इस ‘लिंचिंग’ पर मौन क्यों?

    दिनांक 19-अक्तूबर-2020   
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18 साल के राहुल राजपूत की जघन्य हत्या पर निर्लज्ज सेकुलर चुप्पी भी अजीब है।  वे मामले पर धूल डालना चाहते हैं। इतना ही नहीं, उन्हें  वे लोग भी सहन नहीं होते, जो कट्टरपंथी साजिशों के खिलाफ आवाज उठाते हैं
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राहुल राजपूत (दाएं) दिल्ली विश्वविद्यालय का छात्र था और एक मुस्लिम लड़की शैगुफा से प्रेम करता था। इसलिए लड़की के भाइयों ने उसकी हत्या कर दी (फाइल चित्र)


 भारत में सेकुलरिज्म के ठेकेदारों का अपना एजेंडा है। उनके सेकुलरिज्म की प्रेरणा हिंदू द्वेष है और मकसद है कठमुल्लापन का पोषण। उनकी आंखों पर जो चश्मा चढ़ा  है, उससे हिंदुओं का खून दिखाई नहीं देता। हिंदुओं के आंसू नजर नहीं आते। वे फिलिस्तीन के मुसलमानों के लिए छाती पीटते हैं, लेकिन पाकिस्तान-बांग्लादेश के हिंदुओं के सफाए पर मुकर जाते हैं। वे अनुच्छेद-370 हटाने का विरोध करते हैं और नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ धरनों पर बैठते हैं। उन्हें याकूब मेमन और अफजल गुरु जैसे जिहादियों से हमदर्दी होती है, लेकिन कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार पर वे बहरे-गूंगे और अंधे बने रहते हैं। वे मेवात और कैराना के हिंदुओं के पलायन पर भी मुंह नहीं खोलते। उनका मुंह खुलता है, बटला हाउस के उनके लाडले सिमी आतंकियों के लिए, इशरत जहां और सोहराबुद्दीन जैसे लश्कर के आतंकियों के लिए। उनके मुताबिक, वे लड़कियां, जो लव जिहाद का शिकार हुई हैं, दरअसल में झूठ बोल रही हैं। इनके मापदंडों के अनुसार लव जिहाद जैसा कुछ होता ही नहीं और जो लोग लव जिहाद की शिकार लड़कियों के लिए आवाज उठा रहे हैं, वे प्यार के दुश्मन ‘हिंदू फासिस्ट’ लोग हैं। भारत के छद्म सेकुलरों के पाखंड की सूची इतनी लंबी है कि पूछने का मन करता है, ‘भैया, इतनी निर्लज्जता लाते कहां से हो?’ राहुल राजपूत की जघन्य हत्या पर भी बेशर्म सेकुलर चुप्पी देखते बन रही है।

कुछ दिन पहले दिल्ली के आदर्श नगर में रहने वाले हिंदू युवक राहुल राजपूत  की सरेराह जघन्य हत्या कर दी गई। उसका जुर्म यह था कि वह एक मुस्लिम लड़की शैगुफा से प्रेम करता था। हिंदू लड़के से इसकी निकटता लड़की के परिवार वालों को सहन नहीं हुई और लड़की के भाइयों राज, शाहनवाज, कैफ ने अपने दोस्तों ताजुद्दीन तथा हुसैन आदि के साथ मिलकर राहुल को मार डाला। शैगुफा ने बताया कि यह हत्या सोच-समझकर, जाल बिछाकर की गई। राहुल बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था। शैगुफा के भाइयों ने उससे कहा कि वह राहुल से ट्यूशन के संबंध में कुछ बात करना चाहते हैं। पर शैगुफा ने उन्हें टाल दिया। संभवत: वह उनके इरादों को भांप गई थी। 7 अक्तूबर की शाम को जब वह सड़क पर राहुल से बात कर रही थी, तभी अचानक राज, शाहनवाज, कैफ अपने 5-6 अन्य दोस्तों के साथ पहुंचे और राहुल पर हमला कर दिया। शैगुफा ने राहुल को बचाने की कोशिश की और मिन्नतें भी करती रही, लेकिन उन्होंने उसकी एक न सुनी। राहुल को पेट और सीने में गंभीर आंतरिक चोटें आर्इं और कुछ समय बाद उसने दम तोड़ दिया। इस संबंध में निकट के पुलिस थाने की लापरवाही भी गंभीर कार्रवाई की मांग करती है, जहां शैगुफा भागकर पहुंची और पुलिस से राहुल को बचाने की गुहार लगाई। लेकिन थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसकी गुहार नहीं सुनी। 

दिल्ली के आदर्श नगर में रहने वाले राहुल राजपूत  की जघन्य हत्या कर दी गई। उसका जुर्म यह था कि वह एक मुस्लिम लड़की शैगुफा से प्रेम करता था। हिंदू लड़के से यह निकटता शैगुफा के परिवार वालों को सहन नहीं हुई और लड़की के भाइयों राज, शाहनवाज, कैफ ने अपने दोस्तों ताजुद्दीन व हुसैन आदि के साथ मिलकर राहुल को मार डाला।

