राहुल को पीट—पीटकर मार दिया गया, मॉब लिंचिंग हुई पर चुप्पी क्यों ?

    दिनांक 11-अक्तूबर-2020
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दिल्ली में ध्रुव त्यागी की हत्या हुई क्योंकि वह अपनी बेटी को छेड़ने का विरोध कर रहे थे, मुस्लिम लड़की से मित्रता के कारण अंकित सक्सेना का गला रेत दिया गया अब राहुल को बर्बरता से मार डाला गया पर सेकुलर लॉबी चुप है 

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दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक का दूसरे वर्ष का छात्र राहुल, दिल्ली के आदर्श नगर इलाके में रहता था. पढ़ाई के साथ ही वह एक मुस्लिम लड़की को ट्यूशन पढ़ाता था. इसी दौरान राहुल की दोस्ती उस मुस्लिम लड़की से हो गई थी. इस बात को लेकर लड़की के घरवालों ने राहुल की हत्या करने का इरादा बना लिया. घटना के समय राहुल को फ़ोन करके कहा गया कि ट्यूशन के बारे में बात करनी है घर आ जाओ. राहुल अपने घर से करीब 500 मीटर की दूरी पर ही पहुंचा था कि चार—पांच मुसलमान युवकों ने घेर लिया। उसे बुरी तरह मारा पीटा. गंभीर रूप से घायल राहुल की अस्पताल में मृत्यु हो गई.

पुलिस ने इस मामले में लड़की के रिश्तेदार मोहम्मद राज, मनवव्वर हुसैन एवं लड़की के तीन नाबालिग भाइयों को हिरासत में लिया. इस घटना के बाद किसी भी कथित सेकुलरों या फिर किसी भी मुस्लिम संगठन ने ऐसा कोई बयान नहीं जारी किया जिसमे इस घटना को “मॉब लिंचिंग” बताया गया हो. सेकुलर मीडिया और मुसलमानों के लिए आंसू बहाने वाले संगठनों को यह घटना “मॉब लिंचिंग” नहीं लगी. किसी ने भी “मॉब लिंचिंग” का मुद्दा नहीं उठाया. कोई कैंडल मार्च नहीं निकला और कोई धरना - प्रदर्शन भी नहीं हुआ.
ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है जब राहुल की “मॉब लिंचिंग” पर सेकुलर गैंग ने चुप्पी साध रखी है. ​​ दिल्ली में ध्रुव त्यागी और अंकित की हत्या हुई. मगर ये सभी “मॉब लिंचिंग” की घटनाएं गुमनामी की भेंट चढ़ गईं. सवाल ये है कि ये लोग हिन्दुओं के मारे जाने पर चुप्पी क्यों साध लेते हैं ? इस तरह पिछले साल अक्टूबर में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में ट्रेन में “मॉब लिंचिंग “ का शिकार हुए राजीव गौतम की मौत के बाद किसी ने भी इस मामले को उस तरह नहीं उठाया जैसा तबरेज हत्याकांड में हुआ। गाजीपुर में राजीव गौतम को हत्या के इरादे से पीटा गया और फिर चलती हुई ट्रेन से उठाकर फेंका गया था. तबरेज के मामले में एक बात बिल्कुल साफ़ थी कि वह चोरी करने का आरोपी था. विडंबना है कि अगर हिन्दू ‘मॉब लिंचिंग’ का शिकार होता है तो उस घटना को ‘मॉब लिंचिंग’ की श्रेणी में नहीं रखा जाता हैं. "मॉब लिंचिंग" का मुद्दा हमेशा तब उठता है जब मुसलमान किसी आपराधिक मामले में भीड़ का निशाना बनता है. झारखंड में तबरेज की हत्या का मामला हो या फिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गोमांस घर में रखने के विवाद में हुई अख़लाक़ की हत्या का प्रकरण हो. मुसलमानों के मामले में सेकुलर लॉबी पूरे देश में एक साथ उठ खड़ी होती है. अख़लाक़ और तबरेज की हत्या पर राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले लोग "मॉब लिंचिंग" में मारे गए किसी भी हिन्दू के पक्ष में आवाज नहीं उठाते हैं.
