झूठ क्यों फैला रहे मुसलमान ?
   दिनांक 03-सितंबर-2019
उत्तर प्रदेश में मुसलमानों ने यह आरोप लगाकर सनसनी फैलाई कि उनसे जबरदस्ती "जय श्री राम" कहलवाया जा रहा है और जब वो ऐसा करने से इंकार कर रहे हैं तो तो उनके साथ मार-पीट की जा रही है. इस प्रकार के आधा दर्जन से अधिक मामले पुलिस की विवेचना में झूठे पाए गए हैं. 

 
 अपने दोस्‍त से मिलने पहुंचे युवक ने खुद ही अपनी दाढ़ी बनवा ली और बाद में इसे शरारती तत्‍वों की हरकत बता दिया। पोल खुलने पर पुलिस के सामने मांगी माफी
 
हाल ही में यूपी के बागपत जनपद में एक घटना सामने आई जब एक मुसलमान युवक ने गर्मी लगने की वजह से दाढ़ी बनवा ली. मगर जब वह घर वापस लौट रहा था तो उसे लगा कि घरवाले और आस-पास के लोग दाढ़ी को लेकर सवाल पूछेंगे. इससे बचने के लिए उसने अपने कपड़े फाड़ लिए और घरवालों को यह बताया कि उसके साथ जबरन मार-पीट की गई और उसकी दाढ़ी बनवा दी गई.यह सुनने के बाद फारूख के दोस्त ने इस घटना को लेकर ट्वीट कर दिया. पुलिस सक्रिय हुई. जब गहन पूछताछ की गई तब युवक ने स्वयं स्वीकार किया कि उसने अपने घरवालों के सवालों से बचने के लिए यह झूठी कहानी गढ़ी थी.
फारूख, बागपत जनपद के मुगलपुरा मोहल्ले का निवासी है. कुछ माह पहले मजहबी तक़रीर से प्रभावित होकर उसने दाढ़ी रखना शुरू कर दिया था. मगर गर्मी में उसे दाढ़ी से उलझन हो रही थी. वह दाढ़ी बनवाना चाहता था, उसने अपने एक दोस्त से सलाह लिया. उसके दोस्त ने उसे दाढ़ी बनवाने से मना किया. मगर फारूख ने दिल्ली जाकर दाढ़ी कटवा ली. पिछले सप्ताह फारूख अपने घर लौटा. घर लौट कर उसने जब झूठी कहानी घरवालों को सुनाई तो फारूख के दोस्त साजिद ने इस घटना का ट्वीट उत्तर प्रदेश पुलिस समेत गृहमंत्री को भी कर दी.
बागपत जनपद के पुलिस अधीक्षक गोपेन्द्र यादव ने बताया कि "फारूख को जब विश्वास में लेकर पूछताछ की गई और यह कहा गया कि किस दुकान में उसकी दाढ़ी बनवाई गई. इस पर वह घबरा गया और उसने बताया कि उसने दाढ़ी अपनी मर्जी से बनवाई है और यह सब कहानी झूठी है. गर्मी अधिक होने के कारण वह दाढ़ी बनवाना चाह रहा था मगर समाज एवं मजहब के भय से डरा हुआ था."
क्रिकेट के विवाद को साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई थी


 
 उन्नाव मामले में क्रिेकेट खेलने के दौरान हुई मारपीट में घायल छात्र
14 जुलाई 2019 को उन्नाव जनपद में क्रिकेट के खेल में हुए विवाद को साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई थी. विवाद बस इतना था कि दारूल उलूम फैज़ेआम मदरसे में पढ़ने वाले कुछ मुसलमान लड़के क्रिकेट खेल रहे थे. क्रिकेट खेलने वाले लड़कों का कुछ लोगों से झगड़ा हो गया और मौके मार-पीट हो गई. मगर मुसलमान लड़कों ने आरोप लगाया कि जब वह क्रिकेट खेल रहे थे. उसी दौरान चार युवक आये और उन लोगों ने जबरदस्ती ‘जय श्री राम’ का उद्घोष करने के लिए कहा. मुसलमान लड़कों के इन्कार करने पर उन चार युवकों ने स्टंप उखाड़ कर मुसलमान लड़कों के ऊपर हमला कर दिया जिससे मदरसे के कुछ छात्र घायल हो गए.
इस घटना की सूचना मदरसे के प्रधानाचार्य एवं शहर काजी मौलाना निसार अहमद को दी गई. उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा के चार कार्यकर्ताओं के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई. घटना के बाद पुलिस ने नामजद लोगों में से दो को गिरफ्तार भी कर लिया. इस पर हिन्दू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने कोतवाली पुलिस का घेराव किया. मामला इतना बढ़ गया कि लखनऊ में प्रमुख सचिव गृह अवनीश अवस्थी एवं अपर पुलिस महानिदेशक ( कानून एवं व्यवस्था) पी. वी. रामाशास्त्री ने सरकार की तरफ से स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि “क्रिकेट के विवाद में मार-पीट की घटना हुई थी. ‘जय श्री राम’ कहलवाने का कोई साक्ष्य नहीं मिला है. अलीगढ़, कानपुर एवं उन्नाव के मामले में जबरन 'जय श्री राम' कहलवाने की बात बिल्कुल झूठी पाई गई.
ऑटो चालक ने भी गढ़ी थी झूठी कहानी

 
कानपुर में आतिब के झूठे आरोप के बाद कानून एवं व्यवस्था को संभालते पुलिस अफसर
कानपुर नगर के बाबू पुरवा इलाके का निवासी आतिब आटो चालक है उसने 5 जुलाई 2019 को आरोप लगाया था कि बाकरगंज मोहल्ले के सुमित, राजेश और शिवा उसके ऑटो में बैठे थे. तीनों ने उसे चौराहे तक छोड़ने को कहा. कुछ देर बाद इन लोगों ने आतिब को ‘जय श्री राम’ का उद्घोष करने के लिए कहा. इन्कार करने पर उसके साथ मारपीट की. जब इस मामले की जांच हुई यह मामला झूठा पाया गया.
कानपुर नगर की पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी ) रवीना त्यागी के अनुसार आतिब ने अपने कुछ साथियों के साथ रात में शराब पी थी, इसी दौरान उसका उनसे किसी पर पर झगड़ा हुआ था। मारपीट की इस घटना को आतिब ने जानबूझकर साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश की.
अलीगढ़ में भी झूठी निकली थी मॉब लिंचिंग की कहानी
कुछ समय पहले, अलीगढ़ जनपद के थाना जवां अंतर्गत तालिबनगर के रहने वाले फरमान नियाजी ने भी सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास किया. फरमान ने सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करते हुए यह दावा किया था कि उसके साथ 'मॉब लिंचिंग' की घटना हुई थी. फरमान ने आरोप लगाया था कि बरेली जाते समय ट्रेन में कुछ लोगों ने उसके साथ मार -पीट की थी. इस घटना के बाद वह बेहोश हो गया था. होश में आने पर उसने खुद को अंजान जगह पर पाया.
अलीगढ़ की पुलिस ने तत्परता के साथ इस मामले का खुलासा किया. फरमान जब ट्रेन में यात्रा कर रहा था उस समय उसकी किसी से कहा -सुनी हुई थी. उसके कुछ देर बाद उसके साथ जहर खुरानी की घटना हुई. जहर खुरानी की घटना के बाद वह बेहोश हो गया था. इस मामले को तूल देने के लिए उसने इसे "मॉब लिंचिंग" की तरह प्रस्तुत किया था.