इसरो का मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन
   दिनांक 30-सितंबर-2019
 
पिछले दिनों भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष के. सिवन ने कहा कि देश दिसंबर 2021 तक मनुष्य को अंतरिक्ष में भेजने के अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि चन्द्रयान-2 के ‘लैंडर' विक्रम को चंद्रमा की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग' कराने की इसरो की योजना बेशक पूरी नहीं हो सकी हो लेकिन इसका ‘गगनयान' मिशन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि चन्द्रयान-2 का ऑर्बिटर साढ़े सात वर्षों तक डेटा देगा. वास्तव में चंद्र मिशन की सभी प्रौद्योगिकियां सॉफ्ट लैंडिंग को छोड़कर सटीक साबित हुई हैं. इसरो ने 2006 में ही मानवयुक्त अंतरिक्ष यान को भेजने की योजना बनायी थी, लेकिन करीब आठ वर्षो बाद जाकर अब हम इस दिशा में पहला कदम बढ़ाने के कगार पर पहुंचे हैं.
भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश होगा. अब तक अमेरिका, रूस और चीन ने ही अंतरिक्ष में अपना मानवयुक्त यान भेजने में सफलता पाई है. अब तक तीन भारतीय अंतरिक्ष में जा चुके हैं. इसमें वर्ष 1984 में राकेश शर्मा सोवियत रूस की मदद से अंतरिक्ष में गए थे. इसके अलावा भारत की कल्पना चावला और सुनीता विलियम ने भी भारत का नाम इस क्षेत्र में रोशन किया है.
इसरो की योजना के मुताबिक, 7 टन भार, 7 मीटर ऊंचे और करीब 4 मीटर व्यास की गोलाई वाले गगनयान को जीएसएलवी (एमके-3) राकेट से अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया जाएगा। प्रक्षेपित करने के 16से 20 मिनट में यह कक्षा में पहुंच जाएगा। इसको धरती की सतह से 300-400 किलोमीटर की दूरी वाले कक्षा में स्थापित किया जाएगा। भारत अपने अंतरिक्ष यात्रियों को 'व्योमनट्स' नाम देगा क्योंकि संस्कृत में 'व्योम' का अर्थ अंतरिक्ष होता है.
क्यों अहम है मिशन गगनयान ?
यह मिशन काफी अहम है क्योंकि मिशन गगनयान में एक इंसान को स्पेस में भेजेंगे और यान के जरिए ही वापस धरती पर लाएंगे. इस प्रक्रिया के दो पहलू हैं मानव और इंजीनियरिंग. इंसान को अंतरिक्ष में भेजने के लिए एक नया सेंटर भी स्थापित किया गया है. यह साल गगनयान के लिए काफी अहम है क्योंकि दिसंबर 2020 में पहला मिशन और जुलाई 2021 में दूसरा मिशन तैयार होगा, इसे पूरा करने के बाद दिसंबर 2021 में गगनयान मिशन होगा.
गगनयान
गगनयान भारतीय मानवयुक्त अंतरिक्ष यान है. अंतरिक्ष कैप्सूल तीन लोगों को ले जाने के लिए तैयार किया गया है और इसे उन्नत संस्करण डॉकिंग क्षमता से लैस किया जाएगा. अपनी पहली मानवयुक्त मिशन में, यह 3.7 टन का कैप्सूल तीन व्यक्ति दल के साथ सात दिनों के लिए 400 किमी (250 मील) की ऊंचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा करेंगे. कक्षीय वाहन को इसरो के भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान मार्क 3 पर लॉन्च करने की योजना है.
मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन
इसरो के फ्यूचर प्रोग्राम के तहत जीएसएलवी मार्क-3 नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्च वेहिकल चार टन के अंतरिक्षयान को अंतरिक्ष की कक्षा में भेजने में सक्षम होगा. इसका मकसद दो या तीन अंतरिक्ष यात्रियों समेत यानी मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन की दिशा में कामयाबी हासिल करना है. अगले कुछ सालों में इसे अंजाम देने के मकसद से इस मिशन के लिए 12.4 अरब की रकम का आवंटन किया गया था. हालांकि, वर्ष 2010 में अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक के बाद एक कई असफलताओं के कारण इस अभियान को रोक देना पड़ा था.
तकनीकी चुनौतियां : इस अभियान के संदर्भ में इसरो के समक्ष तीन बड़ी तकनीकी चुनौतियां हैं. इसके दायरे में पर्यावरण नियंत्रण, लाइफ सपोर्ट सिस्टम, क्रू इस्केप सिस्टम और फ्लाइट सूट व मौजूदा गतिविधियों को सफल तरीके से संचालित करना सबसे बड़ी चुनौती है.
सोयुज जैसा स्पेसक्राफ्ट : भारतीय मानवयुक्त स्पेसक्राफ्ट रूस के ‘सोयुज’ स्पेसक्राफ्ट पर आधारित है. इसरो की ओर से पूर्व में यह बताया गया है कि रूसी एजेंसी द्वारा भारत के इस मिशन के लिए सोयुज स्पेस कैप्सूल को री-डिजाइन किया जायेगा. और उसी का परिवर्धित रूप होगा भारत का जीएसएलवी मार्क-3. इसे इस प्रकार से बनाया जा रहा है ताकि यह कम से कम सात दिनों तक अपने मिशन को अंजाम दे सके.
