ब्रह्मलीन हुए कैंसर पीडि़तों के भगवान बाबा कमलनाथ
   दिनांक 28-जनवरी-2020
राघवेन्द्र सिंह
बाबा कमलनाथ का 123 साल थे। बाबा कमलाथ ने जड़ी-बूटियों के जरिए हजारों कैंसर पीडि़तों का नि:शुल्क उपचार किया। वे कैंसर के लिए देश ही नहीं विदेशों में भी प्रसिद्ध थे

baba kamalnath _1 &n
पिछले कई दशक से कैंसर समेत कई असाध्य बीमारियों का उपचार के लिए प्रसिद्ध बाबा कमलनाथ महाराज १२ जनवरी को देह त्याग ब्रह्मलीन हो गए। राजस्थान के अलवर जिले के तिजारा के गहनकर गांव के बाबा कमलनाथ का 123 साल थे। बाबा कमलाथ ने जड़ी-बूटियों के जरिए हजारों कैंसर पीडि़तों का नि:शुल्क उपचार किया। वे कैंसर के लिए देश ही नहीं विदेशों में भी प्रसिद्ध थे। देश के कई बड़े राजनेताओं ने भी उनके आश्रम में उपचार करवाया। बाबा कमलनाथ का सादगी पूर्ण संयमित जीवन, निष्पक्षता, प्राणी मात्र की सेवा, परमात्मा की भक्ति में अटूट श्रद्धा थी। अध्यात्म से गहरा लगाव के साथ वे 123 वर्ष की आयु में भी अपने दैनिक कार्य नित्य स्वयं द्वारा संपादित करना तथा सत्य पथ के लिए दैनिक मार्गदर्शन उनके चुंबकीय व्यक्तित्व की पहचान बना रहा। बाबा ने अपने गुरु के समक्ष प्रयागराज में प्रण लिया था कि वे कभी रुपए पैसों की लेन-देन नहीं करेंगे तथा पैसे छूने छुएंगे भी नहीं, जिसे उन्होंने ताउम्र निभाया। बाबा कमलनाथ स्वतंत्रता सेनानी रहे तथा नाथ संप्रदाय में दीक्षित संत थे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने भी अपने जन्मदिन पर 11 सितम्बर 2019 को उनके आश्रम पहुंचकर आर्शीवाद लिया था। सरसंघचालक ने लोगों से कहा था कि आप बेहद भाग्यशाली हैं जो बाबा के सानिध्य में रहते हैं। आपको उनके अनुभव लाभ उठाना चाहिए, अगर संत-महात्माओं के अनुभव का लाभ नहीं उठाया तो समझो चूक गए। देश में अब ऐसे साधु-महात्मा कम ही बचे हैं। ऐसे संत हजारों साल पहले होते थे, वो आपके क्षेत्र में आज भी है। डॉ. भागवत ने बाबा कमलनाथ की तुलना गंगा नदी से करते हुए कहा था कि जैसे गंगा नदी जहां बहती है, वहां के लोग समृद्ध होते हैं। जहां-जहां गंगा बहती है, उन इलाकों में खुशहाली रहती है। उसी तरह बाबा कमलनाथ आपके इलाके में वरदान की तरह हैं। बाबा कमलनाथ विरले संत हैं, उनका रहना लोगों के लिए सौभाग्य है।
कौन थे बाबा कमलनाथ
बाबा कमलनाथ अलवर जिले के तिजारा के गहनकर गांव स्थित बाबा कमलनाथ आश्रम के महंत थे। उनका जन्म बिहार के गोविंदपुरम में 1897 में हुआ था। उनके पूर्वजों का मूल निवास गुजरात के कच्छ के पास अंजार-कांदला में था। पिता रेलवे में ठेकेदार थे तो बिहार में रहा करते थे। बाल्यकाल बिहार गुजारने के बाद वो कुछ दिनों तक विजयनगर, आंध्रप्रदेश व उसके बाद अपने पूर्वजों के मूलस्थान गुजरात के कच्छ में रहने लगे। जहां व्यवसाय में व्यस्तता के बीच उनका झुकाव धर्म-कर्म की तरफ बढ़ता गया। बाबा कमलनाथ ने नाथ सम्प्रदाय के गुरु भोजनाथ से दीक्षा ली तथा उनके सान्निध्य में काशी में रहकर आयुर्वेद से उपचार करना सिखा। उनके गुरु भोजनाथ चोला के निधन के बाद बाबा कमलनाथ ने देश के प्रमुख मठ-मंदिरों का पैदल भ्रमण किया। इसके बाद भर्तृहरि व झिरका फिरोजपुर के जंगलों में रहकर 10 वर्षों तक तपस्या की। इसके बाद 12 अगस्त 1967 को वे गहनकर गांव आए। बाबा पिछले करीब तीन दशक से कैंसर, ह्रदय रोग, ब्लड प्रेशर, टीबी आदि का नेपाल से जूड़ी-बूटियां मंगवा दवा तैयार कर उपचार करते थे। उनका बचपन का नाम कमलवेल्जी भाई था, जिसे उनके गुरू भोजनाथ ने कमलनाथ नाम दिया। बाबा कमलनाथ को वनस्पतियों, पेड़-पौधों से लगाव था। उनके आश्रम व गहनकर गांव में सघन हरियाली देखने को मिलती है।