श्रद्धांजलि: अरुण जेटली स्पष्ट विचार, मृदु व्यवहार
   दिनांक 02-सितंबर-2019
 
सुनील आंबेकर 

अरुण जेटली बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। खरा और सधा हुआ बोलते थे। तर्क के साथ पूरी दृढ़ता से बात रखते थे। संगठन हो या सरकार , मुद्दों को स्पष्टता देते थे। उनका असमय निधन एक बड़ी क्षति है
देश के प्रबुद्ध व संवेदनशील राजनेता अरुण जेटली का हम सब के बीच से यूं असमय चले जाना अत्यंत दुखद है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने अपने एक ऐसे पूर्व कार्यकर्ता को खोया है, जिसने एक राजनीतिक दल के नेता ही नहीं अपितु उससे परे भी जीवन के नाते विविध क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की। जेटली छात्र जीवन से ही मेधावी थे। कई ऐसे विद्यार्थी जो पढ़ाई में अव्वल रहते हैं, वे सोचते हैं कि शायद राजनीति उनके जीवन का हिस्सा नहीं बन सकती। विद्यार्थी परिषद के एक ऐसे प्रतिभावान कार्यकर्ता रहे जेटली उन सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। वे विश्वविद्यालय में अव्वल दर्जे के विद्यार्थी रहे, साथ ही सक्रिय कार्यकर्ता के नाते उन्होंने विद्यार्थी परिषद में पूरे मन से काम किया। विद्यार्थी परिषद उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी। अपने जीवन में वह चाहे कितने ही महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचे, लेकिन उन्होंने परिषद से अपने संबंध का हमेशा गर्व के साथ उल्लेख किया। यह निश्चित रूप से विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के लिए बहुत गर्व की बात है। हाल ही में इंडिया टीवी चैनल के प्रमुख रजत शर्मा ने अपने स्वयं के विद्यार्थी जीवन के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार तमाम परेशानियों से जुझकर वह विश्वविद्यालय की फीस जुटाकर जमा करने पहुंचे। वहां कुछ पैसे कम पड़ गए। तभी पीछे से एक छात्र ने आकर उनके कंधे पर हाथ रखा और फीस में कम पड़े पैसे जमा कर दिए। वह अरुण जेटली थे। यह उनका विशिष्ट गुण था कि वे अनजान विद्यार्थी की सहायता के लिए भी आगे आते थे।
 
एक बार गुजरात के राजकोट जिले के मोरबी में कॉलेज छात्रों की फीस बढ़ी और उसके खिलाफ सहज आंदोलन प्रारंभ हुआ और देखते ही देखते वह आंदोलन पूरे प्रदेश का व्यापक जनआंदोलन बना, जिसके परिणामस्वरूप तत्कालीन मुख्यमंत्री चिमन भाई पटेल को इस्तीफा देना पड़ा। यह वह समय था जब देशभर में छात्र अपनी आवाज उठा रहे थे, सरकार की निष्क्रियता, महंगाई, भ्रष्टाचार आदि के लेकर समाज आक्रोश में था। यह वह समय था जिसमें विद्यार्थी परिषद ने कहा कि ‘‘आज का विद्यार्थी-आज का नागरिक है। देश के जागरूक नागरिक के नाते हर विद्यार्थी को अपनी भूमिका निभानी चाहिए। जेटली उस समय दिल्ली की छात्र राजनीति में सक्रिय थे एवं दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रसंघ के अध्यक्ष चुनकर आए थे। आपातकाल के खिलाफ विद्यार्थियों का आंदोलन इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों में अंकित है। विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने भी आपातकाल के खिलाफ आवाज उठाई थी।
 
विद्यार्थी परिषद के स्वर्ण जयंती अधिवेशन में दिवंगत में जार्ज फर्नांडीस ने आपातकाल को याद करते हुए कहा था कि जिस आंदोलन को हम जेपी आंदोलन कहते हैं, वास्तव में वह विद्यार्थियों का आंदोलन था। विद्यार्थियों ने स्व. जयप्रकाश नारायण से आग्रह किया था कि इस आंदोलन का नेतृत्व आप कीजिए। और उसके बाद वह आंदोलन खड़ा हुआ। वास्तव में यह व्यापक जनआंदोलन के रूप में स्थापित हुआ था। उस समय दिल्ली में उस आंदोलन के प्रमुख केन्द्र के रूप में थे अरुण जेटली। विद्यार्थी परिषद के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के नेताओं ने जयप्रकाश नारायण को इस आंदोलन के मुखिया के रूप में स्थापित किया, जिसके कारण उसे जेपी आंदोलन कहा गया। कार्यकर्ता के रुप में अरुण जेटली का विद्यार्थी परिषद के साथ 1971 से 1980 तक सक्रिय जुड़ाव रहा। इसके बाद वह राजनीति में आए और अधिवक्ता के तौर पर भी अपनी अलग पहचान बनाई। जेटली के जीवन के बारे में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह राजनीति में अपना भविष्य बनाने के लिए नहीं गए थे, बल्कि देश के प्रतिष्ठित अधिवक्ता होने के बाद अपनी अच्छी खासी प्रैक्टिस छोड़कर राजनीति में गए थे। एक नेता की सबसे बड़ी विरासत होती है नई पीढ़ी को खड़ा करना। कार्यकर्ता के रूप में वह न केवल आन्दोलन और चर्चाओं में भाग लेते रहे, अपितु एक कुशल संपादक के रूप में छात्र-शक्ति पत्रिका के माध्यम से उन्होंने छात्रों के मुद्दों और उनके हितों को एक सशक्त आवाज दी, अनेकों लोग उनकी प्रेरणा से विद्यार्थी परिषद से जुड़े, आज वह हमारे बीच में नहीं हैं। उनका असमय चले जाना देश के लिए अपूरणीय क्षति है।
 
