''पाकिस्तान में आप कितने ही बेहतरीन खिलाड़ी क्यों न हों पर पहले मुसलमान होना जरूरी है''
   दिनांक 13-जनवरी-2020
 दानिश कनेरिया पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के बेहतरीन खिलाडि़यों में से एक रहे, लेकिन उनके साथ टीम में सिर्फ हिंदू होने के चलते भेदभाव किया गया। उनके कॅरियर में रोड़े खड़े किए गए। लेकिन जब पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी शोएब अख्तर ने इस भेदभाव को उजागर किया तो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड से लेकर कट्टरपंथ की पाठशाला चलाने वालों की हकीकत सामने आ गई। इस पूरे मसले पर पाञ्चजन्य के वरिष्ठ संवाददाता अश्वनी मिश्र ने पाकिस्तान में रह रहे क्रिकेट खिलाड़ी दानिश कनेरिया से विस्तृत बात की। प्रस्तुत हैं बातचीत के संपादित अंश:

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पाकिस्तान क्रिकेट टीम के खिलाड़ी शोएब अख्तर ने खेल के दौरान साथी खिलाडि़यों द्वारा हिन्दू होने के कारण आपके साथ भेदभाव की घटना को उजागर किया है। क्या था पूरा मामला ?
देखिए, शोएब अख्तर ने एक राष्ट्रीय चैनल पर जो बोला, वह उन्होंने खुद महसूस करके ही बोला है। अब यह कहानी लगभग देश सहित दुनिया भर के समाचार पत्रों, टीवी मीडिया में आ चुकी है। सबसे पहले मैं यह कहना चाहूंगा कि मैंने अपने देश पाकिस्तान के लिए क्रिकेट खेला और इस दौरान सदैव देश भावना से खेलते हुए साथी खिलाडि़यों के सहयोग से कई मैचों में जीत दिलाई। जिसे सभी ने देखा है। रही बात भेदभाव की तो शोएब भाई ने जो महसूस किया, सुना, तभी उन्होंने ऐसा कहा। उन्होंने यह बात ऐसे ही नहीं कह दी। खेल के दौरान मैंने ऐसी चीजों को कभी अहमियत नहीं दी। क्योंकि मेरे लिए मेरा खेल सबसे ऊपर था। मैं सारा ध्यान खेल पर लगाता था। मैं सब चीजों को पीछे छोड़कर यही सोचता था कि कैसे अपने देश को जीत दिलाऊं। मेरे पीठ पीछे बहुत सारी बातें होती थीं। मुझे इसका अहसास भी था। लेकिन मैंने कभी ऐसा कुछ नहीं कहा। शोएब अख्तर ने इतने साल बाद यह बात उठाई और सबको बताया कि मेरे साथ ज्यादती होती थी। ड्रेसिंग रूम में खाने-पीने के भेदभाव की जिस बात का जिक्र शोएब ने किया उसमें परहेज करने वालों से परहेज न करने वालों की संख्या ज्यादा थी। इसलिए इसका आभास बहुत ज्यादा नहीं होता था। मेरा खुद का स्वभाव रहा है कि मैं हमेशा नकारात्मक चीजों को जीवन मंे नहीं आने देता। जब-जब नकारात्मक चीजें आईं तो उनको दरकिनार किया और पीछे छोड़ दिया।
पाकिस्तान में कब-कब आपको महसूस हुआ कि अलग धर्म की वजह से क्रिकेट टीम से लेकर आम जीवन तक में परेशानी और चुनौती का सामना करना पड़ा ?
साल, 2010 में जब मेरे ऊपर मैच फिक्सिंग के आरोप लगे और जब सब तथ्य सामने होने के बाद भी मेरी मदद करने के लिए कोई सामने नहीं आया। इस दौरान किसी ने यह भी नहीं पूछा कि क्या चल रहा है जीवन में। इसे क्या समझा जाए? मैंने दस साल अपनी मेहनत के दम पर क्रिकेट खेली है। स्वास्थ्य तक को अनदेखा किया खेल के आगे। यह सब इसलिए किया ताकि किसी को कुछ कहने का मौका नहीं मिले और मेरे खेल पर रत्तीभर भी सवाल न उठने पाए। लेकिन फिर भी मेरे साथ भेदभाव किया गया। कुछ लोग मुझे फिक्सर बताते हैं। ऐसे लोग या तो अनजान हैं या तो जानबूझकर मेरे मामले को अनदेखा करते हैं। इन लोगों को एक बार मेरे मामले को पढ़ना चाहिए और जानना चाहिए कि मेरे ऊपर क्या आरोप लगे हैं। मैं ऐसे सभी लोगों को बताना चाहता हूं कि मेरे ऊपर जो आरोप लगे थे उसमें से प्रमुख आरोप यह था कि मैंने अपने साथी खिलाडि़यों को उकसाया था। इससे टीम में उलझन पैदा हुई। इस गलती को मैंने स्वीकार भी किया। मैं इंसान हूं और इंसान से ही गलती होती है। लेकिन यहां तो लोगों ने अपने मुल्क तक को बेचा। पैसे खाए और जेल तक गए। लेकिन मैंने कभी अपने मुल्क के बारे में ऐसा सोचा तक नहीं। पैसे खाना तो दूर की बात है। लेकिन इस सबके बावजूद मुझे दरकिनार कर उन लोगों को टीम में स्वागत और सम्मान दिया गया, जिनके हाथ काले हैं। इन लोगों को बड़े-बड़े ओहदों तक से नवाजा गया। इसके अलावा जिन लोगों के नाम फिक्सिंग से जुड़े थे उन लोगों को क्रिकेट बोर्ड से लेकर टीवी चैनलों मंे बड़े सम्मान के साथ पेश किया गया। जबकि मेरे मामले में सभी तथ्यों को तोड़मरोड़ कर पेश किया गया। गलत बातें की गईं। जब सही बातें बतानी चाहिए थीं तब चीजें छिपा ली गईं। लेकिन फिर भी सब जानने के बाद मेरे मामले को बिगाड़ा गया, मुझे गिराने का काम किया गया। मैं इस मसले में ऐसे लोगों से सिर्फ एक बात कहना चाहता हूं कि वह सच को जानें। मैंने अपने मसले को बोर्ड से लेकर आवाम, क्रिकेट से जुड़े लोगों तक से मदद मांगी लेकिन मुझे कहीं से कोई मदद नहीं मिली। मैं दस साल से बेरोजगार हूं। यह कौन देखेगा? मेरी स्थिति किसी को दिखाई क्यों नहीं दे रही है?
