सीएए पर हुई हिंसा में कानपुर से पीएफआई के पांच सदस्य गिरफ्तार
   दिनांक 31-जनवरी-2020
हिंसा फैलाने के लिए पीएफआई के 12 खातों में से रकम ट्रांसफर की गई थी। चार खातों में तीन करोड़ की रकम ट्रांसफर की गई। यह रकम रिहेबिलिटेशन इंडिया एनजीओ के माध्यम से फंडिंग की गई थी। पुलिस इस एनजीओ की भी पड़ताल कर रही है

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पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए पीएफआई के सदस्य
पुलिस ने चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के 5 सदस्यों को कानपुर में नागरिकता संशोधन अधिनियम और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन के खिलाफ हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया है। खुफिया एजेंसियों के इनपुट के आधार पर इन पांचों को गिरफ्तार किया गया है।
कानपुर पुलिस की जांच में पता चला है कि 15 दिसंबर से लेकर अब तक शहर में सीएए के विरोध को लेकर जो हिंसा और धरना-प्रदर्शन हुए, उसकी फंडिंग पीएफआई ने ही की थी। इसके साथ ही मोहम्मद अली पार्क चमनगंज में चल रहा प्रदर्शन भी इसी फंड के जरिये संचालित होने की भी जानकारी मिली है। आरोपियों की शिनाख्त मोहम्मद उमर, सैयद अब्दुल, फैज़ान, वासिफ और सरवर के तौर पर की गई।
सीएए के विरोध को लेकर कानपुर में छिटपुट विरोध 15 दिसंबर से ही शुरू हो गए थे, लेकिन बड़ा बवाल 20 दिसंबर को जुमे की नमाज के बाद हुआ। बाबूपुरवा मे हिंसा के बाद गोलीबारी, पथराव और आगजनी में तीन लोगों की मौत हो गई थी, जबकि एक दर्जन लोग घायल हुए थे। यतीमखाने से हजारों की भीड़ ने निषेधाज्ञा तोड़कर शहर के एक बड़े हिस्से में जुलूस निकाला था, जिससे पूरे शहर में अफरातफरी मच गई थी। दूसरे दिन यतीमखाना में पुलिस के साथ उपद्रवियों का खूनी संघर्ष हुआ, जिसमें 40 से अधिक लोग घायल हुए। अब भी छिटपुट विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। मोहम्मद अली पार्क में एक महीने से भी अधिक समय से महिलाएं आंदोलन कर रही हैं।
हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में जानकारी मिली थी कि कटरपंथी मुस्लिम संगठन पीएफआई ने सीएए के विरोध के लिए 120 करोड़ रुपए धन मुहैया कराया था। चरमपंथी संगठन के कुछ और बैंक एकाउंट भी ईडी रडार पर हैं। सूत्रों के अनुसार कानपुर में भीड़ को उकसाने के लिए 10 से 12 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके लिए करीब 10 बैंक अकाउंट का प्रयोग किया गया था।