लव जिहाद के चलते पाकिस्तान में की गई निमरिता की हत्या
   दिनांक 25-सितंबर-2019
मलिक असगर हाशमी
पाकिस्तान के एक मेडिकल डेंटल कॉलेज के छात्रावास में हिंदू छ़ात्रा निमरिता चंदानी की हत्या कर दी गई। ईशनिंदा कानून की आड़ में हिंदू प्रधानाचार्य नोतनमल को गिरफ्तार किया गया। हिंदुओं में गुस्सा है। पाकिस्तानी अल्पसंख्यक हिंदू विश्व समुदाय से गुहार लगा रहे हैं कि पाकिस्तान में उनकी रक्षा की जाए

 
24 वर्षीया निमरिता चंदानी, जिसकी हत्या कॉलेज के छात्रावास में कर दी गई
पाकिस्तान हिंदुओं के लिए नरक बन चुका है। एक हफ्ते के अंदर कई ऐसी घटनाएं घटी हैं, जिनसे पाकिस्तानी हिंदू बहुत ज्यादा चिंतित हैं। पिछले दिनों लरकाना के असीफा मेडिकल डेंटल कॉलेज के छात्रावास में निमरिता चंदानी नामक एक हिंदू लड़की की हत्या कर दी गई। घर वालों का कहना है कि निमरिता की हत्या लव जिहाद के चक्कर में हुई है। कुछ मुस्लिम युवक उसके पीछे पड़े हुए थे, लेकिन वह उनकी बात नहीं मान रही थी। इसलिए छात्रावास के कमरे में उसकी हत्या कर दी गई। वहीं पुलिस हमेशा की तरह इस मामले पर भी झूठ का आवरण चढ़ाने से बाज नहीं आई। पुलिस का कहना है कि निमरिता की हत्या नहीं हुई, बल्कि उसने आत्महत्या की है। दूसरी ओर निमरिता के भाई डॉ. विशाल सुंदर का आरोप है कि निमरिता की हत्या की गई है। उन्होंने कहा, ''निमरिता के शरीर पर चोट के निशान हैं। ये निशान उसकी हत्या की ओर संकेत कर रहे हैं।'' उन्होंने विश्व समुदाय से भी अपील की कि वे अल्पसंख्यक पाकिस्तानी हिंदुओं की रक्षा के लिए आवाज उठाएं।
निमरिता की हत्या के विरोध में 18 सितंबर को कराची में हिंदुओं ने प्रदर्शन किया और सरकार से अपनी जान-माल की रक्षा करने की गुहार लगाई। लेकिन ऐसा लगता है कि हिंदुओं की गुहार का कोई असर पाकिस्तान की सरकार पर नहीं होता। इसीलिए वहां आएदिन हिंदू प्रताडि़त हो रहे हैं और सरकार सिर्फ आश्वासन देकर चुप हो जाती है।
निमरिता की हत्या से पहले सिंध प्रांत के ही घोटकी इलाके में मुसलमानों ने 14 सितंबर को स्थानीय हाई स्कूल के प्रधानाचार्य नोतनमल के साथ यह आरोप लगाते हुए मार-पीट की कि उन्होंने 'पैगंबर मोहम्मद का नाम लेकर ईशनिंदा' की है। इसके बाद वहां मौजूद मुसलमानों की भीड़ स्कूल से सटे मंदिर पर टूट पड़ी। भीड़ ने मीरपुर, माथेलो और आदिलपुर सहित अन्य इलाकों में भी बवाल मचाया और हिंदुओं तथा मंदिरों को निशाना बनाया। पाकिस्तानी हिंदू परिषद के अध्यक्ष और सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेता रमेश कुमार वाकवानी के हस्तक्षेप के बाद बड़ी मुश्किल से स्थिति काबू में आई और प्रधानाचार्य नोतनमल को हिरासत में लेकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। इससे पहले सिंध के खैरपुर जिले के कुंब शहर में इसी तरह हिंदुओं को निशाना बनाया गया था और मंदिर में तोड़-फोड़कर वहां रखेे पवित्र ग्रंथ और देव प्रतिमाओं में आग लगा दी गई थी।
ऐसी घटनाओं का चिंताजनक पहलू यह है कि ईशनिंदा के आरोपों की जांच-पड़ताल किए बगैर ही मुसलमानों की भीड़ हिंदुओं पर टूट पड़ती है। प्रधानाचार्य नोतनमल के मामले में भी यही सब कुछ देखने को मिला। एक छात्र की उलटी-सीधी बातों पर उसका अब्बा अब्दुल अजीज राजपूत भड़क गया। उसने वास्तविकता का पता लगाए बिना ही स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज करा दी। पुलिस ने भी आरोपों की तस्दीक करने की बजाए प्राथमिकी दर्ज कर ली, जिसके बाद बवाल खड़ा हो गया। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने इस घटना से संबंधित एक वीडियो जारी कर पूरे मामले पर चिंता जाहिर की है। अब हैदराबाद के पुलिस उप महानिरीक्षक नईम शेख का कहना है कि पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है। मगर पूरे पाकिस्तान में उनसे कोई यह पूछने वाला नहीं कि बिना प्राथमिक जांच के थानेदार ने प्रधानाचार्य के विरुद्ध मुकदमा कैसे दर्ज कर लिया? मंदिरों और हिंदुओं पर हमले के बाद अब तक किसी हमलावर मुसलमान को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?
