ममता ने बनाया बंगाल को जिहाद की फैक्ट्री
   दिनांक 21-जनवरी-2020
2019 में ममता ने खुलेआम अपनी मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति को स्वीकार किया और कहा, मैं मुस्लिम तुष्टीकरण करती हूं. मैं सौ बार रोजा इफ्तार में जाऊंगी. जो गाय दूध देती है, उसकी लात भी सहनी पड़ती है.

mamata _1  H x
“(जालीदार) टोपी और लुंगी पहनकर भाजपा कार्यकर्ता हिंसा और तोड़फोड़ कर रहे हैं, ताकि एक समुदाय विशेष को बदनाम कर सकें” सड़कों पर सब ओर लगे टीवी कैमरों और ड्रोन कैमरों के ज़माने में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने ये हास्यास्पद बयान दिया है. बात कुल इतनी है कि ममता की तुष्टिकरण की नीतियों के कारण बंगाल में कट्टरपंथी मुस्लिमों की नेतागिरी और तृणमूल पार्टी की छत्रछाया में बंग्लादेशी घुसपैठिये सब ओर उत्पात मचा रहे हैं. सड़कों पर पत्थरबाजी, सरकारी संपत्ति की तोड़फोड़ और बसों-ट्रेनों को आग के हवाले करने के उनके वीडियो देश भर में वायरल हो रहे हैं. बंगाल के लोग ये सब देखकर आतंकित हैं और ममता सरकार पर उंगली उठा रहे हैं. चुभते सवाल उछल रहे हैं, इसलिए ममता ने ये नया शिगूफा छोड़ा है कि ये हजारों-हजार उत्पाती दरअसल भाजपा कार्यकर्ता हैं.
यदि ये सच है तो ममता को ऐसे सौ-पचास भाजपा कार्यकर्ताओं को पकड़कर सबके सामने पेश करना चाहिए.जब सड़क पर कोई प्रदर्शन होता है तो प्रशासन उसकी वीडियोग्राफी करवाता है. इसलिए ममता को सबूत पेश करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए. लेकिन ममता ऐसा नहीं कर सकतीं, क्योंकि वो असत्य भाषण कर रही हैं.
आगे चलकर ममता बोल सकती हैं कि “जय श्रीराम” का नारा सुनकर लोगों को मारने दौड़ने वाली, उन्हें धमकाने वाली वास्तव में वो नहीं थीं, बल्कि उनका रूप धरे भाजपा कार्यकर्ता थे. इमामों और मुज्जिनों को वेतन देने का फैसला उनका वेश बदलकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया था. मुहर्रम जुलूस के लिए दुर्गा विसर्जन रोकने का फैसला भी उन्होंने नहीं बल्कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया था और अदालत ने इस हरकत के लिए उन्हें नहीं बल्कि भाजपा कार्यकर्ताओं को फटकार लगाई थी. वो भाजपा कार्यकर्ता थे जो ममता बैनर्जी का रूप रखकर, उनकी आवाज में मंचों पर चीख रहे थे कि “मैं एक भी बंगलादेशी को हाथ नहीं लगाने दूंगी... एनआरसी लागू नहीं करने दूँगी... सीबीआई को बंगाल में नहीं घुसने दूँगी”. उन्हें कहना चाहिए कि वो भी कोई भाजपा कार्यकर्ता ही था जिसने मुसलमानों की सभा में सीएए और एनआरसी के खिलाफ बोलते हुए विरोधियों को चूर-चूर करने की धमकी दी थी. उन्हें उकसाया था.
सर चढ़कर बोलता सच
ममता ने बंगाल को जिहाद की फैक्ट्री में तब्दील हो जाने दिया. बंग्लादेश में सक्रिय जिहादी आतंकी संगठनों ने पश्चिम बंगाल को अपना छिपने का ठिकाना बना लिया है. हूजी (हरकत उल जिहाद ए इस्लामी) का नाम तो सबका जाना पहचाना है ही, जेएमबी (जमात उल मुजाहिदीन बंग्लादेश) के जिहादी भी बंगाल के रास्ते सारे देश में घुसपैठ कर रहे हैं. चार माह पूर्व एनआईए के डायरेक्टर जनरल वाय सी मोदी ने बताया था कि बंग्लादेशी घुसपैठियों के साथ जेएमबी के आतंकी भी भारत में घुस रहे हैं, और साल 2014 से 2018 के बीच उन्होंने दक्षिण भारत तक अपने पैर पसार लिए हैं. केवल बंगलुरु में ही उनके 20 से अधिक ठिकाने इस दौरान तैयार हो गए हैं. लेकिन ममता बंग्लादेशी घुसपैठियों के सर पर अपना ममता भरा हाथ रखे हुए हैं. फलस्वरूप बंगाल में जहां-तहां बम बनाने वाले छोटे-छोटे कारखाने कुकुरमुत्ते की तरह उग आए हैं. जिनका पता तब चलता है जब बम बनाते हुए कोई जिहादी खुद ही उसकी चपेट में आ जाता है. 10 जनवरी को नईहटी में भयंकर विस्फोट हुआ, जिससे लोगों के घरों में दरारें पड गईं. धमाका इतना जबरदस्त था कि हुगली नदी के दोनों किनारे हिल उठे. ममता के प्रशासन ने बताया कि ये पटाखे बनाने की अवैध फैक्ट्री थी लेकिन विपक्ष ने आरोप लगाया कि इतना व्यापक और ताकतवर धमाका पटाखों से नहीं होता, वास्तव में यहाँ बम बनाए जा रहे थे. पर ममता की पुलिस ममता के कायदों से काम करने को मजबूर है. ऐसे मामलों में क़ानून काम तभी कर पाता है जब राष्ट्रीय जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल करें. जैसा कि खागडागढ़ बम धमाके के मामले में हुआ. अक्टूबर 2014 में जिहादी आतंकियों की बम बनाने की इस फैक्ट्री में हुए बम धमाके की जांच एनआईए ने की और अगस्त 2019 में एनआईए की विशेष अदालत ने 19 दोषियों को कठोर कारावास की सजा सुनाई. सभी दोषियों ने अपना अपराध स्वीकार किया. इन लोगों को देश के खिलाफ षडयंत्र और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने का दोषी पाया गया.
