मलयालम कवि और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता अक्कितम अच्युतन नंबूदरी का निधन

    दिनांक 15-अक्तूबर-2020
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अक्कितम अच्युतन नंबूदरी का जन्म 8 मार्च 1926 को केरल के पलक्कड़ जिले में हुआ था। उन्होंने कविता के अलावा नाटक और उपन्यास भी लिखे

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 जब मीडिया में 94 वर्षीय अक्कितम अच्युतन नम्बूदिरी को 2019 के ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित करने की खबर आई तो मलयालमभाषी साहित्यकार और राजनैतिक समालोचक एम. सतीशन ने कहा कि ज्ञानपीठ को अक्कितम मिल गया। जनमानस के बीच अक्कितम के नाम से विख्यात, वे केरल के एकमात्र ऐसे महाकवि हैं जो घर-घर में मशहूर है।

उन्होंने ब्राह्मण समाज, जिसका वे स्वयं हिस्सा हैं, में व्याप्त रूढ़िवादिता और दकियानूसी परंपराओं के खिलाफ अनवरत संघर्ष किया है और उन्हें समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे अंतिम जीवित समाज सुधारकों में से एक हैं जिन्होंने 94 वर्ष की अवस्था में न केवल नम्बूदिरी परिवारों में, बल्कि पूरे केरल में समाज के निचले वर्गों के लिए काम किया।

सबसे मशहूर प्रसिद्ध पुस्तक 'इरुपदाम नूतनदीदे इतिहसम' है, जो पाठकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। उनकी लिखी ‘दी एपिक आॅफ ट्वेंटिएथ सेंचुरी’ मलयालम साहित्यिक परिदृश्य में सबसे बेहतर काव्य कृति के रूप में उभर कर लोगों के सामने आई। उनकी कुछ मशहूर पुस्तकें “खंड काव्य”, “कथा काव्य”, “चरित्र काव्य” और गीत हैं. उनकी कुछ विख्यात रचनाओं में “वीरवाडम”, “बालदर्शनम्”, “निमिषा क्षेतराम”, “अमृता खटिका”, “अक्चितम कवितातक्का”, “महाकाव्य ऑफ ट्वेंटीथ सेंचुरी” और “एंटीक्लेमम” शामिल हैं. आपको बता दें कि उन्हें 1973 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1972 में केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार और 1988 में केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार और कबीर सम्मान से भी नवाज़ा जा चुका है।
अक्कितम अच्युतन नंबूदरी ने नम्बूदिरी समाज में प्रचलित लेकिन बदलते समय के साथ बहुत सारी असंगत, गैरजरूरी और अनुपयोगी हो चुकी परम्पराओं से समाज को मुक्ति दिलाने में उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई है। नम्बूदिरी विधवाओं का पुनर्विवाह और उनका घर से बाहर जाकर काम करने का विचार मात्र 20वीं शताब्दी के पूर्वार्ध तक अकल्पनीय था।

उन्होंने वी. टी. भट्टथिरिप्पाडु और ईएमएस नम्बूदिरिपाद (केरल के पहले मुख्यमंत्री) के साथ मिलकर इस बुराई को दूर करने के लिए अधिक से अधिक समय दिया और इस बुराई और हठधर्मिता को समाप्त करने के लिए सभी मंचों और तरीकों का सहारा लिया।