राहुल गांधी पर टिप्पणी की तो मुम्बई विवि के प्रोफेसर को जबरन छुट्टी पर भेजा गया
   दिनांक 16-जनवरी-2020
मुंबई यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर योगेश सोमन को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर फेसबुक पोस्ट करने की वजह से विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया है

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भारत में ऐसे पत्रकार और एक्टिविस्ट की लम्बी श्रृंखला है जिन्होंने भाजपा के खिलाफ आजीवन लिखने पढ़ने का मानो संकल्प लिया हो और समाज में उनकी पहचान निष्पक्ष बुद्धिजीवी की बनी। धीरे—धीरे ऐसे लोगों की समाज में पहचान आसान हो रही है। ऐसा इसलिए कह पाता हूं क्योंकि इनका सारा एक्टिविज्म भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए है। एक बार भाजपा को हटाकर इनकी मन मुताबिक पार्टी सत्ता में आ गई फिर ये ‘सुपारी एक्टिविस्ट—बुद्धिजीवी’ की तरह पुन: उन राज्यों में असहिष्णुता की मिसाल तलाशने में ध्यान लगाना प्रारम्भ कर देते हैं, जहां भाजपा सत्ता में है। इन एक्टिविस्ट—बुद्धिजीवियों के लिए छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान में जैसे इन दिनों सुशासन आ गया है।

महाराष्ट्र में ‘सुशासन’
सुशासन से याद आया, पिछले कुछ समय से महाराष्ट्र में भी सुशासन आया हुआ है, इसी का परिणाम है कि मुंबई यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर योगेश सोमन को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर फेसबुक पोस्ट करने की वजह से विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया है। प्रोफेसर ने राहुल के बयान पर वीडियो ब्लॉग भी लिखा था, जिसमें से कुछ शब्दों को आपत्तिजनक माना गया। इस पूरे मामले पर देश भर के निष्पक्ष कहे जाने वाले साहित्यकार, बुद्धीजीवी वर्ग में घोर शांति है।
दरअसल पिछले साल 13 दिसंबर को एक रैली में राहुल गांधी ने कहा था कि वे राहुल सावरकर नहीं राहुल गांधी हैं। राहुल गांधी के इस बयान की काफी आलोचना हुई थी। उन्होंने 'मेक इन इंडिया' को 'रेप इन इंडिया' भी इसी भाषण में कहा था।
क्या है पूरा मामला
सावरकर वाले राहुल के बयान को केन्द्र में रखकर मुंबई यूनिवर्सिटी में अकेडमी ऑफ थिएटर आर्ट्स के निदेशक सोमन ने फेसबुक और ट्विटर पर 14 दिसंबर को 51 सेकंड का वीडियो पोस्ट किया था जिसमें उन्होंने राहुल गांधी के लिए कहा है कि ''आप वास्तव में सावरकर नहीं हो, सच तो यह है कि आप आप सच्चे गांधी भी नही हो, आपके पास कोई वैल्यू नही है। यह कहते हुए गांधी के पप्पूगिरी का विरोध करता हूं।''
शिवसेना की चुप्पी
जैसा कि हम जानते हैं कि महाराष्ट्र के समाज में सावरकर के नाम के साथ वीर जुड़ता है और कोई समाज अपने पुरखे को सम्मान से वीर पुकारता है तो यह समझना आसान है कि उस समाज में सम्मान पाने वाले 'वीर' का स्थान क्या होगा? राहुल के बयान से महाराष्ट्र के बहुसंख्यक आबादी के खून में उबाल आना ही था। उसी बहुसंख्यक आबादी का प्रतिनिधि स्वर बनकर प्रोफेसर योगेश सोमन की सोशल मीडिया टिप्पणी सामने आई। आश्चर्यजनक यह है कि शिवसेना इस पूरे मामले पर चुप कैसे है?
मध्य प्रदेश में भी हुआ था विवाद
मध्य प्रदेश में कांग्रेस सेवादल की ओर 'वीर सावरकर कितने वीर' नाम से एक किताब बांटी गई थी। इस किताब पर उस समय काफी विवाद हुआ था। भोपाल में सेवा दल द्वारा आयोजित किए गए 10 दिवसीय ट्रेनिंग कैंप में इसे बांटा गया था। इस किताब में महात्मा गांधी की हत्या का जिक्र था। नाथूराम गोडसे और वीर सावरकर का जिक्र था। किताब में बेहद आपत्तिजनक बातें लिखीं थीं बावजूद इसके बाला साहब ठाकरे के वंशजों ने इस पर बेशर्म चुप्पी ओढ़ ली और कांग्रेस के साथ अपना गठबंधन जारी रखा।
सावरकर पर बोले थे देवेन्द्र
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विनायक दामोदर सावरकर पर कांग्रेस द्वारा बंटवाई गई विवादित पुस्तिका पर शिवसेना पर निशाना साधते हुए कहा था कि आखिर मैं देखना चाहता हूं कि शिवसेना वीर सावरकर के अपमान पर कब तक चुप रहती है? आज ऐसी उम्मीद तो नहीं की जा सकती लेकिन आशा है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे इस किताब को प्रतिबंधित करने की तत्काल घोषणा करें। पुस्तिका में एक देशभक्त के तौर पर विनायक दामोदर सावरकर की साख पर सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस ने ऐसी किताब बांटकर अपनी दुष्ट मानसिकता का ही परिचय दिया है, जो उसके बौद्धिक दिवालिएपन को दिखाती है। आदरणीय हिंदू हृदय सम्राट शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे आज अगर हमारे बीच होते तो वह अपने चिरपरिचित अंदाज में इस पुस्तिका पर सबसे पहले प्रतिक्रिया देते।
निष्पक्ष बुद्धीजीवियों की भूमिका, अब हम भी देखेंगे
अब देखना महत्वपूर्ण है कि मोदी के विरोध में खड़े कितने कथित निष्पक्ष लेखक, पत्रकार, बुद्धीजीवी, कवि इस संबंध में सामने आते हैं और प्रोफेसर योगेश सोमन के साथ खड़े होते हैं। उनका विश्वविद्यालय से निष्कासन किसी भी प्रकार से न्यायोचित नहीं कहा जा सकता।