बंग्लादेशी घुसपैठ को ममता के राज में लगातार बढ़ावा दिया गया है. रोहिंग्याओं को बसाया जा रहा है. ममता के इस जिहादी उन्माद से बंगाल में भय व्याप्त हो रहा है. बंगाल में स्थिति इतनी विस्फोटक हो चुकी है कि यदि बंग्लादेश में किसी आतंकी या जमात ए इस्लामी बंग्लादेश के किसी युद्धअपराधी (1971 युद्ध के) को सजा होती है, तो कोलकाता की सड़कों पर उग्र प्रदर्शन और आगजनी होती है.
कोई लिहाज-संकोच नहीं....
 
bengal protest _1 &n
ममता बंगाल के हिंदुओं से सार्वजनिक रूप से कहती हैं कि कोई तुम्हारा मंदिर तोड़ दे तो झगड़ा मत करो, मेरे पास आओ मैं फिर से बनवा दूंगी, पर ये नहीं कहतीं कि कोई यदि मंदिर तोड़ेगा तो मैं उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करूंगी. ममता के राज में बंगाल में अनेक स्थानों पर सरस्वती और दुर्गा पूजा बंद हो गई है. ममता बंगाल के मुस्लिम कर्मचारियों को हर साल ईद बोनस देती हैं. पिछले साल इसे बढ़ाकर चार हजार रुपए प्रति कर्मचारी कर दिया गया, इतना ही नहीं आठ हजार रुपए का एडवांस भी जारी कर दिया. इतना ही नहीं मई 2019 में ममता ने खुलेआम अपनी मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति को स्वीकार किया और कहा “मैं मुस्लिम तुष्टीकरण करती हूँ , न? मैं सौ बार रोजा इफ्तार में जाऊँगी. जो गाय दूध देती है, उसकी लात भी सहनी पड़ती है” बंगाल से होकर बंग्लादेश में बड़े पैमाने पर भारतीय गायों की तस्करी हो रही है जिसका बड़ा हिस्सा आतंकी संगठनों की जेब में जाता है. बंगाल पुलिस आँखें मूँदे हुए है, और यदि कोई अफसर कुछ करने की कोशिश करता है तो उसे मुख्यमंत्री या उनके चेले आंखें दिखाते हैं.
ममता नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी को लेकर गलत बयानबाजी तो कर ही रही हैं, लोगों को क़ानून के उल्लंघन के लिए उकसा भी रही हैं. जिसका खामियाजा आखिरकार लोगों को ही भुगतना है.
बाड़ खेत खा गई....
ममता वामपंथियों की जिन बुराइयों के खिलाफ वादे करके सत्ता में आईं थीं, सत्ता में आने के बाद उन सभी को एक –एक करके अपने हथियार बनाते गईं. ममता के राज में बंगाल जिन कारणों से चर्चा में रहता है वो है तृणमूल के विरोधियों के खिलाफ व्यापक हिंसा, अंधा तुष्टीकरण, पंचायत चुनावों में धांधली-बाहुबल और हिंसा, एक के बाद एक घोटाले, और गली-गली में राज करता सिंडिकेट जो रेत-गिट्टी-सीमेंट से लेकर हर चीज में अपना गुंडा टैक्स वसूलता है. कम्युनिस्टों के सारे गुण ममता ने एक-एक करके अपना लिए और फिर उनकी तरह ही प्रोपेगेंडा मशीन को दिन रात चलाना शुरू कर दिया, जिसकी चालक सीट पर वो खुद ही बैठती हैं. इसीलिए वो पहले मुस्लिमों को नागरिकता संशोधन क़ानून के खिलाफ बरगलाती हैं, और फिर उनसे झूठा वादा करती हैं कि वो बंगाल में इसे लागू नहीं करेंगी. जबकि वो जानती हैं कि नागरिकता केंद्र सरकार का विषय है, और संसद द्वारा बनाने गए क़ानून को लागू करने से कोई राज्य सरकार इनकार नहीं कर सकती. ममता सारदा चिट फण्ड के आरोपी पुलिस अधिकारी से सीबीआई को पूछताछ करने से रोकने के लिए जी-जान लगा देती हैं. भ्रम और अराजकता का माहौल बनाने के लिए देश की सेना की नियमित गतिविधि को अपनी सत्ता उलटने का षडयंत्र बता देती हैं, और इस तरह सारी दुनिया में भारत और उसकी सेना पर झूठ का कीचड़ उछल देती हैं. वही ममता अब एक नया शिगूफा लेकर दुनिया के सामने आई हैं कि बंगाल में खुद के पाले-पोसे मज़हबी उन्माद को आड़ देने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं का नाम ले रही हैं. चुनाव निकट हैं, ममता बेचैन हैं.