यूपी में सरकारी पैसे से चलने वाले मदरसे कब बंद होंगे ?

    दिनांक 16-अक्तूबर-2020
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असम में सरकारी पैसों पर चलने वाले मदरसों को बंद किए जाने की घोषणा के बाद यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि उत्तर प्रदेश में भी मदरसों को बंद किया जाना चाहिए. यूपी में सरकारी धन पर मदरसों का संचालन आखिर कब तक होगा ?

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उत्तर प्रदेश के मदरसे आतंक की नर्सरी बन चुके हैं. मदरसों में शारीरिक शोषण की घटना भी प्रकाश में आ चुकी है. बीते दशक में हर बड़ी आतंकी घटना में देवबंद के मदरसे की कोई ना कोई भूमिका अवश्य रही है. गत वर्ष लखनऊ में एक मदरसे का संचालक बड़े पैमाने पर शारीरिक शोषण का आरोपी निकला. कुछ माह पूर्व रामपुर जनपद में महज 8 वर्ष की बच्ची के साथ मदरसे के शिक्षक ने शारीरिक छेड़छाड़ की थी. रामपुर जनपद के थाना अजीमनगर अंतर्गत ‘वमा अहद जामिया दारूततालीबात’ नाम का मदरसा चल रहा था. इस मदरसे में कुछ बच्चियां भी तालीम लेने जाती थीं. मात्र 8 वर्ष की बच्ची के साथ चार महीने तक मदरसे का शिक्षक लगातार छेड़खानी कर रहा था. बाद में बच्ची की शिकायत पर आरोपी को गिरफ्तार किया गया.

