ये शरजील इमाम असम को देश से अलग करने को बोलता है जानते है क्यों ?
   दिनांक 27-जनवरी-2020
दरअसल इस तरह का बयान देने वाले शरजील जानता है कि होगा क्या ? अरे कुछ मुक़दमे ही तो लगेंगे इसके बाद लिबरलों की फौज है न मुकदमा लड़ने के लिए, कथित वामपंथी मीडिया उन्हें हीरो बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा

sarjeel _1  H x
जेएनयू का शोध छात्र शरजील इमाम 16 जनवरी को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी पहुंचा था। वहां उसने असम को देश से अलग करने की बात कही, उसने कहा हम वहां लाखों हैं, रेल की पटरियों पर इतना मवाद डालों कि महीनों लग जाए साफ करने में, भेजो वहां एयरफोर्स को। शाहीन बाग में भी शरजील ने यही बातें दोहराई। क्या किसी मुस्लिम देश में शरजील ऐसा कह सकता था, नहीं, लेकिन ये भारत है यहां अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर कुछ भी कहो सब चलता है। उसके खिलाफ अलीगढ़ और दिल्ली दोनों जगहों पर राष्ट्रद्रोह का मामला दर्ज किया गया है।
दरअसल इस तरह का बयान देने वाले शरजील जानता है कि होगा क्या ? अरे कुछ मुक़दमे ही तो लगेंगे इसके बाद लिबरलों की फौज है न मुकदमा लड़ने के लिए, कथित वामपंथी मीडिया उन्हें हीरो बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।
वीडियो में शरजील कह रहा है कि --" हमारी ये कोशिश रही है दिल्ली में, जिसमें हम ऐसी भीड़ को बना पाएं जिसमें गैर-मुस्लिम हमारे साथ नारा-ए-तकबीर लगाएं और वो हमारी शर्तों पर खड़े होना सीखें, अगर वो हमारी शर्तों पर नहीं खड़े हैं तो इसका मतलब ये है कि वो हमारा इस्तेमाल कर रहे हैं, हमारी भीड़ का इस्तेमाल कर रहे हैं जैसा इन्होंने सत्तर सालों से किया है !
अब वक़्त ये है की हम गैर मुस्लिमों को बोलें कि वो हमारी शर्तों पर आकर खड़े हों, अगर नहीं खड़े हो सकते तो वो हमदर्द नहीं हैं वो कन्हैया वाली रैली देख लीजिये, 5 लाख लोग थे उसमें, अब उसका मसला बस इतना सा है कि अगर 5 लाख लोग हों हमारे, पर हों ऑर्गनाइज़्ड तो हम हिंदुस्तान और नार्थ-ईस्ट को परमानेंटली कट कर सकते हैं, परमानेंटली नहीं तो एक आध महीने के लिए तो कट कर ही सकते हैं, मतलब इतना मवाद डालो पटरियों पर कि उन्हें हटाने में एक महीना लगे, है कि नहीं!
असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है, असम और इंडिया कट कर अलग हो जाएं, तभी ये हमारी बात सुनेंगे, असम में जो मुसलमानों का हाल है वो आपको पता है, सीएए लागू हो चुका है वहां, डिटेंशन में लोग डाले जा रहे हैं, और वहां तो जो कत्लेआम चल रहे हैं, 6-8 महीने में पता चलेगा ।
तो अगर असम की मदद करनी है तो हमें असम का रास्ता बंद करना होगा फ़ौज के लिए, समझ रहे हैं, फ़ौज के लिए और जो भी यहाँ से सप्लाई जा रहा है बंद करो, और वो बंद कर सकते हैं क्योकि चिकेन्स-नेक मुसलमानों का है, वो जो इलाक़ा है मुस्लिम अक्सरियत है !"