...छलका शरणार्थियों का दर्द
    दिनांक 13-जनवरी-2020
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'हिन्दू विश्व' के शरणार्थियों पर केंद्रित अंक का लोकार्पण करते (बाएं से) आचार्य लोकेश मुनि, सर्वश्री बचन सिंह, वागीश ईस्सर, इंद्रेश कुमार, आलोक कुमार, रविशंकर प्रसाद एवं राकेश गुप्ता
 
 
''अब आपके दुख के बादल छंट गए हैं और आप भारत में इज्जत के साथ सिर ऊंचा करके रहें, भारत आपके साथ खड़ा है।'' उक्त बात केंद्रीय कानून मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद ने कही। वे 5 जनवरी को नई दिल्ली स्थित सिरीफोर्ट सभागार में इंद्रप्रस्थ विश्व हिंदू परिषद द्वारा नागरिकता संशोधन कानून पर आयोजित 'संभ्रम से सच की ओर' विषयक संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि तीन पड़ोसी इस्लामिक देशों में गैर-मुस्लिमों पर अमानवीय जुल्म ढाए जा रहे हैं। वे लोग दुखी होकर भारत आते हैं। इसलिए भारत सरकार ने ऐसे लोगों को नागरिकता देने के लिए कानून बनाया है। लेकिन कुछ लोग वोट बैंक के लिए इस कानून का विरोध कर रहे हैं। विहिप के कार्याध्यक्ष श्री आलोक कुमार ने कहा कि तीन पड़ोसी मुस्लिम देशों से प्रताडि़त होकर भारत आए शरणागतों को भारतीय नागरिकता देना अटल निर्णय है। यदि इसका विरोध करने वालों ने हिंसा करने का मन बना ही लिया है तो भारत सरकार और समाज दोनों ही इसका सामना करने में सक्षम हैं। सीएए का विरोध करने वालों से, पाकिस्तान में ननकाना साहिब गुरुद्वारे की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने पूछा कि यदि पाकिस्तान की बेटी जगजीत भारत में शरण मांगेगी तो उनका क्या जवाब होगा।
 
कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री इन्द्रेश कुमार ने गत 1500 वर्ष के इतिहास का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि हमने विदेशों से आए अनेक मतावलम्बियों व मत-मतान्तर के लोगों को शरण, सहायता व सहोदर भाव के साथ अंगीकार किया। किन्तु आज बड़ा दुर्भाग्य है कि कुछ लोग मात्र अपनी राजनीतिक स्वार्थ सिद्धि के लिए पीडि़तों को न्याय देने का विरोध कर रहे हैं। ऐसे लोगों को भगवान सद्बुद्धि दे।
 
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए शरणार्थी भी उपस्थित थे। इन लोगों ने आपबीती सुनाई, जिसे सुनकर लोग भावुक हो गए। लोगों ने एक स्वर से कहा कि ऐसे लोगों को भारत की नागरिकता मिलनी ही चाहिए। प्रतिनिधि