अंतरिक्षयात्रियों को ट्रेनिंग : अंतरिक्ष में भेजे जाने से पूर्व अंतरिक्षयात्रियों को ट्रेनिंग देने के लिए बेंगलुरु के बाहरी इलाके में करीब 100 एकड़ में एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग सेंटर के निर्माण की योजना है. अंतरिक्ष की यात्र पर जाने वाले पायलटों को यहां खास प्रकार का प्रशिक्षण दिया जायेगा. अंतरिक्ष के समान माहौल में किसी प्रकार की चुनौती पेश आने की स्थिति में अपना बचाव करने और जीरो ग्रेविटी (गुरुत्वाकर्षणहीनता) समेत वहां के विकिरणयुक्त पर्यावरण में खुद को बचाये रखने का अध्ययन भी किया जायेगा. मिशन के एक्सीलरेशन फेज के लिए अंतरिक्षयात्रियों की तैयारी हेतु इसरो यहां अपकेंद्रण यंत्र भी बनायेगा. साथ ही थर्मल साइकिलिंग और रेडिएशन को रेगुलेट करने वाली सुविधाएं भी यहां मुहैया करायी जायेंगी.
भारतीय वायुसेना लेगी प्रशिक्षण की जिम्मेदारी
फ़िलहाल भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन गगनयान के 10 क्रू मेंबर्स के चुनाव और प्रशिक्षण के लिए भारतीय वायुसेना को जिम्मेदारी सौंपी है। इसरो चेयरमैन के. सिवन ने कहा, 'हमने क्रू सिलेक्शन एवं ट्रेनिंग से जुड़े सभी मानदंडों और जरूरतों को तय कर दिया है और इसे इंडियन एयरफोर्स को सौंप दिया गया है। ट्रेनिंग के पहले 2 चरण इंडियन एयरफोर्स के इंस्टिट्यूट ऑफ ऐरोस्पेस मेडिसिन (बेंगलुरु) में होंगे और उसके बाद आखिरी चरण की ट्रेनिंग विदेश में होगी।'
ह्यूमैन स्पेस फ्लाइट लॉन्च पैड : मानवयुक्त स्पेसक्राफ्ट की लॉन्चिंग को आसान व सुविधाजनक बनाने के लिए एक नया लॉन्च पैड बनाया जायेगा. यह स्थान लॉन्च पैड 2 से एक किलोमीटर दक्षिण की ओर होगा. मालूम हो कि लॉन्च पैड 2 से चंद्रयान-1 मिशन को लॉन्च किया गया था. तीसरे लॉन्च पैड का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जिसका इस्तेमाल इसरो अपने भविष्य के कार्यक्रमों के लिए करेगा. इस कार्यक्रम में मानवयुक्त स्पेस फ्लाइट मिशन भी शामिल है.
मिशन कंट्रोल सेंटर : इस अभियान के तहत सबसे मुश्किल कार्य इसे ऊपर छोड़ना, कक्षा में समायोजित करना और फिर नीचे लाना माना जा रहा है. इसी मकसद से मिशन कंट्रोल सेंटर के लिए अलग से एक केंद्र बनाया जायेगा. मिशन कंट्रोल सेंटर्स को अन्य प्रकार की मदद मुहैया कराने के लिए श्रीहरिकोटा स्थित स्पेसपोर्ट और इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड सेंटर (आइएसटीआरएसी), बेंगलुरु को भी अपग्रेड किया जा रहा है.
इसरो का बड़ा लक्ष्य
चंद्रयान-1, मंगल यान और चंद्रयान 2 की आंशिक कामयाबी के बाद भारत की निगाहें अब आउटर स्पेस पर हैं. इसरो ग्रहों की तलाश के लिए कई मिशन भेजने की योजना बना रहा है. जिसमें मानव मिशन भी शामिल है. मानव स्पेसफ्लाइट कार्यक्रम का उद्देश्य पृथ्वी की निचली कक्षा के लिए दो में से एक चालक दल को ले जाने और पृथ्वी पर एक पूर्वनिर्धारित गंतव्य के लिए सुरक्षित रूप से उन्हें वापस जाने के लिए एक मानव अंतरिक्ष मिशन शुरू करने की है.
इसरो अध्यक्ष के अनुसार दिसम्बर 2020 तक हमारे पास मानव अंतरिक्ष विमान का पहला मानव रहित मिशन होगा. हमने दूसरे मानव रहित मानव अंतरिक्ष विमान का लक्ष्य जुलाई 2021 तक रखा है. इसके बाद दिसम्बर 2021 तक पहला भारतीय हमारे अपने रॉकेट द्वारा ले जाया जाएगा. यह हमारा लक्ष्य है जिस पर इसरो काम कर रहा है. असल में देश के लिए गगनयान मिशन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश की विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षमता को बढ़ावा देगा.
(लेखक मेवाड़ यूनिवर्सिटी में डायरेक्टर और टेक्निकल टूडे पत्रिका के संपादक हैं)