हिन्दुओं के मारे जाने पर ये लोग चुप्पी साधे रहते हैं. हिन्दुओं की हत्याओं पर खास किस्म के संगठन कोई आंदोलन नहीं करते हैं. पहलू खान के लिए न्याय मांगने वाली मीडिया भी खामोश रहती है. हिन्दुओं की ‘माब लिंचिंग’ पर सन्नाटा और मुसलमानों की हत्या पर धरना- प्रदर्शन, यह दोहरा मानदंड आखिर कब तक चलेगा?
"मॉब लिंचिंग" पर आंदोलित होने वाले लोगों के नेटवर्क पर गौर करें तो तबरेज की हत्या झारखंड में हुई थी. उस हत्या के खिलाफ शांतिमार्च पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निकाला गया था और उस शांतिमार्च के दौरान आगरा एवं मेरठ आदि जनपदों में जमकर हिंसा हुई थी. 30 जून 2019 को शान्तिमार्च निकालने वाले मुसलमानों ने इतने बड़े पैमाने पर हिंसा फैलाई थी कि देर रात मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस महानिरीक्षक को वहां से हटा दिया गया था. तबरेज के मामले में आगरा जनपद में भी बवाल हुआ था. कुछ मुसलमान जामा मस्जिद के सामने आकर ज्ञापन देना चाहते थे. उन लोगों ने आगरा जनपद के अपर जिलाधिकारी (नगर ) को ज्ञापन भी दिया और उसके बाद करीब दो हजार मुसलमान युवक कलेक्ट्रेट परिसर की तरफ बढ़ने लगे. पुलिस को शहर में दंगा नियंत्रण योजना लागू करनी पड़ी. तबरेज के मामले में जहां एक तरफ सड़कों पर हिंसा फैलाई गई वहीं दूसरी तरफ दिल्ली वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अमानतुल्लाह खान ने तबरेज की पत्नी को 5 लाख रूपये और नौकरी देने की घोषणा की.
“मॉब लिंचिंग” की घटनाएं जिस पर सेकुलर गैंग ने चुप्पी साध ली

दिल्ली में ध्रुव त्यागी की हत्या
17 मई 2019 को दिल्ली के मोती नगर इलाके में ध्रुव त्यागी की बेरहमी के साथ हत्या कर दी गयी. मोती नगर के बसई दारापुर इलाके में 51 वर्षीय व्यापारी ध्रुव त्यागी अपनी बेटी के साथ जा रहे थे. तभी एक मुसलमान युवक ने छेड़खानी की. इसकी शिकायत करने के लिए ध्रुव त्यागी उस युवक के घर चल गए. छेड़खानी करने वाले युवक के पिता जहांगीर ने ध्रुव त्यागी के ऊपर हमला कर दिया. जहांगीर की पत्नी ने घर के अन्दर से चाकू ला कर दिया. जहांगीर ने चाकू मार कर ध्रुव त्यागी की हत्या कर दी.
मुस्लिम लड़की से प्रेम करने पर अंकित की गला काट कर हुई थी हत्या
वर्ष 2018 के फरवरी माह में दिल्ली में 23 वर्षीय अंकित की इसलिए हत्या कर दी गई थी क्योंकि वह मुस्लिम लड़की से प्यार करता था. अंकित अपने घर का इकलौता चिराग था. अंकित अपनी स्कूटी से कहीं पर जा रहा था. उसी समय लड़की के घर वालों ने उसे घेर लिया. पहले उसे पीटा और फिरे सरे आम गला रेत कर हत्या कर दी.
