कच्चे तेल के भावों में तेजी, बढ़ सकती है महंगाई
   दिनांक 24-सितंबर-2019
सऊदी अरब के दो तेल संयंत्रों पर हमले हुए इसके फौरन बाद भारत कच्चे तेल के भावों में करीब बीस प्रतिशत की तेजी देखी गई है। कच्चे तेल के भावों में तेजी भारत के लिए ही नहीं, कई देशों के लिए बहुत नकारात्मक साबित हो सकती है

14 सितंबर 2019 को सऊदी अरब के दो तेल संयंत्रों पर हमले हुए इसके फौरन बाद भारत कच्चे तेल के भावों में करीब बीस प्रतिशत की तेजी देखी गई। कच्चे तेल की तमाम किस्मों में बहुत तेजी देखी गई। ब्रेंट 71 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। हालांकि बाद में यह गिरकर 66 डॉलर प्रति बैरल पर आ गये। फिर भाव 65 डॉलर पर भी आए। पर आशंका तो पैदा हो ही गई। शंका जताई गई है कि पेट्रोल पांच रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो सकता है। पेट्रोल या डीजल का महंगा होना सिर्फ इनका महंगा होना नहीं होता, बल्कि समग्र महंगाई भी पेट्रोलियम उत्पादों की महंगाई से निकलती है, क्योंकि अधिकांश आइटमों की फाइनल कीमत में परिवहन लागत शामिल होती है। चिंताएं बहुत सारी हैं। महंगाई बढ़ने का सबसे बड़ा नुकसान यह हो सकता है कि रिजर्व बैंक फिर ब्याज दरों में गिरावट के सिलसिले को थाम सकता है। कुल मिलाकर कच्चे तेल के भावों में तेजी भारत के लिए ही नहीं, कई देशों के लिए बहुत नकारात्मक साबित हो सकती है।
आशंकाएं
वित्तीय एजेंसी नोमुरा के रिसर्च चीफ रोब सुब्बारामन ने आशंकाएं जताई हैं कि कच्चे तेल के भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर भी जा सकते हैं। महंगाई के अलावा विदेशी मुद्रा का भी मामला है। कच्चे तेल के भाव के एक डॉलर भाव बढ़ने पर भारत का तेल बिल करीब 1.6 अरब डालर बढ़ जाता है यानी करीब 11500 करोड़ रुपये। कच्चे तेल पर भारत ने 2018-19 में 112 अरब डालर खर्च किये हैं। कच्चा तेल 66 से 76 डालर प्रति बैरल हो गया यानी दस डालर बढ़ गया, तो एक महीने के जीएसटी संग्रह से भी ज्यादा बड़ी रकम जितना बोझ भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ जायेगा।
निवेश
भारत की कंपनी रिलायंस में सऊदी अरब के निवेश की बात चल रही है। सऊदी अरब की हालत का असर इस निवेश पर भी पड़ सकता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि 10 ड्रोन सऊदी अऱब पर हमला करके दुनिया की पांच प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई बाधित कर सकते हैं। हमले में सऊदी अरब का अपना आधा उत्पादन यानी कुल 5 करोड़ 70 लाख बैरल प्रतिदिन का उत्पादन ठप हो गया। कुछ समय पहले होरमुज की खाड़ी में भी हमले हुए थे। तेल का कारोबार इससे गहरे तौर पर प्रभावित होता है। इस तरह की मारधाड़ के रुकने के आसार दिखाई नहीं पड़ रहे हैं।
पश्चिम एशिया पर निर्भरता
भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का आयातक है। सवाल यह है कि क्या भारत अपनी कूटनीतिक क्षमताओं का इस्तेमाल करके इस मारधाड़ को रुकवा सकता है। यह सवाल कठिन सवाल है क्योंकि इस सवाल के सिर्फ राजनीतिक नहीं, आर्थिक, सामरिक आयाम भी हैं। यूं तो भारत के लिए इराक सबसे बड़ा तेल सप्लायर है । इसके बाद दूसरे नंबर पर सऊदी अरब है। भारत अपनी तेल जरूरतों का करीब 17 प्रतिशत सऊदी अरब से लेता है । पर कुल मिलाकर भारत अपने कच्चे तेल की जरूरतों का करीब दो-तिहाई पश्चिम एशिया के देशों से खरीदता है, वहां अब लगातार तनाव बना हुआ है। अब जरूरी है कि दूसरे तमाम देशों की तलाश हो, जो मध्य एशिया से बाहर हों और जहां से नियमित कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
तेल रिजर्व
मसले और भी हैं। चीन के पास तीन महीने के लिए जरूरी तेल सप्लाई बतौर रिजर्व है। भारत के पास मुश्किल से दस दिन के लिए जरूरी तेल है, इस तेल रिजर्व को बढ़ाने पर भी सोचा जाना चाहिए। अमेरिका 'शेल आयल' नाम का एक अलग तरह का तेल बना रहा है।त्र जिसकी लागत करीब 40 डॉलर प्रति बैरल से लेकर अस्सी डॉलर प्रति बैरल तक आती है। शेल आयल को लेकर अब गंभीर विचार होना ही चाहिए।
विकल्पों पर काम
कुल मिलाकर तेल के मामले में चिताएं बनी हुई हैं। बिजली से वाहन चलाने की बात लगातार हो रही है। सरकार इसमें उत्सुकता दिखा रही है। पर अभी भी यह सारी बातें मोटे तौर पर बातों के स्तर पर ही हैं। बिजली से वाहन चलाने के लिए जिस तरह की तैयारियों की जरुरत है, वैसी तैयारियां दिखाई नहीं पड़ती हैं। चार्जिंग पाइंट लगाना बहुत जरूरी है। आटोमोबाइल उद्योग की अधिकांश कंपनियां भी बिजली चालित वाहनों की तरफ जाने को तैयार नहीं दिखतीं, क्योंकि इससे उनके नए निवेश बढ़ जाएंगे। पर अब पेट्रोल डीजल के बजाय बिजली की तरफ जाने के अभियान को सिर्फ आटोमोबाइल उद्योग के लिए ही जरूरी न माना जाए, इसे राष्ट्रीय महत्व का अभियान घोषित किया जाए। एक हद तक ऊर्जा सुरक्षा का ताल्लुक समग्र सुरक्षा से है। महंगा तेल समग्र अर्थव्यवस्था को पटरी से उतार सकता है। इसलिए बिजली से चलनेवाले वाहनों की तादाद कैसे बढ़ाई जाए, इस प्रश्न पर गंभीरता से विचार किया जाए। इसके लिए सबसे जरूरी है कि इसके लिए बुनियादी आधारभूत ढांचे पर काम किया जाए।