नायक नहीं असल में खलनायक हैं डॉ. कफील
   दिनांक 30-सितंबर-2019
 
हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल किया गया कि जांच में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के निलंबित डॉक्टर डॉ. कफील को जांच में 'क्लीन चिट' दे दी गई है. सोशल मीडिया पर यह तथ्यहीन खबर वायरल होने लगी. बगैर तथ्य को परखे कुछ विभिन्न न्यूज़ वेबसाइट पर यह खबर चला दी गई कि डॉ. कफील के खिलाफ चल रही जांच में कोई तथ्य नहीं मिले हैं. इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से स्थिति स्पष्ट की गई कि – “जांच में किसी प्रकार की कोई क्लीन चिट नहीं दी गई है.” सचाई सामने आने पर सन्नाटा पसर गया है.
तस्वीर साफ होते ही झूठी खबर वायरल करने वालों को जैसे सांप सूघ गया. दरअसल, सोशल मीडिया पर एक बड़ा समूह हमेशा सक्रिय है जो झूठ को सच की तरह पेश करता है. झूठ पकड़ जाने पर यह सभी लोग फिर उस पर कोई चर्चा नहीं करते हैं. क्योंकि इन्हें गढ़ना होता है एक और झूठा कथ्य. जब डॉ. कफील पर चर्चा शुरू हुई है तो इस मामले की सचाई जानना बेहद आवश्यक हो जाता है.
डॉ. कफील का नाम तो याद ही होगा. दो साल पहले गोरखपुर जनपद के सरकारी अस्पताल में हुई बच्चों की मौत के बाद जिन्होंने प्रदेश सरकार को बदनाम करने और स्वयं को नायक की छवि में स्थापित करने के लिए बयानबाजी की थी. उनके खिलाफ अभी तक जांच चल रही है.
 
गोरखपुर एवं आस - पास के जनपदों में इन्सेफ़्लाइटिस, वर्षों पुरानी समस्या है. इस जानलेवा बीमारी से बड़ी संख्या में छोटे बच्चों की मृत्यु हो जाती है . इस बीमारी का गर्मी और बारिश के मौसम में ज्यादा प्रकोप रहता है . 19 मार्च 2017 को योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. मात्र एक महीने बाद, इस बीमारी ने गोरखपुर एवं आस-पास के जनपदों में रह रहे लोगों को चपेट में लिया. मरीजों की संख्या अधिक हो गई थी. उस अनुपात में ऑक्सीजन सिलेंडर को लेकर आपूर्ति बढ़ाई गई थी. इस बीच अस्पताल में दर्जनों बच्चों की मौत हो गई थी. आरोप लगाया गया कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी के कारण हुई जबकि प्रदेश सरकार का कहना था कि ऑक्सीजन सिलेंडर की कोई कमी नहीं थी. बस ! यही वह अवसर था जब डॉ. कफील ने दोतरफा चाल चली. पहले तो डॉ. कफील ने यह बात जोर- शोर से प्रचारित किया कि मेडिकल कालेज में बच्चों की जिन्दगी बचाने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं थे. दूसरा काम डॉ. कफील ने यह किया कि उस समय उन्होंने स्वयं को नायक की तरह प्रस्तुत किया. अगर ऑक्सीजन सिलेंडर कम पड़ रहे थे तो डॉ. कफील को अपने वरिष्ठ अधिकारियों को यह सूचना देनी चाहिए थी. बजाय इसके डॉ. कफील ने तमाशा खड़ा करने के लिए बाहर से प्राइवेट ऑक्सीजन सिलेंडर मंगवाए और इसका टी.वी चैनलों में खूब प्रचार करवाया. शुरुआत में जो छवि मीडिया में प्रचारित की गई उसमे डॉ. कफील को नायक की तरह प्रस्तुत किया गया मगर बाद में यह खुलासा हुआ कि डॉ. कफील असल में खलनायक है.
डॉ. कफील पर आरोप है कि सरकारी अस्पताल का ऑक्सीजन सिलेंडर चोरी करके वह निजी अस्पताल में उसका इस्तेमाल करते थे. वर्ष 2017 के अगस्त माह में जब इन्सेफ़्लाइटिस की बीमारी के कारण बड़ी संख्या में मरीज बी.आर.डी. मेडिकल कालेज में भर्ती हो रहे थे. उस समय डॉ. कफील, इन्सेफ़्लाइटिस विभाग के चीफ नोडल अफसर थे. आरोप है कि उस समय बी.आर.डी. मेडिकल कालेज में मरीजों का इलाज करने के बजाय वह अपने निजी अस्पताल में ज्यादा व्यस्त थे. 10 और 11 अगस्त वर्ष 2017 को बी.आर.डी. मेडिकल कालेज में 32 मासूम एवं 18 अन्य गंभीर मरीजों की मृत्यु हो गई. बगैर किसी प्रकार की जांच कराए डॉ. कफील ने यह खबर फैलाई कि इन सभी कि मृत्यु आक्सीजन की कमी से हुई है. डॉ. कफील पर आरोप है कि इस घटना के मात्र एक दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल कॉलेज की समीक्षा बैठक ली थी. उनके निरीक्षण के दौरान डॉ.कफील उनके साथ थे. अगर ऑक्सीजन सिलेंडर कम पड़ रहे थे तो डॉ. कफील, मुख्यमंत्री के संज्ञान में यह बात क्यों नहीं ले आए ? डॉ. कफील परचेज कमेटी के सदस्य भी थे. उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडरों की स्थिति के बारे में पूरी जानकारी थी. बजाय बाहर से ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाने के वह अपने अधिकार का इस्तेमाल करके ऑक्सीजन सिलेंडर परचेज करा सकते थे मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया. बड़ी संख्या में हुई मृत्यु पर जब - जब वहां टी.वी. चैनल की टीम पहुंची. सभी को वक्तव्य डॉ. कफील ने ही दिया जबकि अन्य डाक्टर मरीजों के इलाज में लगे हुए थे.
निलंबन के दौरान डॉ. कफील, 22 सितम्बर 2018 को बहराइच के जिला चिकित्सालय के बाल रोग विभाग में जबरदस्ती घुस गए थे और वहां पर गंभीर रूप से बीमार बच्चों का इलाज करने लगे थे. डॉ. कफील के इस कृत्य से वहां पर गंभीर रूप से भर्ती मर्रीजों के जीवन पर संकट आ गया था, बाद में स्थिति को संभाल लिया गया था. निलंबन के दौरान उन्हें अपने जांच अधिकारी का सहयोग करना था मगर उन्होंने राजनीतिक दलों पर बयानबाजी की. इन सभी मामलों में अभी जांच जारी है. प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ रजनीश दुबे का कहना है कि डॉ. कफील के खिलाफ अभी जांच चल रही है. उनके खिलाफ अन्य कई गंभीर मामलों में जांच प्रचलित है. जांच रिपोर्ट आने पर उसके अनुसार निर्णय लिया जाएगा.