'Howdy, Modi' event: दुनिया ने देखा भारत का बढ़ता कद
   दिनांक 23-सितंबर-2019

 
ह्यूस्टन में हुई ‘हाउडी मोदी रैली’ ने तीन तरह के काम किए हैं। उदीयमान भारत की तस्वीर दुनिया के सामने खींची है। दूसरे, कश्मीर के संदर्भ में हाल में किए गए फैसलों पर भारत का पक्ष दुनिया के सामने रखा है और तीसरे इस सिलसिले में पाकिस्तान के दुष्प्रचार का सकारात्मक तरीके से जवाब दिया है। नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर उसका पर्दाफाश कर दिया। उन्होंने कहा, ‘दुनिया जानती है कि 9/11 और मुंबई में 26/11 को हुए हमलों में आतंकी कहां से आए थे।’रैली में अमेरिकी राष्ट्रपति और अमेरिका के सांसदों की उपस्थिति से भारत-अमेरिका रिश्तों की मजबूती भी साबित हुई है।
ह्यूस्टन से भारत के एक नए अभियान की शुरुआत होती नजर आ रही है। इसमें दुनियाभर में फैले करीब तीन करोड़ भारतवंशियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अमेरिका के अलावा यूरोप, दक्षिण पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका के तमाम देशों में भारतवंशी व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े हैं। भारत की नकल में पाकिस्तान ने भी अपने लोगों (डायस्पोरा) का इस्तेमाल अपनी विदेश नीति के पक्ष में करना शुरू किया है, पर उसमें नकारात्मकता और नफरत है। हाल में लंदन स्थिति भारतीय उच्चायोग पर दो बार हमले इस बात की गवाही देते हैं। सच यह है कि विदेश में रह रहे पाकिस्तानी समुदाय को भी भारत के साथ रिश्ते बनाने में लाभ है।
सबसे बड़ी स्वागत रैली
‘वॉल स्ट्रीट जरनल’ के अनुसार मोदी की यह रैली अमेरिका में पोप की यात्रा के बाद किसी विदेशी अतिथि के स्वागत में हुई सबसे बड़ी रैली है। मोदी की इसबार की अमेरिका यात्रा के अनेक संदर्भ हैं। कश्मीर और पाकिस्तान के अलावा देश की अर्थव्यवस्था को तेज पटरी पर ले जाने के प्रयास भी इससे जुड़े हैं। वित्तमंत्री ने हाल में कॉरपोरेट टैक्स में कमी करके इसकी शुरूआत कर दी है। हाल में दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्तों में कड़वाहट भी आई है, जिन्हें सुधारना भी है।अमेरिका के 44 सांसदों ने ट्रंप प्रशासन से अनुरोध किया है कि जनरलाइज्ड सिस्टम प्रिफरेंस (जीएसपी) के तहत भारत का दर्जा बहाल किया जाए। ट्रंप प्रशासन ने जून में भारत का दर्जा खत्म कर दिया था।इस यात्रा में इस प्रकार की अड़चनों को दूर करने के प्रयास होंगे।
मोदी की अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों से होने वाली मुलाकात में ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश का रास्ता खुलेगा। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत अमेरिकी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए राजी करने की योजना पर काम चल रहा है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कारोबार और सामरिक रिश्तों को लेकर कुछ महत्वपूर्ण समझौते होंगे,साथ ही दूसरे कई देशों के नेताओं के साथ भी मुलाकातें होंगी। इस यात्रा के दौरान भारत और पाकिस्तान के राजनय का अंतर भी दुनिया के सामने आएगा। जहां पाकिस्तान का एजेंडा पूरी तरह नकारात्मक है, वहीं भारतीय एजेंडा सकारात्मक है।
पाकिस्तान को चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने पाकिस्तान को पहले ही चेतावनी दे दी है कि उसकी जहरीली भाषा काम नहीं करेगी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अपने देश में यह कहकर अमेरिका यात्रा के लिए निकले थे कि ‘मेरा एजेंडा कश्मीर’ है। भारत का एजेंडा केवल कश्मीर नहीं है। देखना होगा कि आगामी 27 सितंबर को संरा महासभा के 74 वें अधिवेशन में वे ऐसा क्या नया कहते हैं, जो उनके पूर्ववर्ती नेताओं ने महासभा में आकर नहीं कहा है।
पाकिस्तान के राजनेताओं ने अपने देश में ‘कश्मीर बनेगा पाकिस्तान’ के नारे का इतना ज्यादा प्रचार कर दिया है कि उन्हें अब समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें। पाकिस्तान सरकार ने मोदी की ह्यूस्टन रैली में व्यवधान डालने की व्यवस्था भी की थी। इसके लिए तमाम शहरों से मुफ्त बस यात्रा का इंतजाम किया गया था, खाने-पीने की व्यवस्था भी। पर इस इंतजाम का कोई असर नजर नहीं आया।
पाकिस्तानी मीडिया ने 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम की तस्वीरें दिखाने के बजाय जो तस्वीरें पेश की हैं, उनमें 4-6 से लेकर 15-20 लोग झंडे लेकर खड़े नजर आते हैं, जो मोदी का विरोध कर रहे हैं। दूसरी तरफ पाकिस्तानी मूल के सिंधी, बलोच और पख्तून समूह के प्रतिनिधि भी काफी बड़ी संख्या में इस कार्यक्रम में शामिल हुए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ये लोग पाकिस्तान से आजादी के लिए नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ध्यान आकर्षित कराना चाहते हैं। ये लोग एक दिन पहले शनिवार को ह्यूस्टन पहुंच गए थे।

 
पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शन
पाकिस्तान के विरोध में अमेरिका में अपनी तरह का यह पहला प्रदर्शन था। अमेरिका में बलोच नेशनल मूवमेंट के प्रतिनिधि नबी बख्श बलोच ने कहा, हम पाकिस्तान से आजादी की मांग कर रहे हैं। भारत और अमेरिका को हमारी मदद करनी चाहिए है ठीक वैसे ही जैसे 1971 में भारत ने बांग्लादेश के लोगों की मदद की थी। जिए सिंध मुत्तहिदा महाज़ के सहितो ने कहा, हम सिंध के लोग पाकिस्तान से आजादी चाहते हैं। पाकिस्तान में इन दिनों पश्तून भी मानवाधिकारों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके प्रतिनिधि भी रैली में थे।
नरेंद्र मोदी ह्यूस्टन में कश्मीरी पंडितों से लेकर दाऊदी बोहरा संप्रदाय तक तमाम भारतीय मूल के लोगों से मिले। इन सबकी जड़ें भारत के साथ जुड़ी हैं और वे भारत से बाहर भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं और देश के बहुल समाज की तस्वीर भी दुनिया के सामने पेश करते हैं। एक पत्रकार ने अमेरिका की एक फार्मास्युटिकल कंपनी की सीईओ तृषा गुदुरु को कश्मीर के संदर्भ में उधृत किया है, ‘बरसों से जो चला आ रहा था, उसे रोकने के लिए किसी को कोई न कोई फैसला करना था। हमें उनके फैसले का सम्मान करना चाहिए। उनके खिलाफ बहुत ज्यादा नफरत फैलाई जा रही है…पर वे यह सब इसलिए कर रहे हैं, ताकि लोग और सहन न करें।’
अमेरिका में मोदी-विरोधी भी हैं। पाकिस्तानियों के अलावा इस रैली में कुछ ऐसे भारतीय भी जमा हुए थे, जिन्होंने कश्मीरियों, अल्पसंख्यकों और दलितों को लेकर राजनीतिक सवाल भी उठाए। कुछ खालिस्तानी समूह भी वहां देखे गए। पर शायद ये लोग केवल अपना दृष्टिकोण दर्ज कराने ही आए थे। उनकी संख्या बहुत कम थी और उनकी आवाज में दम भी नहीं था।