यानी एक साजिश के तहत अलग धर्म होने की वजह से आपके करियर में रोड़े खड़े किए गए ?
इस पर मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि कई प्रमुख कारणों मे से धर्म भी एक बिंदु है। कई लोगों को मेरी सफलता से अपना करियर डूबने का डर था। ऐसे में मेरे करियर में रोड़े खड़े किए जाना स्वाभाविक था।
आप पाकिस्तान के लिए अच्छा खेलते रहे। शोएब अख्तर ने इस बात को स्वीकार भी किया है। लेकिन बावजूद इसके आप को लक्षित किया जाता रहा है। वे कौन लोग थे, जो आप को क्रिकेट खेलते देखना पसंद नहीं करते थे ?
कई ऐसे लोग हंै जो मेरे धर्म के लोगों से सख्त नफरत करते हैं। टीवी और अन्य मीडिया प्लेटफार्म पर उनके साक्षात्कार उपलब्ध हैं जिसमें उन्हें खुलेआम बोलते सुना जा सकता है। इसलिए मुझे किसी का नाम लेने की जरूरत नहीं है। दूसरी बात, ऐसे लोग आज भी मुझे 'टारगेट' करने में नहीं हिचक रहे। वे मुझ पर आरोप लगा रहे हैं कि मैंने सस्ती शोहरत पाने के लिए लोगों के सामने आकर भेदभाव की बात की। मैं ऐसे सभी लोगों को बता देना चाहता हूं कि मैंने इस विषय की शुरुआत नहीं की है। यह बात खुद शोएब अख्तर ने एक राष्ट्रीय चैनल पर आकर कही है। मैंने जीवन में काफी कुछ झेला है, लेकिन मैंने उसे कभी भी अपने खेल पर भारी नहीं पड़ने दिया। मेरे लिए मेरा खेल सबसे ऊपर रहा और उस पर ही ध्यान केंद्रित किया। आज जो आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं वे मुझसे क्या चाहते हैं! मैं दस साल से खाली बैठा हूं। चैनल आदि से जो कुछ काम मिलता था, वह भी छीन लिया। यहां तक कि जिस चैनल के लिए मैंने काम किया, उसका भी भुगतान नहीं किया गया है।
आपको पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड, अपने साथी खिलाडि़यों से उम्मीद है कि वे इस मामले में आपके न्याय के लिए लड़ेंगे ?
देखिए, समय-समय पर कई पाकिस्तानी खिलाड़ी मेरी स्थिति को लेकर बोले हंै। पर आज के समय अगर कोई मेरे साथ खड़ा होता है, मदद करता है तो यह मेरा नसीब होगा। मैं ऐसे लोगों का अहसानमंद रहूंगा।
इमरान खान खुद बड़े क्रिकेट खिलाड़ी और पाकिस्तान के कप्तान रहे। वर्तमान में वह देश के प्रधानमंत्री हैं। अपने मसले में आप उनसे क्या उम्मीद रखते हैं ?
मैं इमरान खान साहब से यही उम्मीद करता हूं कि वह पद का सदुपयोग करते हुए मेरे मसले को देखें और मुझे सम्मान के साथ वापस लाएं। वह अपने व्यवहार से दुनिया को दिखाएं कि पाकिस्तान हिन्दुओं से भेदभाव नहीं करता। यकीनन यह उनके लिए अच्छा मौका है अपने आपको साबित करने का। और मुझे उम्म्मीद है कि वह ऐसा करेंगे और मेरा खोया सम्मान वापस दिलाएंगे।

जिस समय आप पाक क्रिकेट टीम का हिस्सा थे, उस समय कई बार ऐसी भी खबरें आईं कि आप पर इस्लाम कबूल करने का दबाव डाला गया। कितनी सचाई है इस बात में ?
मै एक धार्मिक व्यक्ति हूं और हमेशा अपने धार्मिक स्थलों के प्रति सम्मान व्यक्त करता हूं। मंदिर जाने से लेकर पूजा-आराधना करना मेरे स्वभाव का अंग है। मैं अन्य मत-पंथों के प्रति भी इतना ही आदर और सम्मान रखता हूं। देखिए, प्रत्येक व्यक्ति का अपना एक स्वभाव होता है। मेरा दृढ़ निश्चयी व्यक्तित्व होने की वजह से मेरे सामने कोई मजहब बदलने की बात करने की हिम्मत नहीं कर पाया। मेरा धर्म मुझे अच्छा जीवन जीने की प्रेरणा देता है। दूसरी बात, पाकिस्तान के आवाम ने, क्रिकेट प्रेमियों ने मुुझे हिन्दू होने के कारण कभी भी अलग ढंग से नहीं देखा। उन्होंने मुझे पूरा सम्मान दिया। इस सबके लिए मैं उनका आभार व्यक्त करना कभी नहीं भूलता।