पीओके में लोग लगा रहे नारे 'मिटटी चोरो -पत्थर चोरो' अब हमारा पीछा छोड़ो
   दिनांक 02-जनवरी-2020
लोग यहां नारे लगा रहे हैं कि “ मिटटी चोरों -पत्थर चोरों, अब हमारा पीछा छोड़ो.” और इमरान कह रहे हैं कि “मोदी हमला करने वाला है..”

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“मोदी आज़ाद कश्मीर (पीओजेके, पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर” में कोई बड़ी गड़बड़ करने जा रहा है” इमरान खान आजकल अक्सर ये कहते घूम रहे हैं. आखिर वो ऐसा क्यों कह रहे हैं? इसके पीछे एक योजना है, और पाक फ़ौज ने इमरान से से कहा है कि वो ऐसा कहते रहें.
“कश्मीर हमारी शह रग है..” पाकिस्तान के फौजी जनरल और उनके वजन के नीचे सहमे पाकिस्तान के “वजीर ए आज़म” अक्सर ये कहते रहते हैं. कश्मीर का बड़ा हिस्सा सन 47-48 से पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है. वो इसे “आज़ाद कश्मीर” कहते आए हैं. ऐसा कहने के पीछे एक बड़ा कपट है. पाकिस्तान कश्मीर में जिहादी भेजकर जो उत्पात करवाता रहा, और उसे कश्मीर की “आज़ादी की जद्दोजहद” बतलाता रहा.
ऐसे में यदि उसके कब्जे वाले कश्मीर को वो आधिकारिक रूप से अपना पांचवा राज्य घोषित कर देता तो कश्मीर को लेकर भारत के खिलाफ उसका दुष्प्रचार कमज़ोर पड़ जाता. अब ख़बरें बन रही हैं कि पाक फ़ौज के आज्ञाकारी इमरान खान नियाज़ी इस कथित “आज़ादी” को भी ख़त्म करने जा रहे हैं. फ़ौज इस पर गंभीर है. पिछले दो-तीन सालों से इस आशय की ख़बरें पाकिस्तान में छप रही हैं. हाल ही में “आज़ाद कश्मीर” के वजीर ए आज़म सरदार मसूद खान ने बयान दिया कि वो “आज़ाद कश्मीर” के आख़िरी प्रधानमंत्री हो सकते हैं.
“यहां के लोग सिर्फ गुलाम हैं....”
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर को पाकिस्तान ने दो हिस्सों में बांटा है – आज़ाद कश्मीर और गिलगित बाल्टिस्तान.पाकिस्तान इसे “स्वशासित” कहता है. कहने को यहां पर स्थानीय सरकार और इसका अपना सर्वोच्च न्यायालय भी है, लेकिन ये सब इस्लामाबाद और रावलपिंडी के पिट्ठू हैं. 1948 के बाद से ही पाकिस्तान ने यहां पर पाकिस्तानियों को बसाकर इसे सदा के लिए अपने कब्जे में रखने का षडयंत्र किया. इसलिए इस ठेठ कश्मीरी क्षेत्र में अब पंजाबी, पश्तो और उर्दू प्रमुखता से बोली जाने वाली भाषाएं बन गई हैं.
निर्वासन में रह रहे यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष सरदार शौकत अली कश्मीरी कहते हैं कि 'पाकिस्तान उसके कब्जे वाले कश्मीर को आजाद कश्मीर कहता है, लेकिन यहां के लोग सिर्फ गुलाम हैं. कहने को पाकिस्तान ने इस इलाके को कुछ स्वायत्तता दे कर स्थानीय सरकार का गठन किया है, लेकिन ये सिर्फ दिखावा है. हमारी किस्मतों का फैसला हम पर इस्लामाबाद द्वारा थोपे गए चार गैर कश्मीरी अफसर,आईजी पुलिस, चीफ सेक्रेटरी, फाइनेंस सेक्रेटरी और अकाउंटेंट जनरल करते हैं. हमारे पास पढ़े लिखे लोग हैं, लेकिन हम पर शासन करने वाला अधिकारी हमेशा बाहर से आता है. आईएसआई और फ़ौज के लोग इस जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने वालों का अपहरण कर रहे हैं. उन्हें यातनाएं दे रहे हैं. और चुन-चुन कर उनकी हत्याएं कर रहे हैं.'
