जेएनयू परिसर में हिंसा के पीछे नक्सली
   दिनांक 06-जनवरी-2020
पिछले तीन दिन से वामपंथी जेएनयू परिसर में हिंसा का कुचक्र रच रहे थे. इतना ही नहीं, इनका साथ देने के लिए बाहर से गुंडे भी आए थे. जिस तरह से जामिया मिलिया के एक छात्रों का वर्ग इन वामपंथी गुंडों के समर्थन में सामने आया है, उससे साफ हो गया कि पूरी हिंसा सुनियोजित थी

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 नारे लगाते हुए वामपंथी
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के नाम पर जमे अर्बन नक्सली रविवार को अपने असली रूप में आ गए. जेएनयू में आम स्टूडेंट के बीच इनकी दाल नहीं गल रही है. दाखिले की प्रक्रिया के बायकाट का ऐलान नाकाम होता देख ये वामपंथी गुंडे हिंसा पर उतर आए. आनलाइन प्रक्रिया में छात्रों को शामिल होता देख नकाब पहनकर ये छात्रों, प्रोफेसरों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों पर टूट पड़े. इन वामपंथी गुंडों ने जमकर कोहराम मचाया. दर्जनों छात्र, एबीवीपी के नेता और अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मनीष जांगिड़ भी जख्मी हुए हैं. इस हमले में बाहरी अराजक तत्व भी शामिल थे. घटना की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं.
असल में चंद वामपंथी गुंडों ने पूरे जेएनयू को बंधक बना रखा है. अपनी विभाजक विचारधारा चलाने वाले ये बहरुपिये छात्र नहीं चाहते कि यूनिवर्सिटी में सेमेस्टर परीक्षा हो. यूनिवर्सिटी में ने परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आनलाइन कर दी है. इसके लिए वाई-फाई की सुविधा दी गई है. बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा देने के इच्छुक हैं. ऐसे में वापमंथियों का एजेंडा ढेर हो जाने का खतरा बन आया है. इस सारे घटनाक्रम की पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी. तीन जनवरी को ये नक्सली गुंडे नकाब पहनकर यूनिवर्सिटी के सर्वर रूम में पहुंचे और वाई-फाई बंद कर दिया. वाई-फाई बंद करने का उद्देश्य यही था कि छात्र परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन न करा सकें. चार जनवरी को जेएनयू प्रबंधन ने वाई-फाई चालू कराने का प्रयास किया, तो फिर ये वापमंथी गुंडे आ भिड़े. इस बार सिक्योरिटी स्टाफ ज्यादा होने के कारण इनकी एक न चली. जब ये वाई-फाई बंद कराने में नाकाम रहे, तो इन्होंने पांच जनवरी को हमले की साजिश रची. पांच जनवरी को सुनियोजित तरीके से ये लोग जेएनयू के सर्वर रूम पर जम गए. जो छात्र परीक्षा के रजिस्ट्रेशन के लिए पहुंचे, उन्हें इन्होंने खदेड़ दिया. जिसने भी विरोध किया, उस पर इन्होंने हमला किया

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 घायल हुए एबीवीपी के कार्यकर्ता
इन वामपंथी गुंडों ने शाम को स्कूल ऑफ लैंग्वेजस में प्रोफेसरों पर हमला बोल दिया. ये हमलावर एबीवीपी के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के लिए हॉस्टलों में जा घुसे. पेरियार हॉस्टल से सुरक्षा कर्मियों ने इन्हें खदेड़ा तो इन्होंने साबरमती हॉस्टल पथराव शुरू कर दिया. जब हॉस्टल के छात्र इन्हें सबक सिखाने के लिए बाहर आए, तो इन वामपंथियों ने सुनियोजित तरीके से वीडियो बनाकर ये दुष्प्रचार शुरू कर दिया कि हमलावर एबीवीपी के हैं. जेएनयू में ताजा टकराव बिल्कुल अलग किस्म का है. यह टकराव वामपंथी गुडों और आम छात्रों के बीच का है. वामपंथियों के कब्जे वाली जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने परीक्षा के रजिस्ट्रेशन के बहिष्कार का ऐलान किया हुआ है. लेकिन सैंकड़ों छात्र परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं. पिछले दिनों इन आम छात्रों की तरफ से पोस्टर भी लगाए गए थे जिसमें जेएनयूएसयू से मांग की गई थी कि उन्हें रजिस्ट्रेशन कराने दिया जाए. आम छात्रों के बीच में वामपंथियों की डिक्टेटरशिप का बड़ा विरोध पनप चुका है.
एबीवीपी ने बयान जारी करके कहा है कि वामपंथी गुडों ने जेएनयू के इंटरनेट कम्युनिकेशन पर हमला किया है. जिसके चलते जेएनयू परिसर में वाई-फाई ब्लैकआउट हो गया है. जब आम छात्रों ने इसका विरोध किया, तो वामपंथी गुंडों ने उन पर हमला किया. जेएनयू के वामपंथी नक्सलियों के नक्शे कदम पर है. इस पूरे मामले में गहरी साजिश है. पिछले तीन दिन से वामपंथी जेएनयू परिसर में हिंसा का कुचक्र रच रहे थे. इतना ही नहीं, इनका साथ देने के लिए बाहर से गुंडे भी आए थे. जिस तरह से जामिया मिलिया के एक छात्रों का वर्ग इन वामपंथी गुंडों के समर्थन में सामने आया है, उससे साफ हो गया कि पूरी हिंसा सुनियोजित थी. इसी को भांपते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने मामले का संज्ञान लिया. उन्होंने दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को जरूरी कदम उठाने की हिदायत दी. इसके बाद ज्वाइंट पुलिस कमिशनर के स्तर की जांच शुरू हो गई है. जेएनयू परिसर में इन वामपंथी गुंडों की वजह से ही पुलिस को आना पड़ा. जेएनयू प्रशासन ने लिखित में पुलिस की सहायता मांगी. पुलिस ने फ्लैग मार्च किया. अब पुलिस की उच्च स्तरीय जांच शुरू हो चुकी है. इस तरह की जांच की वामपंथी गैंग को उम्मीद नहीं थी. जाहिर है, इस जांच में जो भी सामने आएगा उस पर कड़ी कार्रवाई होगी.