जान देने से अच्छा है जुर्माना, उससे भी अच्छा ट्रैफिक नियम मानें
   दिनांक 05-सितंबर-2019
हम सबसे आगे होंगे हिन्दुस्तानी पर झूमते हैं. लेकिन हम हेलमेट लगाने को तैयार नहीं हैं. शराब पीने के बाद वाहन चलाते हैं . एक बाइक या स्कूटी पर इतने लद जाते हैं कि कार को शर्म आए जाए. और अगर आपको आपकी ही खातिर इस अनुशासन में रहने के लिए नियम बनते हैं, तो शोर मचता है.
 
यक्ष ने युधिष्ठर से पूछा कि संसार का सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है. धर्मराज ने जवाब दिया कि मृत्यु एक सत्य है. रोज हम अपने इर्द-गिर्द अपने प्रियजनों की मृत्यु होते देखते हैं, लेकिन फिर भी इस तरह जिए जा रहे हैं कि हमारी मृत्यु नहीं होगी. क्या सड़क पर होने वाले हर एक्सीडेंट को देखकर हम इसी तरह आगे नहीं बढ़ जाते. जिस देश में डेढ़ लाख से ज्यादा लोग हर साल सिर्फ सड़क हादसों में जान गवां देते हैं, वहां ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने को बढ़ाने को लेकर हो रही हाय-तौबा स्वाभाविक है. आपको कोई नहीं बताएगा कि रोज सौ लोग सिर्फ इसलिए सड़क हादसों में मर जाते हैं क्योंकि उन्होंने हेलमेट नहीं लगाया होता. हम महाशक्ति बनना चाहते हैं. दुनिया के तमाम विकसित मुल्कों से मुकाबला करना चाहते हैं. लेकिन क्या हम एक अनुशासित और कानून पाबंद नागरिक हैं.
हम सबसे आगे होंगे हिन्दुस्तानी पर झूमते हैं. लेकिन हम हेलमेट लगाने को तैयार नहीं हैं. शराब पीने के बाद वाहन चलाते हैं . एक बाइक या स्कूटी पर इतने लद जाते हैं कि कार को शर्म आए जाए. गर्दन टेड़ी करके कान और कंधे के बीच मोबाइल फंसाकर बात करते हुए ड्राइविंग राष्ट्रीय तस्वीर बन चुकी है. तोंद पर पेंट रोकने के लिए बेल्ट बांधना मजबूरी है, लेकिन ड्राइविंग के समय बेल्ट बांधते बंधन लगता है. और अगर आपको आपकी ही खातिर इस अनुशासन में रहने के लिए नियम बनते हैं, तो शोर मचता है.
 
आप चारों तरफ देखेंगे, तो पाएंगे कि हम बदलने के लिए तैयार नहीं हैं. बदलने के लिए हमें मजबूर किया जा रहा है. आजादी के सत्तर साल बाद हमें भारत को साफ रखने की सुध आती है. खुले में शौचालय जैसी बुराई से लड़ने में सरकार को जोर लगाना पड़ता है. किसी देश को बदलने के लिए आपको सिंगापुर और च्युइंग गम के बारे में जानना जरूरी है. सिंगापुर को हर साल डेढ़ लाख डॉलर सिर्फ च्युइंग गम की सफाई में खर्च करने पड़ते थे. रेल यातायात तक इससे प्रभावित हो जाता था. ली कुवान ने इस पर रोक लगाने का फैसला किया. आप सिंगापुर में बंदूक खरीद सकते हैं, इलेक्ट्रिक सिगरेट खरीद सकते हैं, लेकिन च्युइंग गम नहीं. च्युइंग बेचने पर एक लाख अमेरिकी ड़ॉलर यानी सत्तर लाख रुपये का जुर्माना है. आज देश की सड़कों, गलियों और इमारतों की जो हालत पान व गुटके की पीक ने कर रखी है, वह कभी च्युइंग गम के कारण सिंगापुर की थी. आज सिंगापुर की सड़कें दुनिया में सबसे साफ हैं. 
 
