हम न सही तो हमारी पत्नी विधायक सही
   दिनांक 21-जनवरी-2020
​दिल्ली चुनाव 2020: पहले फर्जी डिग्री वाले जितेंद्र सिंह तोमर को टिकट दिया गया। जब विरोध हुआ तो केजरीवाल ने उनकी पत्नी को ही विधायक का टिकट दे दिया

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जितेंद्र सिंह तोमर (फाइल फोटो)
बिहार में लालू यादव जब चारा घोटाले में फंसे तो उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था, इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी को मुख्यमंत्री बनवा दिया था। यानी सत्ता तो घर में ही रही फिर चाहे कुर्सी कोई भी संभाले। कुछ ऐसा ही दिल्ली में हुआ है। जहां फर्जी डिग्री में फंसे आम आदमी पार्टी के विधायक जितेंद्र सिंह तोमर की विधायकी दिल्ली हाईकोर्ट रद कर दी तो आम आदमी पार्टी ने तोमर को फिर से प्रत्याशी बना दिया। जब विरोध हुआ तो उनका टिकट काटकर उनकी पत्नी को दे दिया गया। ये तो वही बात हुई न हम न सही तो हमारी पत्नी विधायक सही। आखिर विधायकी तो घर में ही रहेगी न।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने त्रिनगर विधानसभा सीट से AAP उम्मीदवार जितेंद्र सिंह तोमर का टिकट काटकर उनकी पत्नी प्रीति तोमर को प्रत्याशी बनाया है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले दिनों फर्जी डिग्री के कारण जितेंद्र तोमर के 2015 के विधानसभा निर्वाचन को रद्द कर दिया था। इसके बावजूद आम आदमी पार्टी ने जितेंद्र तोमर को इस बार भी प्रत्याशी बनाया था। इसके खिलाफ सोमवार (जनवरी 20, 2019) को ही भाजपा चुनाव आयोग पहुंची थी। भाजपा की तरफ से चुनाव आयोग में दर्ज की गई यचिका में कहा गया था कि दिल्ली हाई कोर्ट ने जितेंद्र सिंह तोमर की डिग्री को फर्जी पाया था, लेकिन आम आदमी पार्टी ने फिर से त्रिनगर से जितेंद्र सिंह तोमर को उम्मीदवार बना दिया है। इस पर जब आम आदर्मी पार्टी छिछालेदर हुई तो फिर तोमर का टिकट काट दिया गया लेकिन टिकट दिया गया उनकी पत्नी को ही।
तोमर का काला चिट्ठा
फरवरी 2015 में जितेंद्र सिंह तोमर केजरीवाल सरकार में कानून मंत्री थे। इस बीच किसी ने उनकी डिग्री नकली होने की शिकायत कर दी। पुलिस ने जांच की और जून 2015 में उनको फर्जी डिग्री मामले में गिरफ्तार कर लिया। जांच में यह पाया गया कि तोमर ने विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से धोखाधड़ी की थी। साथ ही दिल्ली पुलिस की जांच में पाया गया था कि तोमर के कानून और बीएससी की डिग्री फर्जी थी। तोमर ने डिग्री पाने के लिए कोई परीक्षा नहीं दी थी। तोमर के साथ 16 अन्य लोग भी फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने में शामिल थे। अब मरते क्या न करते केजरीवाल को अपने चहेते तोमर को मंत्रीमंडल से तो हटाना पड़ा लेकिन प्रेम उनके प्रति केजरीवाल का प्रेम बरकरार रहा। तोमर 2013 में आप के टिकट पर त्रिनगर से चुनाव लड़े लेकिन 2800 वोट से हार गए। इसके बाद केजरीवाल ने फिर 2015 में उन्हें टिकट दिया इस बार वह 22 हजार वोटों से जीत गए। फिर तोमर को कानून मंत्री बनाया गया लेकिन जुलाई 2015 में उन्हें दिल्ली पुलिस ने फर्जी डिग्री मामले में गिरफ्तार कर लिया।