एसएफआई ने राज्यसभा सदस्य स्वपन दासगुप्ता समेत 70 लोगों को विश्वभारती विश्वविद्यालय में बंधक बनाया
   दिनांक 10-जनवरी-2020
एसएफआई कार्यकर्ताओं ने राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ पत्रकार स्वपन दासगुप्ता समेत 70 लोगों को विश्वभारती विश्वविद्यालय में बंधक बनाया। वह वहां नागरिकता (संशोधन) अधिनियम पर आयोजित गोष्ठी में भाग लेने गए थे

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रोफेसरों को कमरे में बंद करने की वामपंथी गुंडों की हरकत याद दिलाते एक शर्मनाक घटनाक्रम में विश्व भारती विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन में नागरिकता संशोधन अधिनियम पर चर्चा के लिए एकत्रित हुए 70 से अधिक लोगों को उसी कमरे में पांच घंटे तक बंधक बनाए रखा। बाद में प्रशासन के हस्तक्षेप से इन बंधकों को मुक्त कराया जा सका। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित इस विश्वप्रसिद्ध विश्वविद्यालय में हुई इस घटना के पीछे माकपा-समर्थित छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) कार्यकर्ताओं का हाथ बताया जाता है जो इस विमर्श का विरोध कर रहे थे।
‘सीएए-2019: अंडरस्टैंडिंग ऐंड इंटरप्रिटेशन’ विषय पर आयोजित इस विचार-गोष्ठी में राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ पत्रकार स्वपन दासगुप्ता को भाषण देना था। यह गोष्ठी विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में बीती 8 जनवरी को शाम 4 बजे से होनी थी, लेकिन वामपंथी गुंडों के विरोध के चलते इसका स्थान बदल दिया गया था। गोष्ठी शुरू होने की सूचना से उत्तेजित एसएफआई कार्यकर्ताओं की भीड़ उस जगह पहुंच गई जहां यह कार्यक्रम चल रहा था। इन गुंडों ने उस परिसर को घेर कर गोष्ठी में बैठे लोगों को उसी कमरे में बंद कर दिया। जब गोष्ठी चल रही थी, उस समय परिसर को घेरे भीड़ ने कमरे की ओर पथराव भी किया। बंधक बनाए गए लोगों में स्वपन दासगुप्ता के अतिरिक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिद्युत चक्रवर्ती और रजिस्ट्रार प्रो. आशा मुखर्जी भी थीं।
 
एसएफआई ने इस गोष्ठी के आयोजन का विरोध किया था। एक दिन पहले से विश्वविद्यालय परिसर में गोष्ठी का बहिष्कार करने का आह्वान करते हुए बैनर टांगे गए थे। किंतु, जब बहुत से लोगों ने इस आह्वान पर ध्यान नहीं दिया और गोष्ठी में उपस्थित हुए तो विरोधियों ने जिस सभाकक्ष में गोष्ठी चल रही थी, उसे घेरने का फैसला किया। बंधक बनाए जाने के करीब पांच घंटे बाद जिला प्रशासन की मदद से एसएफआई के गुंडों को वहां से हटा कर बंधकों को मुक्त कराया जा सका।
बाद में मीडिया से बात करते हुए स्वपन दासगुप्ता ने बताया कि वह यहां नागरिकता (संशोधन) अधिनियम पर भाषण देने आए थे। “यह कोई राजनीतिक आयोजन नहीं था बल्कि विश्व भारती लेक्चर सीरीज़ का हिस्सा था। इससे आंदोलित लोग इस विषय पर लोकतांत्रिक तरीके से चर्चा नहीं करना चाहते इसीलिए वे विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। मैं छात्रों से बात करने के लिए तैयार हूं, लेकिन माहौल अभी इसके लायक नहीं है। मैं किसी तरह का झगड़ा नहीं चाहता, लेकिन आंदोलन का यह कोई तरीका नहीं है। मैं तो यहां विश्वविद्यालय के बुलावे पर आया था। इस बारे में आप उन्हीं से पूछिए कि उन्होंने गोष्ठी का स्थान क्यों बदला।”
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि दासगुप्ता के भाषण के दौरान बाहर प्रदर्शन कर रहे एसएफआई से जुड़े लोगों ने केंद्र सरकार और नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ नारे लगाए और इसमें भाग लेने जा रहे लोगों को डराने-धमकाने का प्रयास किया। इस आचरण से पता लगता है कि एसएफआई अपनी बात न मानने वालों को स्वतंत्र रूप से विचार अभिव्यक्ति करने देने के खिलाफ है। इसी एसएफआई और अन्य वाम संगठनों ने पिछले दिनों देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर खूब शोर-शराबा मचाया था।
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनकड़ ने भी एसएफआई कार्यकर्ताओं द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बाधित करने के इन प्रयासों पर चिंता जताते हुए कहा है कि ये स्थितियां राज्य में खराब होती कानून-व्यवस्था को प्रदर्शित करती हैं।