ऐसे लोगों की सामाजिक जीवन में उपस्थिति, उनके अनुभव समाज को मिलना, अपने आप में विशेष है। विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं को ही नहीं, संपूर्ण देश को उन पर गर्व है। ‘कैरियर फॉर द नेशन’ यानी अपना भविष्य देश के समर्पित करो, इसका जेटली जी से अच्छा उदाहरण नहीं हो सकता उन्हें भावभीनी श्रद्घांजलि व भावपूर्ण नमन।
(लेखक अभाविप के राष्ट्रीय संगठन मंत्री हैं)
एक प्रतिभाशाली एवं अध्ययनशील नेता
 
रा.स्व.संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत और सरकार्यवाह श्री भैयाजी जोशी ने एक संयुक्त वक्तव्य जारी कर स्व. अरुण जेटली को श्रद्धासुमन अर्पित किए। संघ की ओर से प्रेषित इस वक्तव्य में उन्होंने कहा-
प्रतिभाशाली, अध्ययनशील नेता श्री अरुण जेटली जी अपनी जीवन यात्रा पूर्ण कर आज प्रभु चरणों में लीन हो गए। युवा आयु से ही उनका सामाजिक, राजनीतिक जीवन प्रारंभ हुआ था। आज देश कई क्षेत्रों में विकास पथ पर चल रहा है, ऐसी घड़ी में उनका योगदान आवश्यक भी था और महत्वपूर्ण भी सभी परिवार जन एवं निकटवर्ती आज हृदय में वेदना अनुभव करते हैं। हम सभी उनकी आत्मा की शांति और सदगति के लिए ईश्वर के चरणों में प्रार्थना करते हैं। ॐ शांति:शांति:शांति:
 
 
 
 
श्री अरुण जेटली के निधन से बहुत दुखी हूं। उन्होंने साहस और गरिमा के साथ लंबी बीमारी से जंग लड़ी। एक प्रतिभाशाली अधिवक्ता, अनुभवी सांसद और प्रतिष्ठित मंत्री के रूप में उन्होंने राष्ट्र के निर्माण में बड़ा योगदान दिया।
— रामनाथ कोविंद ,राष्ट्रपति
 
अरुण जेटली के निधन से मैंने मूल्यवान मित्र को खो दिया है। उनके जैसी दूरदृष्टि और समझ बहुत कम लोगों में होती है। उन्होंने शानदार जीवन जिया और हम सभी के पास अनगिनत सुखद यादें छोड़ गए हैं। हम सभी को उनकी कमी बहुत महसूस होगी।
—नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
अरुण जेटली जी ने कई क्षमताओं में देश की सेवा की और वे सरकार और पार्टी के लिए एक संपदा की तरह थे। जेटली जी को हमेशा अर्थव्यवस्था को संकट से निकालने और पटरी पर लाने के लिए याद किया जाएगा। भाजपा को अरुण जी की कमी खलेगी। मैं उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। — राजनाथ सिंह, रक्षामंत्री
 
अरुण जेटली जी के निधन से अत्यंत दु:खी हूं, जेटली जी का जाना मेरे लिये एक व्यक्तिगत क्षति है। उनके रूप में मैंने न सिर्फ संगठन का एक वरिष्ठ नेता खोया है बल्कि परिवार का एक ऐसा अभिन्न सदस्य भी खोया है जिनका साथ और मार्गदर्शन मुझे वर्षो तक प्राप्त होता रहा। —अमित शाह, गृह मंत्री
 
श्री अरुण जेटली के जाने से हुई क्षति को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। एक बड़े दिल वाले उम्दा इंसान। हर वक्त किसी की भी मदद के लिए तैयार। उनकी बुद्धिमत्ता, दूरदर्शिता, निपुणता का कोई मुकाबला नहीं कर
सकता। —निर्मला सीतारमण, वित्त मंत्री
 सकता। —निर्मला सीतारमण, वित्त मंत्री