वर्ष 2018 के दिसंबर माह में, लखनऊ के मदरसे में बड़े पैमाने पर यौन शोषण का मामला प्रकाश में आया. मदरसा संचालक की हरकतों से तंग आकर लड़कियां शाम के समय रसोई घर में नहीं जाती थीं. मामले की शिकायत के बाद मदरसा -जामिया खादीजतुल कुबरा लिलबनात - पर छापे की कार्रवाई के बाद मदरसे में कुल 52 लड़कियां रिहा कराई गईं.
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के देवबंद में दारूल उलूम इस्लामिक शिक्षा का बड़ा केंद्र है. दूर-दूर से मज़हबी शिक्षा प्राप्त करने के लिए छात्र वहां पर पहुंचते हैं. दारूल उलूम में मज़हबी शिक्षा लेने के लिए छात्र अन्य इस्लामिक देशों से भी आते हैं. इसी वजह से देवबंद में अन्य मदरसे भी खुल गए हैं. मौजूदा समय में हालत यह है कि जैश – ए – मोहम्मद जैसे खतरनाक आतंकी संगठन के लिए देवबंद ‘साफ्ट टारगेट’ है. यहां के मदरसों में पढ़ रहे युवकों को आतंकी बनाना, उनके लिए ज्यादा आसान कार्य है.
पिछले साल देवबंद में मार्च महीने में गिरफ्तार किए गए दो आतंकवादी बिना दाखिला लिए मदरसे का छात्र बनकर छात्रावास में रह रहे थे. दोनों आतंकी वहां के नौजवानों को हिन्दुस्तान के खिलाफ भड़का कर उन्हें आतंकवादी बनाने के काम में लगे हुए थे.
मदरसे में रहने वाले एक छात्र ने पुलिस को सूचना दी जम्मू – कश्मीर के रहने वाले दो युवक बिना दाखिला के मदरसे में रह रहे है. दोनों युवकों की गतिविधियां भी संदिग्ध लग रही है. इस सूचना पर पुलिस सक्रिय हुई और आरोपियों को वहां से पकड़ा गया.
वर्ष 2018 के दिसंबर माह में राष्ट्रीय जांच एजेंसी , दिल्ली पुलिस एवं उत्तर प्रदेश की ए.टी.एस ने संयुक्त रूप से दिल्ली और उत्तर प्रदेश में 17 जगहों पर छापा मारा था और 10 आतंकियों को गिरफ्तार किया था. आतंकी, सीरियल बम धमाके कर पूरे देश में दहशत कायम करने की योजना बना रहे थे. जिन जगहों पर विस्फोट किए जाने की योजना थी उसमे राष्ट्रीय स्वयम सेवक संघ कार्यालय , भाजपा कार्यालय , दिल्ली पुलिस मुख्यालय एवं बड़े नेताओं का नाम प्रमुख रूप से शामिल था.
2 जनवरी 2019 को वसीम अहमद और एहसान कुरैशी को भी देवबंद से गिरफ्तार किया गया था. इन दोनों पर आरोप है कि बांग्लादेशी आतंकी युसूफ अली को देश से बाहर फरार कराने के लिए फर्जी पासपोर्ट बनवाया था. ये दोनों भी देवबंद में पनाह लिए हुए थे.
इंडियन मुजाहिदीन का आतंकी शेख एजाज़ भी सहारनपुर में रहता था. एजाज़ को पुलिस ने सहारनपुर के रेलवे स्टेशन से वर्ष 2015 में गिरफ्तार किया था. वर्ष 2017 में मुजफ्फरनगर जनपद और देवबंद इलाके में फैजान सक्रिय था. फैजान बांग्लादेश में आतंकी संगठन से जुड़ा था. पुलिस की कार्रवाई की भनक लगते ही वह फरार हो गया था.
अक्टूबर 2017 में कोलकाता पुलिस ने रज़ाउल रहमान को गिरफ्तार किया था. यह भी देवबंद में रह चुका था. वर्ष 2001 में अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला किया गया था. आतंकियों ने लोकसभा पर हमला किया था. उस हमले में जिस कार का प्रयोग किया गया था. वह कार सहरानपुर की थी. लोकसभा पर हमले में आतंकी संगठन जैश – ए –मोहम्मद का हाथ था.
महराजगंज के मदरसे में हुआ था राष्ट्रगान का विरोध
वर्ष 2018 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर महाराजगंज जनपद के मदरसे में राष्ट्रगान का विरोध किया गया था. जबकि मदरसा बोर्ड की तरफ से इस बात के स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए गए थे कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सभी मदरसों में राष्ट्रगान गाया जाएगा और तिरंगा झंडा फहराया जाएगा. लेकिन महराजगंज जनपद के मदरसा अरबिया अहले सुन्नत अनवारे तैयबा गर्ल्स कॉलेज बड़गो में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जब राष्ट्रगान गाने का समय आया तब मौलानाओं ने राष्ट्रगान गाने से इन्कार कर दिया. इस संबंध में एक वीडियो भी वायरल हुआ था।
उत्तर प्रदेश के शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने ऐसे मदरसों को बंद करने की मांग की है. उनका कहना है कि मजहबी तालीम उस समय दी जानी चाहिए जब बच्चे परिपक्व अवस्था में पहुंच चुके हों. संविधान में सभी को एक समान शिक्षा देने की व्यवस्था है. संविधान की इस व्यवस्था का पालन किया जाना चाहिए. मौलाना मदरसे में बच्चे को मज़हबी शिक्षा देते हैं और बच्चे के मन में यह बैठ जाता है कि मौलाना बनना ही दुनिया का सबसे अच्छा और पाक काम है. पवित्र काम है. अगर किसी बच्चे को मौलाना बनना है , तो इसका फैसला उस बच्चे के माता - पिता करेंगे ना कि मौलाना . मगर मदरसे की शिक्षा व्यवस्था ऐसा हो गई है कि उसमें पढ़कर निकलने वाले बच्चे अधिकतर मौलाना ही बनना चाहते हैं. बच्चों को आवश्यक रूप से मजहबी शिक्षा दिया जाना एक प्रकार का मानसिक शोषण है. हाईस्कूल तक की सामान्य शिक्षा के बाद यह तय होना चाहिए कि जब बच्चा समझदार हो जाए तब उसे तय करने देना चाहिए कि उसे मौलाना बनना है या उसे अन्य किसी क्षेत्र में जाना है। बचपन से ही केवल मजहबी तालीम देकर उसक ब्रेनवॉश करना गलत है.