किसी भी देश का भविष्य उसके युवा ही होते हैं
   दिनांक 06-जनवरी-2020
 
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शिविर को संबोधित करते श्री अरुण कुमार
 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, गुजरात प्रांत द्वारा गत 20-22 दिसंबर को तीन दिवसीय 'समर्थ भारत युवा संगम' शिविर का आयोजन किया गया। समारोप समोराह में मुख्य वक्ता के रूप में अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री अरुण कुमार उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश में एक बड़ा वर्ग है जो मानता है कि विद्यार्थी यानी अनुशासनहीनता, मौज मस्ती आदि। यह सामान्य समाज की युवाओं को देखने की एक दृष्टि है। परन्तु संघ ऐसा नहीं मानता। संघ मानता है कि विद्यार्थी की एक विशेष दृष्टि है और वह जो सोचता है, उस पर प्रयोग भी करना चाहता है। किसी भी देश का भविष्य चार बातों पर निर्भर होता है—युवा के हाथों में किताब कौन सी है, होठों पर गीत कौन सा है, कमरे में चित्र कौन से लगे हैं और वह क्या सोचता है?
 
रा.स्व.संघ अपने प्रारंभकाल से ही युवाओं के आधार पर कार्य कर रहा है। युवा यहां आता है, संघ को देखता है, जानता है, परखता है और फिर वह गहराई से समझकर संघ का ही हो जाता है। किसी भी शिविर की सफलता और सार्थकता इन तीन बातों पर निर्भर रहती है। यानी शिविर में शिक्षार्थी को यह ध्यान में आना चाहिए कि मैं कौन हूं?, मुझे क्या करना है?, और जो करना है, उसकी तैयारी कैसे करनी है? उन्होंने कहा कि इस देश की सबसे बड़ी समस्या आत्म विस्मृति है। उन्होंने आगे कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि जब आत्म विस्मृति होती है तो आत्म गौरव शून्यता आती है और जब आत्म गौरव शून्यता आती है तो आत्महीनता आती है। जिस समाज का आत्मविश्वास समाप्त हो जाता है, उसका आत्म कतृर्त्व भी समाप्त हो जाता है। स्वामी विवेकानंद जी की दो बातें आपको ध्यान में रखनी हैं, एक हम ईश्वर की संतान हैं, दूसरा सृष्टि में जो कुछ भी है, वह कुछ न कुछ उद्देश्य के साथ है। हर कोई निश्चित लक्ष्य लेकर आता है। भगवान ने इंसान को बुद्धि, चेतना अन्य प्राणियों से अधिक दी है ताकि वह इस सृष्टि का पालन एवं कल्याण कर सके। हम भारत में जन्मे हैं। भारत यानी ज्ञान रथ, जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में ध्रुवभाई शाह उपस्थित रहे। विसंके, गुजरात