पांच सालों में एक लाख 29 हजार बच्चों ने छोड़े सरकारी स्कूल
   दिनांक 23-जनवरी-2020
अभिषेक रंजन
आम आदमी पार्टी के नेता हमेशा ये दावा करते हैं कि दिल्ली में जबसे उनकी सरकार बनी है, शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति आ गई है लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। जब से केजरीवाल सरकार बनी है दिल्ली के सरकारी स्कूलों से 1 लाख 29 हजार बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं

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दिल्ली के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री तो और चौंकाने वाले दावे करते है। 6 नवंबर, 2019 को शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने एक कार्यक्रम में कहा कि सरकारी स्कूलों में नामांकन लेने के लिए परिजन घूस भी देने के लिए तैयार है। वही 4 जनवरी, 2020 मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ये दावा किया कि बीते 5 साल में सरकारी स्कूलों में हुए बड़े बदलावों का ही असर है कि अब लोग अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों से निकालकर सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं।
लेकिन सचाई क्या यही है, जो बताई जा रही है ?
दिल्ली के इकॉनोमिक सर्वे (2018-19) की रिपोर्ट बताती है कि आप सरकार के तमाम दावों के बावजूद दिल्ली के सरकारी स्कूलों से बच्चे लगातार घट रहे हैं। वहीं प्राइवेट स्कूलों की संख्या में भारी कमी के बावजूद वहां पढ़ने वाले बच्चे तेजी से बढ़ रहे हैं।
रिपोर्ट कहती हैं कि अकादमिक सत्र 2013-14 से लेकर 2017-18 के बीच दिल्ली में सरकारी स्कूलों की संख्या में 27 का इजाफा हुआ लेकिन 129000 बच्चे घट गए। लेकिन इसी दौरान 558 प्राइवेट स्कूल बंद होने के बावजूद प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे 2013-14 के मुकाबले 2017-18 तक आते आते 2 लाख 64 हजार बढ़ गए।
2013-14 में दिल्ली में 992 सरकारी स्कूल थे, जहां 16.10 लाख बच्चे पढ़ते थे. दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग की वेबसाइट के आंकड़ों को देखे तो सत्र 2019-20 में सरकारी स्कूलों की संख्या 1030 होने के बावजूद बच्चों की संख्या घटकर 14.72 लाख पर पहुंच गई।
सवाल उठता है कि 5 साल में दिल्ली सरकार के स्कूलों में शिक्षा क्रांति हुई तो बच्चे घटते क्यों चले जा रहे है?
अभी हाल में आई शिक्षा क्षेत्र की मशहूर सर्वे ‘असर’ की रेपोर्ट की माने तो बच्चियों को सरकारी स्कूलों में, वही लड़कों को प्राइवेट में भेजने का चलन बढ़ा है।
लेकिन जब आप दिल्ली सरकार के स्कूलों को देखते है तो असर की रिपोर्ट से बिल्कुल विपरीत स्थिति बनती दिखाई देती है। दिल्ली के गरीब माँ-बाप अब अपनी बेटियों को भी सरकारी स्कूलों की वजाये प्राइवेट में भेजना पसंद कर रहे है।
इकॉनोमिक सर्वे की ही रिपोर्ट देखे तो बीते 4 वर्षों में ही सरकारी स्कूलों में बच्चियों के नामांकन में जहाँ 33 हजार की कमी आई, प्राइवेट में नामांकित बच्चियों की संख्या में लगभग सवा लाख का इजाफा हुआ।
यहाँ पर ये बात ध्यान में रखना जरुरी है कि दिल्ली सरकार के अधीन वाले सरकारी स्कूलों में नामांकन और कम रहते, अगर बड़ी संख्या में नर्सरी और प्राइमरी सेक्शन नही खोले जाते।
MCD चुनाव 2017 में मिली हार के बाद आप सरकार ने बड़ी संख्या में अपने स्कूलों में प्राइमरी सेक्शन खोल दिए। दिल्ली सरकार के बजट दस्तावेज के अनुसार दिल्ली सरकार के 720 स्कूलों में प्राइमरी सेक्शन चल रहे है। वही लगभग स्कूलों में नर्सरी सेक्शन खोलने का काम जारी है।
दिल्ली में प्राइमरी एजुकेशन हमेशा से MCD के जिम्मे रहा, हाई स्कूल और हायर एजुकेशन दिल्ली सरकार के अधीन थे। घटते नामांकन से परेशान केजरीवाल सरकार ने एक तीर से दो निशाने लगाये- MCD के स्कूलों में जाने वाले कुछ बच्चों को अपने स्कूल में ले आकर न केवल तेजी से घटते नामांकन की रफ़्तार पर थोड़ी लगाम लगायी बल्कि MCD के स्कूलों से भी राजनीतिक बदला ले लिया।
प्राइमरी सेक्शन खोलने के बावजूद दिल्ली के बच्चें केजरीवाल जी के गिने-चुने वर्ल्ड क्लास स्कूलों के झांसे में न आकर प्राइवेट स्कूलों की तरफ भाग रहे है। इधर कहानियां गढ़कर शिक्षा क्रांति के नामपर भ्रांतियां फैलाई जा रही है।