क्या जेएनयू में होने वाले प्रदर्शन के सूत्रधार वहीं के वामपंथी शिक्षक हैं ?
    दिनांक 16-जनवरी-2020
गत पांच जनवरी को जेएनयू में नाकाब लगाए वामपंथी गुंडों ने छात्रों और शिक्षकों के साथ मारपीट की थी। आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर चल रहा है। मीडिया जेएनयू में सक्रिय है। रोज नए नए खुलासे हो रहे हैं। आज एक राष्ट्रीय अखबार ने भी ऐसा ही एक खुलासा किया है। अखबार में छपी एक खबर के अनुसार जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में वामपंथी शिक्षक छात्रों पर दबाव बनाकर उन्हें प्रदर्शन के लिए उकसाते हैं

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शिक्षक का काम होता है उसकी प्रतिभा को पहचान कर छात्र को दिशा देना, लेकिन जब वही शिक्षक छात्रों पर दबाव बनाकर उसे प्रदर्शन करने को कहे, यदि छात्र मना करे तो उसे परीक्षा में कम अंक देने की धमकी दे तो ऐसे शिक्षक से क्या अपेक्षा की जा सकती है। यह हम नहीं कर रहे हैं बल्कि जेएनयू में पढ़ने वाले छात्र कह रहे हैं। जेएनयू विश्वविद्यालय, जहां देश विरोधी नारे लगते हैं, हर छोटी पर बात पर प्रदर्शन किए जाते हैं, सरकार को कोसा जाता है और मीडिया उसे ऐसे कवर करता है मानो देश में आपातकाल की स्थिति हो।
गत पांच जनवरी को जेएनयू में नाकाब लगाए वामपंथी गुंडों ने छात्रों और शिक्षकों के साथ मारपीट की थी। आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर चला। तभी से मीडिया जेएनयू में सक्रिय है। रोज नए नए खुलासे हो रहे हैं। इतना ही नहीं एक राष्ट्रीय चैनल वहां स्टिंग भी करता है और उसे अपने प्राइम टाइम में दिखाता है।
आज एक राष्ट्रीय अखबार ने भी ऐसा ही एक खुलासा किया है। अखबार में छपी एक खबर के अनुसार जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में वामपंथी शिक्षकों का एक ऐसा गुट सक्रिय है जो छात्रों पर दबाव बनाकर उन्हें टूल की तरह प्रयोग करता है और उनसे प्रदर्शन करवाता है।
अखबार में लिखी खबर के अनुसार जेएनयू के मावी मांडवी छात्रावास में रहने वाले छात्र सूरज कुमार पर पांच जनवरी की शाम को 30 से अधिक उपद्रवियों ने हॉस्टल में घुसकर हमला किया था। इस दौरान उसने किसी तरह छुपकर अपनी जान बचाई थी। सूरज का आरोप है कि उसने परीक्षाएं रोकने के विरोध में कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी, जिसके विरोध में वामपंथी संगठन के छात्रों ने उसे पीटने के लिए छात्रावास आए थे। उसे पीटने के लिए दाखिल हुई भीड़ उसके कमरे के बाहर चिल्ला रही थी कि यही है संघी का कमरा। सूरज विवि में सेंटर फॉर कोरियन स्‍टडी के तीसरे वर्ष केे हैं छात्र हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्कॉलरशिप के लिए आवेदन किया है जिसमें उन्हें 31 जनवरी तक अपना परीक्षा परिणाम जमा करना है। लेकिन पिछले 80 दिनों से विवि में काम बाधित है, जिसके लिए उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट से मामले में दखल देने की अपील की थी।
याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्वयं हस्तक्षेप से इंकार करते हुए जेएनयू वीसी से जल्द गतिरोध दूर करने के लिए कहा था। इसी बात को लेकर जेएनयू में प्रोफेसर आयशा किदवई लगातार सोशल मीडिया पर उसे टारगेट कर रही थी। उन्होंने इसको लेकर फेसबुक पर कई पोस्ट भी किए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार जब कैंपस में छात्रों से बात की गई पता चला कि छात्र बेहतर परीक्षा परिणामों के लिए ऐसे प्रदर्शनों में शामिल हो रहे हैं। क्योंकि, जेएनयू में होने वाली परीक्षाओं में प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन जेएनयू के प्रोफेसर ही करते हैं। जेएनयू में ही पढ़ने वाले छात्र शिवम चौरसिया ने बताया कि कई छात्र-छात्राएं प्रदर्शनों में इसलिए शामिल हो जाते हैं कि उन्हे परीक्षा में बेहतर अंक मिल सकें। छात्रों के आरोपों से सहमति जताते हुए संस्कृत विभाग के प्रोफेसर हरीराम मिश्रा ने कहा कि स्वमूल्यांकन की पद्धति को अब बदलना चाहिए। जेएनयू के छात्रों की भी उत्तर पुस्तिकाएं बाहरी प्रोफेसर के द्वारा मूल्यांकन की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि टीचर्स एसोसिएशन छात्रसंघ के पिछलग्गू की तरह काम कर रहा है। कुछ छात्रों की महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए अन्य छात्रों को प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते हैं।