राजस्थान में न्याय तो दिलवाओ राहुल गांधी, पुजारी को जिंदा जलाया गया और आप चुप हैं

    दिनांक 10-अक्तूबर-2020
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हाथरस मामले में पीड़िता के परिवार से मिलने की जिद पर अड़े राहुल गांधी राजस्थान के सपोटरा (करौली) के गांव बूकनी स्थित राधा गोपाल मंदिर के पुजारी बाबूलाल वैष्णव को जिंदा जलाए जाने की घटना पर चुप हैं

rahul collage rajasthan _
बात नवंबर 2018 की है। कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी ने राजस्थान चुनाव से पहले अजमेर के पुष्कर मंदिर में स्वयं का गोत्र दत्तात्रेय बताया था। राहुल गांधी चुनावों के समय स्वयं को जनेऊधारी ब्राह्मण घोषित कर चुके हैं। हालांकि, चुनावी सीजन के बाद राहुल गांधी को शायद किसी ने मंदिर जाते देखा हो। यही जनेऊधारी ब्राह्मण आज राजस्थान में एक पुजारी को पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने पर मौन हैं।
हाथरस मामले में पीड़िता के परिवार से मिलने की जिद पर अड़े राहुल गांधी ने राजस्थान के सपोटरा (करौली) के गांव बूकनी स्थित राधा गोपाल मंदिर के पुजारी बाबूलाल वैष्णव के परिवार की कोई सुध तक नहीं ली है। बाबूलाल का परिवार बेहद गरीब है। उनकी पत्नी, पांच पुत्रियों और एक मंदबुद्धि पुत्र का जीवन कैसे कटेगा? इस प्रश्न का उत्तर शायद ही किसी के पास हो, लेकिन राहुल गांधी न तो पीड़ित परिवार के आंसू पोंछने परिवार के पास आ रहे हैं और न आर्थिक सहायता का चेक देने आ रहे हैं।
राहुल गांधी जैसी ही स्थिति उनकी बहन प्रियंका वाड्रा की भी है। उत्तर प्रदेश की घटना पर हंगामा खड़ा करने की कोशिश करने वाली प्रियंका वाड्रा भी पुजारी बाबूलाल वैष्णव के साथ घटी घटना पर चुप है। भाई राहुल गांधी की तरह बहन प्रियंका वाड्रा भी राजनीति के समय चोला बदलने में माहिर हैं। चुनावी मौसम में उनका पहनावा विशुद्ध भारतीय नारी जैसा हो जाता है। राहुल-प्रियंका की राह पर उनकी मां और कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी भी हैं। हाथरस पर सोनिया गांधी ने दो वीडियो संदेश जारी कर दिए थे, लेकिन राजस्थान की घटनाओं पर उन्होंने संज्ञान लेना तो दूर, अपने प्रिय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने की हिदायत तक नहीं दी है।
सपोटरा के बूनका गांव में पुजारी बाबूलाल वैष्णव के साथ घटी घटना शर्मनाक और दिल-दहलाने वाली है। बाबूलाल वैष्णव विगत कई वर्षों से गांव स्थित राधा गोपाल मंदिर में पूजा करते आ रहे थे। ग्रामीणों ने मंदिर को करीब 6 बीघा कृषि भूमि दान में दी हुई है। राजस्व रिकॉर्ड में भी यह मंदिर माफी की भूमि में दर्ज है। पुजारी बाबूलाल वैष्णव मंदिर के पास ही झोपड़ीनुमा घर में परिवार सहित रहते आ रहे थे। जब बरसात में घर बेहद जर्जर हो गया तो उन्होंने मंदिर की भूमि के एक कोने पर छोटा झोपड़ीनुमा घर बनाना चाहा, जिसका गांव के दबंग और मुख्य आरोपी कैलाश मीणा और उसके परिजनों ने विरोध किया। उनकी नजर मंदिर की भूमि पर थी। गांव के पंचों के समझाने पर कैलाश मीणा और उसके साथी नहीं माने। 7 अक्टूबर की सुबह 10 बजे उन्होंने पुजारी बाबूलाल वैष्णव को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया।