जाहिर है, पूरी व्यवस्था में हिंदुओं को लेकर नाइंसाफी रची-बसी है। इमरान खान सरकार अल्पसंख्यकों के कल्याण और उत्थान को लेकर दावे तो खूब करती है, पर उसके पिछले एक साल के कार्यकाल में हिंदुओं, ईसाइयों और सिखों के खिलाफ प्रताड़ना के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी देखने में आई है। विशेषकर, ईशनिंदा के नाम पर उन्हें निशाना बनाने और शादी के बहाने उनकी बहू-बेटियों के कन्वर्जन के मामले बढ़े हैं। इन दिनों पाकिस्तानी अल्पसंख्यक इस कदर डरे हुए हैं कि वे भारत की ओर टकटकी लगाए रहते हैं और मौका मिलते ही भारत आ जाते हैं। इमरान खान की पार्टी से विधायक रहे बलदेव कुमार कुछ दिन पहले ही शरण लेने भारत आए हैं। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि पाकिस्तान में हिंदुओं की कितनी दुर्गति हो रही है।
नया हथियार अनुच्छेद 149

 
पाकिस्तान में झूठे आरोप में गिरफ्तार किए गए प्रधानाचार्य नोतनमल
पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू, सिख और ईसाइयों को प्रताडि़त करने के लिए इमरान खान सरकार एक नए प्रपंच में लग गई है। वह हिंदू आबादी वाले सिंध प्रांत के प्रमुख शहर कराची पर अनुच्छेद 149 (4) थोपकर उस पर अपना कब्जा बढ़ाने की तैयारी में है। इसके तहत 'नया कराची' बनाने के नाम पर जो खाका तैयार किया गया है, उससे इस शहर में छोटा-मोटा कारोबार कर परिवार पालने वाले अल्पसंख्यक पूरी तरह उजड़ जाएंगेे। उल्लेखनीय है कि लगभग दो करोड़ की आबादी वाले कराची शहर के फुटपाथों पर फलों एवं सूखे मेवों का कारोबार करने वाले अधिकांश लोग अल्पसंख्यक हैं, जिन्हें अतिक्रमण हटाने के नाम पर थोड़े-थोड़े समय बाद उजाड़ दिया जाता है। इस दफा उन्हें सरकार की ओर से स्थायी तौर पर शहर-बदर करने की तैयारी है। कहा जा रहा है कि पाकिस्तान सरकार ने गंदगी, चरमराए बुनियादी ढांचे, बढ़ते संगठित अपराध और आतंकवाद को नियंत्रित करने की आड़ में सिंध की राजधानी कराची को अपने नियंत्रण में लेने की योजना पर अमल शुरू कर दिया है। कराची में आज भी बड़ी संख्या में हिंदू और सिख रहते हैं। इनके धर्मस्थल भी देश के अन्य हिस्सों की तुलना में यहां अच्छी स्थिति में हैं। नारायाणपुरा सहित कई मुहल्लों में हिंदुओं और सिखों की बड़ी आबादी रहती है। कराची में हिंदू व्यवसायी भी बहुत हैं। सूखे मेवों के कारोबार पर इनकी खासी पकड़ है। कराची में फिल्मों के निर्माण का कार्य भी होता है, जिसमें बड़ी संख्या में हिंदू सक्रिय हैं। भारतीय सिनेतारिका जूही चावला के कई रिश्तेदार कराची में फिल्म निर्माण कंपनियां चलाते हैं।
फिलहाल इमरान सरकार अनुच्छेद 149 थोप कर किसी का अधिकार कम करने की बात नहीं कर रही है। मगर 'नए कराची' के विकास को लेकर जो खाका खींचा गया है, उससे निश्चित ही यहां बसे हिंदुओं और भारत समर्थक सियासी पार्टी पीपीपी को गहरा धक्का लगेगा। सिंध में थारपरकर सहित कई जिलों में हिंदू अच्छी संख्या में रहते हैं। कराची प्रेस क्लब के पास तो हिंदुओं ने पूरी झोपड़पट्टी बस्ती बसा रखी है, जिस पर अतिक्रमण रोको अभियान के नाम पर हमेशा गाज गिरती रहती है। 'नई कराची' में यह पूरी तरह से उड़ जाएगी। लोगों का कहना है कि कराची में अनुच्छेद 149 के लागू होने से सबसे ज्यादा प्रभावित वहां के हिंदू ही होंगे। इसलिए वे लोग दहशत में हैं।
(लेखक पायनियर, हरियाणा संस्करण के संपादक हैं)