केजरीवाल सरकार ने नौकरी के नाम पर करोड़ों खर्च किए और नौकरी मिली सिर्फ 344 को
   दिनांक 18-जनवरी-2020
आप सरकार के कार्यकाल में रोजगार विभाग ने 21.53 करोड़ रुपए खर्च किए। राजधानी के पांच रोजगार कार्यालयों में कुल 2.87 लाख नागरिकों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से आठ हजार नाम नियोक्ताओं को भेजे गए। उनसे से नौकरी मिली महज 344 को

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दिल्ली में चुनावों की घोषणा  हो चुकी है, साथ ही शुरू हो गया है चुनावी वायदों का दौर. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल फिर से नए वायदों और दावों के साथ चुनाव लड़ रहे हैं। यदि केजरीवाल के वादों की बात करें तो वो सिर्फ वायदे ही करते हैं, पिछले चुनावों में 67 सीटें जीतने वाले केजरीवाल ने ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित करने का वादा किया था, जो पूरा नहीं हुआ, अब इस खबर पर गौर करिए, 2018 में जब दिल्ली सरकार से युवाओं को नौकरी देने के बारे में पूछा गया तो दिल्ली सरकार के रोजगार मंत्रालय सेे मांगी गई जानकारी पर सरकार की ओर से लिखित जानकारी दी गई थी, सरकार की ओर से बताया गया था कि 2015 में 176, 2016 में 102 और 2017 में मात्र 76 लोगों को नौकरी दी गई है, जबकि इसके लिए सरकार से करोड़ों रुपए खर्च किए गए। आप सरकार के कार्यकाल में रोजगार विभाग ने 21.53 करोड़ रुपए खर्च किए। राजधानी के पांच रोजगार कार्यालयों में कुल 2.87 लाख नागरिकों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से आठ हजार नाम नियोक्ताओं को भेजे गए। उनसे से नौकरी मिली महज 344 को।
जिन 344 लोगों को नौकरी मिली उनमें से 177 को कंडक्टर, वॉटरमैन और टेम्पररी वॉटरमैन पद पर नियुक्त किया गया। दिल्ली सरकार ने रोजगार विभाग द्वारा 2015 से 2018 तक 7 रोजगार मेले आयोजित किए गए। इनमें 357 कंपनियां आईं। कंपनियों ने 78 हजार आवेदकों में से 30 हजार 680 को शॉट लिस्ट किया, मगर कितनों को नौकरी मिली, इसका जवाब विभाग के पास नहीं है, सरकार ने इन मेलों के आयोजन पर 33.11 लाख रुपए भी खर्च किए।