लूट-खसोट की खबर संयुक्त राष्ट्र तक
यहाँ का आल पार्टीज नेशनल अलायन्स बार-बार सामूहिक रैली कर के पाकिस्तान के कब्ज़े के खिलाफ आवाज़ उठा रहा है. संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद की 27वीं जिनेवा बैठक में भी यहाँ के निर्वासित नेता पहुंचे और पाक अधिकृत जम्मू- कश्मीर को इस्लामाबाद द्वारा शासित 'कब्जाया गया क्षेत्र' कहा. पाकिस्तान द्वारा गिलगित-बाल्टिस्तान को चीन को 'बेच दिए जाने' के खिलाफ भी लोगों में खासा गुस्सा है. दि इंस्टिट्यूट फॉर गिलगित-बाल्टिस्तान स्टडीज के अध्यक्ष सेंजे एच.सेरेंग कहते हैं कि "चीन, ईरान और किर्गिस्तान से गैस-तेल मार्ग बना रहा है, जो गिलगित-बाल्टिस्तान से हो कर गुजरेगा.
चीन और पाकिस्तान यहां मिल कर यूरेनियम, सोना, ताम्बा, संगमरमर और रत्नों का खनन कर रहे हैं, लेकिन यहां के लोगों की इस पैसे में कोई हिस्सेदारी नहीं है. चीन यहाँ राजमार्ग, बाँध और सुरंगें बना रहा है. आज चीन और पाकिस्तान के साझे हित हैं. चीन संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के लिए बहुत महत्व रखता है. क्योंकि पाकिस्तान अपनी आर्थिक और सैन्य असफलताओं, भयानक होने अलगाववाद और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ने के भय से परेशान है. वहीँ चीन पाकिस्तान का लाभ उठा कर उसे अपना मुहरा बना रहा है." इलाके में पाकिस्तान और चीन द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही इस लूट-खसोट से यहाँ के लोगों का गुस्सा भड़का हुआ है. एनएसएफ नामक संगठन चीन और पाकिस्तान द्वारा इस क्षेत्र के प्राकृतिक खजाने की लूट का विरोध कर रहा है. पुलिस और प्रशासन बर्बर दमन कर रहे हैं, लेकिन फिर भी नारे लग रहे हैं- 'मिटटी चोरों- पत्थर चोरों, अब हमारा पीछा छोड़ो.'
इलेक्शन के नाम पर सिलेक्शन
पाकिस्तान द्वारा यहां की बेशकीमती प्राकृतिक सम्पदा का भरपूर शोषण किया जा रहा है लेकिन तीन चौथाई स्थानीय लोग गरीबी रेखा के नीचे रह रहे हैं और उनकी आवाज उठाने के लिए कोई अधिकृत प्रामाणिक नेतृत्व नहीं है. आईएसआई और दूसरी ख़ुफ़िया पाकिस्तानी सेनाएं चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली करवाती हैं. और यहाँ की कुर्सियों पर अपने पिट्ठू बिठाती हैं.
बल्वारिस्तान नेशनल फ्रंट के अध्यक्ष अब्दुल हामिद खान कहते हैं -"यहां दुनिया को दिखाने के लिए चुनावों का तमाशा होता है। लोग किसी को भी वोट दें, जीतने वाले पहले से तय होते हैं। इस्लामाबाद में जिस पार्टी की सरकार होती है, वो अपने लोगों के नाम पहले तय कर देते है. बाद में उन्हें ही विजयी घोषित कर दिया जाता है. यहां इलेक्शन के नाम पर सिलेक्शन होता है."
“चुनाव करवा लो, पता चल जाएगा...”
वो आगे कहते हैं "पाकिस्तानी फ़ौज और उसकी 22 ख़ुफ़िया एजेंसियां यहां मौजूद हैं. चुनाव के पहले हमारे उम्मीदवारों का अपहरण कर लिया जाता है. बोलने की आज़ादी नहीं है, न्याय की आज़ादी नहीं है. ये कैसा आज़ाद कश्मीर है? आप आत्म निर्णय करवाइये, पता चल जाएगा कि कितने लोग पाकिस्तान के साथ हैं और कितने हमारे साथ." इस इलाके को लेकर चीन और पाकिस्तान की सांठ-गांठ को ले कर अब्दुल कहते हैं कि-
" गिलगित-बाल्टिस्तान को ले कर पाकिस्तान ने जो समझौता किया है, वह वास्तव में ख़ुफ़िया सेल एग्रीमेंट है. जिन लोगों ने इसका विरोध किया और मामले को संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षकों तक ले जाने का प्रयास किया, उन्हें जेल में डालकर राज द्रोह की धाराएं लगायी गई हैं. राजद्रोह का क़ानून देश के नागरिकों के लिए होता है, हम पाकिस्तान के नागरिक नहीं हैं."
