इस मर्ज की दवा नहीं
   दिनांक 28-जनवरी-2020
अविनाश त्रिपाठी


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ब्रिटेन ने सदियों तक आधी दुनिया पर राज किया, लेकिन आज किसी एक देश का नाम भी ब्रिटेन के नाम पर नहीं है। वहीं, भारत जो मोटे तौर पर दुनिया में कहीं लड़ने नहीं गया, फिर भी इंडोनेशिया नामक एक द्वीप समूह है, जिसके नाम के पहले अंग्रेजी के तीन अक्षर आईएनडी हैं।
 
भारत दुनिया का एकमात्र देश है, जिसके नाम पर महासागर का नाम है- हिन्द महासागर। विश्व की जीडीपी में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी (आज अमेरिका की भी इतनी हिस्सेदारी नहीं है) वाले भारत तक पहुंचने के लिए यूरोप के लगभग हर देश ने इंडिया के नाम से नेवी कंपनी खोल रखी थी। वह भी हम ही हैं, जिन्हें जीतने के लिए हदीसों में गजवा-ए-हिन्द लिखा गया।
 
हम तक जमीनी रास्ते से सिर्फ पहुंच जाने भर से सिकंदर को विश्व विजेता माना गया। हम तक पहुंचने का समुद्री रास्ता खोजने के चक्कर में कोलम्बस ने अमेरिका को खोज लिया। फिर भी हम खड़े हैं पांच हजार सालों से। हां, कुछ एक तिहाई सिकुड़ गए हैं, फिर भी अभी तक चीन की तरह न पूरी तरह कम्युनिस्ट बने, न पर्शिया और मिस्र की तरह इस्लामिक, न रोम और यूनान की तरह ईसाई।
 
जिस तरह पाकिस्तान अपना इतिहास मुहम्मद बिन कासिम के सिंध पहुंचने के बाद से शुरू करता है, मानो उससे पहले इस पूरे भू-भाग का कोई अस्तित्व ही नहीं था। वैसे ही कुछ लोगों को शौक चढ़ा है यह बताने का कि 'अंग्रेजों के आने से पहले भारत का अस्तित्व नहीं था।' जो लोग फिल्म 'बाजीराव मस्तानी' में पेशवा बाजीराव के पीछे अखंड भारत का नक्शा देखकर चटक गए थे, वे इन दिनों 'तानाजी' पर बोल रहे हैं कि अंग्रेजों के आने से पहले भारत जैसी कोई चीज ही नहीं थी।
 
कई फिल्मों (केसरी, पानीपत) में जिहाद का नारा देकर मुस्लिम सुल्तानों के हमले के दृश्य दिखाने पर जिन्हें दिक्कत नहीं हुई (क्योंकि यह तो सामान्य बात है) वे 'हिन्दू के खिलाफ हिन्दू' वाले संवाद (डायलॉग) को झूठा इतिहास बता रहे हैं।
 
भारत गणराज्य या इंडिया रिपब्लिक, संविधान में शामिल ये दोनों नाम अंग्रेजों के आने के बाद नहीं पड़े। भारत नाम ऋग्वेद, रामायण, महाभारत और पुराण सब में मिलता है। इंडिया शब्द हिरोडोटस द्वारा 400 ईसा पूर्व लिखा गया था।
 
भारत, यूरोप या यूएसएसआर नहीं है, क्योंकि पूरे यूरोप पर रोमन साम्राज्य के नाम पर चर्च शासन करता था या कम्युनिस्ट तानाशाही थी। इसलिए यूएसएसआर का अस्तित्व था। जैसे ही चर्च या कम्युनिस्ट तानाशाही कमजोर पड़ी, यूरोप और यूएसएसआर से टूटकर 20 देश बन गए। भारत को भारत बने रहने के लिए किसी राजा, चर्च या तानाशाही की जरूरत नहीं है।
जब तक बंगाल में कोई सोमनाथ चटर्जी और आंध्र में कोई पीवी सिंधु (वह सिंध जो अब देश का हिस्सा नहीं है) होती रहेंगी, भारत एक देश रहेगा। लेकिन बिना रीढ़ की हड्डी के लोग, जो बेटे का नाम तैमूर रखते हैं और कहते हैं कि यह वो तैमूर नहीं है जिसने कई करोड़ भारतीयों को मारा। यह तिमुर है, जिसका मतलब होता है लोहा। जिस फिल्म में काम करें उसके लिए कहें, यह इतिहास तो फर्जी है, लेकिन चूंकि भूमिका अच्छी थी और एक हिट फिल्म चाहिए थी, इसलिए कर लिया। 
 
नेशन, स्टेट और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद में अंतर होता है, यह समझने के लिए भी समझ चाहिए। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, फिर भी 'इंडिया गो बैक' के नारे लगते हैं (क्योंकि निजाम-ए-मुस्तफा लक्ष्य है) और नेपाली-गोरखा अलग नेशन, स्टेट के होते हुए भी भारत की रक्षा करता हुआ शहीद हो जाता है (क्योंकि सांस्कृतिक विरोध नहीं है)
 
सैफ अली खुद असली इतिहास क्यों नहीं बताते? वे खुद एक फिल्म बनाएं और नालंदा जलाते हुए किसी खिलजी को, सोमनाथ तोड़ते गजनी को, कुरान की झूठी कसम खाते औरंगजेब को हीरो बताएं। लेफ्ट चश्मे से देखने के बाद भी मुगल-ए-आजम से लेकर जोधा-अकबर तक, अकबर के अलावा कोई दूसरा मध्यकालीन चरित्र नहीं मिलता, जिसे नायक बताकर फिल्म बना सकें। 
 
हमें पता है कि कौन क्या दिखता है? क्या बोलता है? किस नस को दबाने पर कहां दर्द होता है? 14 अगस्त को पाकिस्तान तो बना था, लेकिन भारत नहीं। 15 अगस्त को तो भारत आजाद हुआ था।
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