41 अरब के स्मारक घोटाले में विजलेंस ने 6 लोगों को बनाया आरोपी

    दिनांक 19-अक्तूबर-2020   
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वर्ष 2007 में जब मायावती मुख्यमंत्री बनी थीं तब लखनऊ और नोएडा में अम्बेडकर स्मारक और परिवर्तन स्थल, समेत पत्थरों के कई स्मारक बनवाये गए थे. इन स्मारकों पर सरकारी खजाने से 41 अरब 48 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. तत्कालीन लोकायुक्त एन. के मेहरोत्रा ने वर्ष 2013 में इसे 14 अरब से अधिक का स्मारक घोटाला बताया था. 6 वर्ष बाद विजलेंस ने 6 लोगों को आरोपी बनाया है.


सपा ने बसपा के खिलाफ और बसपा ने सपा के खिलाफ आरोप – प्रत्यारोप तो खूब लगाये मगर जनता की गाढ़ी कमाई की बंदरबांट को हर समय नजर अंदाज किया. अखिलेश यादव ने मायावती के मुख्यमंत्रित्व काल में हुए स्मारक घोटाले की जांच विजलेंस को सौंपी जरूर मगर कोई ठोस कार्रवाई करने का उनका कोई इरादा नहीं था. यही वजह थी कि सपा के शासनकाल में स्मारक घोटाले की जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई. योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद घोटालों की जांच में तेजी आई. मायावती के कार्यकाल में हुए स्मारक घोटाले की जांच पूरी होने के बाद विजलेंस ने 6 लोगों को आरोपी बनाया.

 

विजलेंस ने एमपी एवं एमएलए कोर्ट में आरोप पत्र  दाखिल कर दिया. इस घोटाले में विजलेंस ने भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के तत्कालीन संयुक्त निदेशक सुहैल अहमद फारुखी, यूपी राजकीय निर्माण निगम के तत्कालीन इकाई प्रभारी अजय कुमार, एसके त्यागी, पन्नालाल यादव, होशियार सिंह एवं अशोक सिंह को आरोपी बनाया. विजलेंस ने सरकारी सेवा में रहते हुए विश्वास घात, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण की धाराओं में इन लोगों को आरोपी बनाया.

उल्लेखनीय है कि बसपा सरकार के दौरान स्मारकों के निर्माण में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत, लोकायुक्त से की गई थी. लोकायुक्त की जांच में अनियमितता पाई गई थी. उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस प्रकरण की जांच विजिलेंस को सौंपी दी थी. विजिलेंस ने जनवरी 2014 में लखनऊ के गोमतीनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी.