विविध ‘‘शिक्षा में गुणात्मकता के लिए प्रयोग आवश्यक’’
   दिनांक 23-सितंबर-2019
 
 
कार्यक्रम को संबोधित करते श्री दत्तात्रेय होसबाले।
 
 
‘‘नित्य नूतन चिर पुरातन, यह भारत की परंपरा है। शिक्षा क्षेत्र में गुणात्मकता की दृष्टि से नए प्रयोगों को स्वीकार करने की मानसिकता बननी चाहिए। विद्या भारती के शैक्षिक विषयों एवं प्रयोगों को समाज सहज रूप से स्वीकार करे, ऐसा भगीरथ प्रयास करना होगा और विद्या भारती शिक्षा क्षेत्र में राष्ट्रीय आंदोलन के नाते प्रयासरत है।’’ उक्त बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने कही। वे गत 15 सितंबर को विद्या निकेतन, उदयपुर में संपन्न विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित विद्या भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री काशीपति ने कहा कि विद्या भारती के दो प्रकार के दायित्व हैं, एक विद्यालय गुणवत्तापूर्वक चलें और भारतीय शिक्षा के आदर्श के नाते समाज में स्थापित हो। दूसरा, समाजोन्मुख कार्य, पूर्व छात्र, संस्कृति बोध, विद्वत परिषद, शोध, प्रचार विभाग, संपर्क विभाग, अभिलेखागार, इन सभी के कार्यों से भी शिक्षा जगत में प्रभावी योगदान देकर मूल्य स्थापित हो। विद्या भारती के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री श्री यतींद्र शर्मा ने एक बैठक की प्रस्तावना में कहा कि विद्या भारती का कार्य शिक्षा के क्षेत्र में एक आदर्श स्थापित करना है। इसके लिए देशभर में चल रहे 25 हजार शिक्षा केंद्रों को समाज के सामने संस्कार और शैक्षिक गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान करने वाले विद्या मंदिरों के रूप में प्रतिष्ठित किया जाएगा। प्रतिनिधि