7 वर्ष बाद बहनोई की हत्या
11 वर्ष की उम्र में अजहरूद्दीन ने अपने बहनोई बृजेश कुमार की हत्या करने की ठानी थी. वह बर्दाश्त नहीं कर पाया था कि हिन्दू युवक बृजेश कुमार ने कैसे उसकी बहन से विवाह कर लिया. सात वर्ष बाद जब वह 18 वर्ष का हो गया तब उसने वर्ष 2019 के दिसम्बर माह में अपने बहनोई की हत्या कर दी. भांजा - भांजी के सिर से पिता का साया छीन लिया और अपनी बहन को विधवा बना दिया. घटना के समय बड़ी भांजी तीन साल की थी और छोटा भांजा डेढ़ साल का था. अभियुक्त अजहरूद्दीन को मासूम भांजे और भांजी का भी ख्याल नहीं आया. उसके मन में बस एक ही कट्टरता सवार थी कि हिन्दू युवक ने कैसे मुस्लिम लड़की से शादी की. घटना को अंजाम देने के बाद अभियुक्त अजहरूद्दीन अपने बहनोई की मोटर साइकिल से थाने पर पहुंचा और आत्मसमर्पण कर दिया. उसने पुलिस से कहा कि " सात वर्षों से बदले की आग में जल रहा था. अब जाकर तसल्ली मिली है." इस घटना के बाद आस -पास के इलाके की आक्रोशित जनता, अभियुक्त का घर जलाने पर आमादा थी मगर पुलिस ने समझा - बुझा कर सभी को वापस भेज दिया.
तिरंगा झंडा फहराने के विवाद में हुई थी चन्दन गुप्ता की हत्या
वर्ष 2018 के जनवरी माह में कासगंज जनपद में तिरंगा फहराने के विवाद में मुसलमानों ने चन्दन गुप्ता की हत्या कर दी थी. घटना के बाद चन्दन गुप्ता की मां संगीता गुप्ता चीख- चीख कर रो रही थीं. संगीता गुप्ता ने उस समय कहा कि “ मेरा बच्चा 26 जनवरी को झंडा फहराने गया था. मेरे बच्चे ने मुझसे कहा -- मम्मी मैं आ रहा हूं. बस तिरंगा फहराने जा रहा हूं. खाना बना कर रखना. अभी आता हूं. देश के लिए अपनी बलि दे दिया मेरे बेटे ने. मुसलमान लड़कों ने उसको रास्ते में रोक लिया. मेरा बच्चा हिदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहा था. वो लोग पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे. उन मुसलमान लड़कों ने कहा कि अगर पाकिस्तान जिंदाबाद नहीं कहोगे तो इस गली से आगे ज़िंदा नहीं जाने देंगे. मेरे बच्चे ने पाकिस्तान जिंदाबाद नहीं कहा, उन मुसलमान लड़कों ने मेरे बच्चे को जान से मार दिया. मेरा फूल सा बच्चा था. मेरे बुढापे की लाठी था, मेरी तो लाठी टूट गई. अब मैं किसके सहारे जीऊँगी. मेरे बच्चे को इन्साफ मिले , मुझको इन्साफ मिले. आप लोगों का काम इन्साफ दिलाना है . मेरा काम तो खत्म हो गया. अगर ऐसा होता रहा तो कोई मां अपने बच्चे को 26 जनवरी और 15 अगस्त पर झंडा फहराने नहीं भेजेगी. मेरा बच्चा बी. काम की पढाई कर रहा था. मुझसे कहता था कि मम्मी मैं बहुत बड़ा आदमी बनूंगा. अब क्या होगा .. ?”
चलती हुई ट्रेन से फेंका था राजीव गौतम को
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद के मुबारकपुर थाना क्षेत्र का निवासी राजीव गौतम आटो चला कर जीविकोपार्जन करता था. राजीव की पहली शादी निशा से हुई थी. पहली शादी के करीब दस वर्ष बाद उसने आयशा खातून से दूसरी शादी की थी. कुछ विवाद के बाद दोनों पत्नियां अलग - अलग मोहल्लों में रहने लगी थीं. सब कुछ ठीक- ठाक चल रहा था. राजीव गौतम अपनी रिश्तेदारी में गाजीपुर गया था. 22 अक्टूबर को वह लौटने के लिए ट्रेन में बैठा. सादात रेलवे स्टेशन पर करीब एकक दर्जन मुस्लिम युवक ट्रेन में सवार हुए और राजीव गौतम को बेरहमी से पीटने लगे. इन युवकों ने राजीव गौतम को अधमरा कर दिया और उसके बाद चलती हुई ट्रेन से फेंक दिया. राजीव गौतम की मृत्यु हो गई. राजीव गौतम की हत्या का आरोप आयशा खातून के मायके वालों पर लगा. आयशा के घर वालों को यह मंज़ूर नहीं था कि उसने हिन्दू युवक से शादी कर ली थी. इसी बात से वो लोग आक्रोशित थे. काफी समय से मौके की तलाश में थे.