समरस समाज की करनी है स्थापना
   दिनांक 06-जनवरी-2020
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29 व 30 में आवश्यक संशोधन कर अल्पसंख्यकों को दिये गए अधिकारों का विस्तार 
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बैठक को संबोधित करते श्री भैयाजी जोशी। मंच पर विराजमान (बाएं से) 
सर्वश्री अशोक चौगुले, विष्णु सदाशिव कोकजे, आलोक कुमार एवं मिलिंद परांडे
 
पिछले दिनों कर्नाटक के मंगलुरु में विश्व हिन्दू परिषद की केन्द्रीय प्रबंध समिति व प्रन्यासी मण्डल की बैठक संपन्न हुई है। इस दौरान मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री भैयाजी जोशी उपस्थित थे। बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हमें एक सशक्त, संस्कारित, जाग्रत, सज्जन, स्वाभिमानी, पुरुषार्थी तथा विज्ञान के साथ चलने वाले, ऐसे सक्रिय हिन्दू चाहिए जो संगठित शक्ति का निर्माण कर विश्व को नेतृत्व देने में समर्थ हों।

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आज हिन्दू समाज में जो जन्म से श्रेष्ठता की बात हो रही है, वह ठीक नहीं है क्योंकि व्यक्ति कर्म के आधार पर श्रेष्ठ होता है। कहीं न कहीं हमारे मूल्यों का क्षरण हुआ है, मातृभूमि के प्रति उदासीनता भी दिखाई देती है जो मात्र दृष्टिकोण बदलने के कारण हुआ है।
 
समाज से ऊंच-नीच समाप्त कर हमें एक समरस समाज बनाना है। उन्होंने कहा कि गोरक्षा हमारे लिए केवल पशु रक्षा नहीं है। वह हमारे लिए आस्था का विषय है। श्रीराम जन्मभूमि हमारे लिये स्वाभिमान का केन्द्र है। बैठक के दूसरे दिन विश्व हिन्दू परिषद द्वारा संस्कारित, सबल व स्वावलंबी भारत के निर्माण का संकल्प लिया गया। देश में बढ़ती बलात्कार व महिलाओं के साथ अभद्रता की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए इन घटनाओं को रोकने हेतु एक व्यापक कार्ययोजना भी बनाई गई। इसके अतिरिक्त भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29 व 30 में आवश्यक संशोधन कर अल्पसंख्यकों को दिये गए अधिकारों का विस्तार कर,अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक के भेदभाव को मिटाने हेतु, उसमें सभी मत-पंथ व भाषाई समुदायों को सम्मिलित किये जाने की मांग की गई।
 
बैठक में भारत में महिलाओं की स्थिति पर पारित प्रस्ताव में कहा गया कि महिलाओं के साथ बढ़ते दुर्व्यवहार को रोकने तथा उनकी सुरक्षा व उनके प्रति देखने के दृष्टिकोण को बदलने के लिये एक व्यापक सर्वस्पर्शी अभियान के साथ अभिभावकों, शिक्षाविदों, संत-महात्माओं, सामाजिक संगठनों, विज्ञापन, मनोरंजन व मीडिया जगत से जुड़कर लोगों के साथ-साथ शासन-प्रशासन को आगे आना होगा। विश्व हिन्दू परिषद परिवार प्रबोधन द्वारा हिन्दू समाज में सुसंस्कार व परिवार भावना विकसित करने के कार्य को गति देगी तो दुगार्वाहिनी युवतियों के आत्म रक्षार्थ देशभर में चल रहे अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों को तीव्रता प्रदान करेगी।