अत्याचार कर रहे हैं खौफज़दा पाकिस्तानी
विद्रोह की आशंकाओं से भयभीत पाकिस्तानी इस्टैब्लिशमेंट ने इस क्षेत्र को “आज़ाद कश्मीर” और गिलगित-बाल्टिस्तान में बांट कर रखा है. इतने सालों बाद भी गिलगित-बाल्टिस्तान और तथाकथित आज़ाद कश्मीर के बीच सड़क बनाने की अनुमति नहीं दी गयी है, ताकि किसी प्रकार का संगठित विरोध संभव न हो सके. जो कश्मीरी गिलगित-बाल्टिस्तान जाने की कोशिश करते हैं, उन्हें मारा पीटा जाता है और जेलों में ठूंस दिया जाता है।
सईद हसद नाम के एक प्रकाशक को 'आज़ाद कश्मीर' और गिलगित-बाल्टिस्तान का संयुक्त नक्शा छापने के जुर्म में अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा. चुनावों में धांधली का विरोध करने वाले बाबा जान और उनके साथियों को 40 साल के लिए जेल में फेंक दिया गया है. किसी भी सरकारी नौकरी में जाने से पहले लोगों को कश्मीर पर पाकिस्तान कब्जे को स्वीकार करने की शपथ लेनी पड़ती है. प्रकाशकों और अखबार मालिकों को भी ऐसा करना पड़ता है. कई पत्रकारों की हत्या हो चुकी है. जिन लोगों को मारकर अधिकारी स्वयं विवाद में नहीं पड़ना चाहते उन्हें आतंकियों के हाथों सौंप देते हैं.
दोगली पाक फौज ने मरने के लिए छोड़ा
ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार जब इस इलाके में भूकंप आया तो पाकिस्तान की फ़ौज का असली चेहरा सामने आया। मुजफ्फराबाद के एक स्थानीय निवासी ने कहा -"पाकिस्तान कहता है कि वो हमारा दोस्त है और भारत हमारा दुश्मन, लेकिन पाकिस्तान जैसे दोस्त के बाद दुश्मन की जरूरत किसे है"
रिपोर्ट आगे कहती है कि भयंकर भूचाल के कारण आज़ाद कश्मीर के बड़े शहर और हजारों गाँव धूल में मिल गए थे. 8000 लोग मारे गए और 20 लाख लोग बेघर हो गए. लेकिन बचाव कार्यों के लिए आई पाकिस्तानी सेना केवल यहाँ फंसे हुए फौजियों की मदद कर रही थी. अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने मदद मांगते स्थानीय जनों को दुत्कारते पाकिस्तानी फौजियों को फिल्माया कि 'उन्हें ऐसा करने के आदेश नहीं हैं.'
“कौन मूर्ख इसे आज़ाद कश्मीर कहता है ?...”
इन खबरों ने दुनिया के सामने ये साफ़ किया कि पाकिस्तान की इस कॉलोनी में फ़ौज केवल विद्रोह के दमन और नियंत्रण लिए तैनात है. साल 2006 की मानव अधिकार रिपोर्ट के अनुसार "आज़ाद कश्मीर के एक नेता' सैय्यद रज़ाक ने लिखा कि पाकिस्तान ने इस इलाके को अफगान-तालिबान जैसे आतंकियों की छावनियों में बदल दिया है. मुझे अब उन लोगों पर दया आती है, जिनका ब्रेन वॉश करके ये सोचने पर मजबूर किया गया है कि 'एक देश' उनका दुश्मन है. हर तरफ पहरा है. किसी के विचार की कोई कीमत नहीं है. पता नहीं कौन मूर्ख इसे आज़ाद कश्मीर कहता है." पूरे इलाके में पाकिस्तानी कब्जे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. पाक अर्धसैनिक बलों, पुलिस और फ़ौज की क्रूरताएं भी इस बगावत को दबा नहीं पा रही हैं. आईएसआई के लोग चुन-चुनकर हत्याएं करवा रहे हैं. ज्यादा हलचल बढ़ी तो इस इलाके की तरफ विश्व मीडिया का ध्यान आकर्षित होगा जिससे पाकिस्तान को इस इलाके में जिहादी आतंकी शिविर चलाने में भी दिक्कतें पेश आएंगी.
बगावत की इन हवाओं से थर्राए पाकिस्तानी फौजी जनरल अब इस इलाके को अधिकृत रूप से पाकिस्तान का हिस्सा बनाने की योजना बना रहे हैं. भारतीय में जम्मू कश्मीर से धारा 370 हट जाने के बाद उनकी बेचैनी और बढ़ गई है, और उन्हें पीओजेके हाथ से फिसलता नज़र आ रहा है. इसीलिए इमरान खान से बयान दिलवाए जा रहे हैं कि “मोदी आज़ाद कश्मीर पर हमला करने वाला है..” ताकि इस दुष्प्रचार की आड़ “आज़ाद कश्मीर” यानी पीओजेके की सुरक्षा का हवाला देकर उसे कानूनी रूप से हड़पा जा सके.