हरियाणा में बुधवार को ही एक बुलेट का चालान हुआ है. कुल रकम बनी है 35 हजार. अब जरा जुर्म सुनिए. बाइक पर तीन सवार थे. हेलमेट नहीं था. बाइक के पंजीकरण के कागज नहीं थे. इंश्योरेंस नहीं था. इतना काफी नहीं... बुलेट का साइलेंसर गोली चलने जैसी आवाज करता था. यातायात कानूनों का कौन सा नियम बचा रहा. नए जुर्माना कानूनों पर बहुत शोर मच रहा है. कोई डकैती करार दे रहा है, कोई कह रहा कि ट्रैफिक पुलिस को लूट की छूट मिल गई है. कैसे. क्यूं. इसके लिए सरकार या ट्रैफिक पुलिस कैसे जिम्मेदार हैं. आप हेलमेट लगाइये. गाड़ी के कागजात और इंश्योरेंस रखिए. पॉल्यूशन रखिए. क्या इनमें बहुत ज्यादा वजन है. या हमारी आदत है बिना कागजात के चलना. आपके पास ये चीजें पूरी हैं, तो न नया कानून आपका कुछ बिगाड़ता है और न ही ट्रैफिक पुलिस कुछ कर सकती है. आप कागज नहीं रखेंगे, तो चालान भी होगा और हो सकता है कि अवैध वसूली भी हो जाए. शराब पीकर गाड़ी चलाएंगे, तो खुद सुरक्षित रहे या किसी को नहीं भी टक्कर मारी, तो क्या कानूनन आपकी खबर नहीं ली जानी चाहिए. तमाम शोध में साबित हो चुका है कि मोबाइल पर बात करना सड़क दुर्घटनाओं का सबसे अहम कारण है.
सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से शोर मचाने वाले या तो जानते नहीं है, या जानबूझकर बताना नहीं चाहते कि भारत में सबसे ज्यादा असुरक्षित आप सड़क पर चलते हुए हैं. 2017 की एक रिपोर्ट के मुताबिक रोज 98 लोग सिर्फ हेलमेट न लगाए होने के कारण सड़क दुर्घटनाओं में जान गवां देते हैं. रोज 79 लोगों की जान बच सकती थी यदि उन्होंने सीट बेल्ट लगाई होती. ये हमारी जान का सौदा है और इस पर सरकार को चालान करने पड़ रहे हैं, तो हमें सोचना होगा कि हम जिम्मेदार नागरिक हैं या नहीं. भारत की सड़कें कश्मीर की नियंत्रण रेखा से भी ज्यादा खतरनाक हैं. 2016 में डेढ़ लाख लोगों की मौत सड़क हादसे में हुई. 2016 में दस हजार दोपहिया चालकों की मौत हेलमेट न लगाने के कारण हुई. 2017 में ये आंकड़ा बढ़कर 36 हजार हो गया. आप बिना हेलमेट लगाए सुरक्षित वापस आ जाते हैं, ये आपकी विशेषता नहीं किस्मत है. किसी हादसे की सूरत में सड़क और सिर के बीच सिर्फ एक चीज आती है, वो हेलमेट है. आप चालान के डर से लगाएं या जिम्मेदार नागरिक होते हुए, आप राष्ट्र पर एहसान नहीं कर रहे हैं. आप अपनी जान की फिक्र कर रहे हैं.
दुनिया के तमाम विकसित देशों ने सड़क अनुशासन विकसित किया है, तो उसके पीछे सख्त नियम, कानून और बड़े जुर्माने हैं. सिंगापुर में यदि आप रेड लाइट लांघ जाते हैं, तो बीस हजार रुपये (400 सिंगापुर डॉलर) जुर्माना है. अमेरिका के अलास्का में अगर आप गाड़ी चलाते हुए फोन पर बात करते हैं, तो दस हजार डॉलर यानी सवा सात लाख रुपये जुर्माना है. साथ ही एक साल की जेल भी. अमेरिका के वर्जीनिया में आप तय गति सीमा को लांघते हैं, तो इसका जुर्माना एक लाख अस्सी हजार रुपये है. तेज रफ्तार के साथ गाड़ी चलाने में लापरवाही भी कर रहे हैं, मसलन गलत लेन में चलना, तो एक साल की जेल है. अमेरिका में बिना लाइसेंस वाहन चलाने पर सत्तर हजार रुपये तक जुर्माना है. जबकि बिना हेलमेट पकड़े जाने पर तीस हजार रुपये तक भरने पड़ सकते हैं. चीन में शराब पीकर गाड़ी चलाने पर पचास हजार का जुर्माने के है. सात ही पांच साल तक लाइसेंस निलंबित हो जाता है. ड्राइविंग लाइसेंस न होने, लाइसेंस न होने, नंबर प्लेट ठीक न होने पर पचास हजार रुपये तक जुर्माना चीन में होता है.
आप चारों तरफ देखेंगे, तो पाएंगे कि हम बदलने के लिए तैयार नहीं हैं. बदलने के लिए हमें मजबूर किया जा रहा है. आजादी के सत्तर साल बाद हमें भारत को साफ रखने की सुध आती है. खुले में शौचालय जैसी बुराई से लड़ने में सरकार को जोर लगाना पड़ता है. किसी देश को बदलने के लिए आपको सिंगापुर और च्युइंग गम के बारे में जानना जरूरी है. सिंगापुर को हर साल डेढ़ लाख डॉलर सिर्फ च्युइंग गम की सफाई में खर्च करने पड़ते थे. रेल यातायात तक इससे प्रभावित हो जाता था. ली कुवान ने इस पर रोक लगाने का फैसला किया. आप सिंगापुर में बंदूक खरीद सकते हैं, इलेक्ट्रिक सिगरेट खरीद सकते हैं, लेकिन च्युइंग गम नहीं. च्युइंग बेचने पर एक लाख अमेरिकी ड़ॉलर यानी सत्तर लाख रुपये का जुर्माना है. आज देश की सड़कों, गलियों और इमारतों की जो हालत पान व गुटके की पीक ने कर रखी है, वह कभी च्युइंग गम के कारण सिंगापुर की थी. आज सिंगापुर की सड़कें दुनिया में सबसे साफ हैं.