरफ्तारी का अंदाजा चिदंबरम को अपनी गिरफ्तारी का एहसास काफी पहले हो गया था। जब कार्ति की गिरफ्तारी हुई थी तभी पी. चिदंबरम ने अपनी अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल कर दी थी। करीब 15 महीने उन्हें गिरफ्तारी के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय से संरक्षण मिला हुआ था। इस दौरान वे अंतराल पर अग्रिम जमानत अर्जियां दाखिल करते रहे, लेकिन चिदंबरम कानून के शिकंजे से बच नहीं सके।
 
विदेशों में संपत्ति और खाते
प्रवर्तन निदेशालय ने सर्वोच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए 26 अगस्त को कहा कि फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू) ने अभियुक्त पी. चिदंबरम और सह साजिशकर्ताओं के बारे में विशेष सूचना दी है कि इनके खाते और बहुमूल्य संपत्तियां अर्जेंटीना, आस्ट्रिया, ब्रिटिश वर्जीनिया आइलैंड, फ्रांस, ग्रीस, मलेशिया, मोनाको, फिलीपींस, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, स्पेन और श्रीलंका में हैं। पता चला है कि मुखौटा कंपनियों के जरिए निवेश से जुड़े लेन-देन साजिशकर्ताओं ने किए हैं। जांच एजेंसी ने पाया किविदेशी बैंकों में 17 खाते हैं जिनका सीधा संबंध अभियुक्तों से दिखाई पड़ता है और इन खातों के जरिए ही ‘मनी लांड्रिंग’ की गई। साथ ही इसका निवेश विभिन्न संपत्तियों में किया गया। 10 बहुमूल्य संपत्तियां विदेशों में अब तक चिन्हित की गई हैं। आगे जांच चल रही है जिसके लिए चिदंबरम को हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी है।