पूरा घटना में पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही। पहले तो पुलिस ने घटना को आत्मदाह बताकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की, लेकिन 8 अक्टूबर की देर रात्रि पुजारी बाबूलाल वैष्णव के जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में दम तोड़ दिया और लोगों में आक्रोश बढ़ा तो पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज किया। कैलाश मीणा को तो पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बाकी आरोपी अब भी गिरफ्त से बाहर हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक ट्वीट करके इतिश्री कर ली। वो पुजारी बाबूलाल के परिवार को लिखित आश्वासन देने को तैयार नहीं हैं।
पुजारी बाबूलाल वैष्णव को जिंदा जलाने की घटना तो एक बानगी भर है। शनिवार को जब पुजारी के शव को लेकर ग्रामीण प्रदर्शन कर रहे थे, तभी जयपुर शहर के करीब एक युवक मुकेश को जिंदा जलाने की कोशिश हुई। 15 प्रतिशत जल गए मुकेश के पिता सुरज्ञानी ने हाल में सरपंच का चुनाव लड़ा था।
राजस्थान पिछले कुछ समय से देश में अपराध की राजधानी बन गया है। जब से कांग्रेस प्रदेश की सत्ता में आई है, अपराधी बेलगाम हो गए हैं। महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ दुष्कर्म, छेड़छाड़ आदि की घटनाएं आम हो गई हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2018 से अगस्त 2020 तक 4 लाख 35 हजार आपराधिक मुकदमे राजस्थान में दर्ज हो चुके हैं। इनमें दलितों के विरुद्ध 11,200 केस हैं। दुष्कर्म के मामलों में राजस्थान देश मं अव्वल है। पिछले दिनों बाड़मेर, बांसवाड़ा, सिरोही, भरतपुर, धौलपुर, आमेर (जयपुर), बारां, टोंक, चूरू, सीकर, जालौर में दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म की वारदात हुई हैं।
हद तो यह है कि राजस्थान में पूर्णकालिक गृह मंत्री ही नहीं है। स्वयं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गृह विभाग अपने पास रखा हुआ है। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री अशोक गहलोत ने पीड़िताओं को न्याय दिलाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता देश में किसी से छुपी नहीं है। सचिन पायलट के साथ राजनीतिक झगड़े में उलझे अशोक गहलोत कुर्सी बचाने में लगे हैं और इसका खामियाजा प्रदेश की जनता को उठाना पड़ रहा है।
राहुल गांधी रोज ट्वीट करके केंद्र सरकार और यूपी सरकार को कोसते हैं। यहां तक कहते हैं कि यदि वो सत्ता में होते तो मिनटों में समस्या का समाधान कर देते। राजस्थान में तो राहुल गांधी की पार्टी कांग्रेस की खुद की सरकार है। उनके सबसे विश्वास पात्र मुख्यमंत्री हैं। राजस्थान में तो उन्हें सबकुछ मिनटों में दुरुस्त कर देना चाहिए, लेकिन विडंबना है कि राहुल गांधी केवल राजनीति के लिए दुष्कर्म और अन्य अपराधों का सहारा लेते हैं।
राहुल गांधी अपनी सुविधानुसार अपराधों की श्रेणी बनाते हैं। किस राज्य में, किसके साथ, अपराधी कौन, यह पहले देखते हैं। महाराष्ट्र के पालघर में जब पुलिस की मौजूदगी में दो साधुओं की हत्या कर दी गई थी, तब भी राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा और सोनिया गांधी मौन थे। दरअसल, इन लोगों को पीड़ितों को न्याय दिलाने से ज्यादा सत्ता में वापसी की सीढ़ी किन लोगों के सहारे बनाई जाए, इसमें ज्यादा रुचि है।