इस निर्मम हत्या ने राहुल के परिवार पर वज्राघात किया है। राहुल की मित्र शैगुफा अपने परिवार के इस आपराधिक कृत्य और राहुल की हत्या से इतनी आहत है कि उसने अपना घर छोड़कर निराश्रित महिला आवास की शरण ली है। इस लिंचिंग पर  दिल्ली स्तब्ध है। राहुल होनहार छात्र था। वह आईएएस बनने के लिए पढ़ाई कर रहा था। अच्छा चित्रकार था। दस मिनट में किसी का हू-ब-हू चित्र उकेर देता था। पर न उसके परिवार को, न ही उसे जानने वालों को विश्वास हो रहा है कि अब वह इस दुनिया में नहीं है। राहुल के लिए लोग आवाज उठा रहे हैं। मामला दर्ज हुआ है, लेकिन इसे इकलौती घटना मानने की गलती नहीं की जा सकती। मुस्लिम लड़कियों के बाहर जरा सा भी पैर निकालने पर उनके परिवारीजनों या उनके आसपास के मजहबी ठेकेदारों द्वारा इस प्रकार की हिंसा पर उतर आना कोई नई बात नहीं है। शहर दर शहर ऐसी घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन इन पर कथित सेकुलर-लिबरल-प्रगतिशील जंगजू मुंह सिले बैठे रहते हैं। आपको कोट्टायम, केरल की हदिया अशोकन का मामला याद होगा। सीमा सुरक्षा बल से सेवानिवृत्त हुए के.एम. अशोकन की इकलौती बेटी, जिसका वास्तविक नाम अखिला अशोकन था, केरल के बदनाम कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पीएफआई की महिला विंग के संपर्क में आकर इस्लाम में दीक्षित हुई और शफीन जहां नामक मुस्लिम युवक से विवाह कर लिया। चूंकि अखिला अचानक घर से गायब हुई थी, इसलिए उसके पिता के.एम. अशोकन ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और अपनी बेटी को सामने लाने की मांग की। उनका कहना था कि उसने यह फैसला जल्दबाजी में लिया है और उन्हें इस शादी से ऐतराज है। परन्तु हदिया बन चुकी अखिला वापस नहीं लौटी। अंतत: उसके पिता ने मौन साध लिया।


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अखिला अशोकन उर्फ हदिया अपने पति शफीन जहां के साथ (फाइल फोटो)

यह मामला बहुत चर्चित हुआ था। तब झोला-बिंदी गिरोह प्यार का परवाना बनकर उड़ता फिर रहा था। अखिला के पिता की ‘संकुचित सोच’ पर सवाल उठाए जा रहे थे। इस विवाह को एक आदर्श प्रेम कहानी बनाकर प्रस्तुत किया जा रहा था। कहा गया कि अखिला को इस्लाम अपनाने और मुस्लिम युवक से विवाह करने का पूरा अधिकार है। बाद में 2019 में जब अखिला उर्फ हदिया ने होम्योपैथी की पढ़ाई पूरी की, तब एक बार फिर लेख लिखे गए, कि ‘हदिया, जिसके पिता ने उसकी शादी का विरोध किया था, अब एक डॉक्टर है।’ एक अन्य लेख का शीर्षक था ‘हदिया  का गर्वित पति।’ क्या जिन अधिकारों की बात अखिला उर्फ हदिया के लिए की गई, वही अधिकार राहुल की मित्र मुस्लिम युवती को नहीं था कि वह एक हिंदू युवक के साथ विवाह करे? अपनी मर्जी से पूजा पद्धति अपनाए? न्यूज पोर्टलों पर अखिला के मुस्लिम पति का फोटो चिपकाने वालों को राहुल का फोटो साझा करने की जरूरत क्यों महसूस नहीं होती? क्यों नहीं वे उन लोगों की सोच की निंदा करते, जिन्होंने संभावनाओं से भरे दिल्ली विश्वविद्यालय के एक होनहार छात्र को मौत की नींद सुला दिया?

लव जिहाद के एक से बढ़कर एक सनसनीखेज मामले सामने आते हैं, जब पता चलता है कि किसी मुस्लिम युवक ने हिंदू नाम रखकर किसी हिंदू लड़की से विवाह किया और बाद में पोल खुलने पर लड़की को प्रताड़ित किया या मार डाला। तब बिंदी-झोला गिरोह भूमिगत हो जाता है। 2014 में राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी (तारा शाहदेव) का मामला सामने आया था। जुलाई 2014 में झारखंड की इस प्रतिभावान खिलाड़ी की शादी रंजीत सिंह कोहली नाम के एक व्यक्ति से हुई थी। यह एक परंपरागत विवाह था। रंजीत कोहली ने अपने परिवार के साथ आकर तारा का हाथ मांगा था।  लेकिन शादी के बाद जब तारा को पता चला कि उसके पति का नाम रंजीत सिंह नहीं बल्कि रकीबुल हसन है, तो उस पर अत्याचार शुरू हो गए। तारा पर जबरन इस्लाम अपनाने का दबाव बनाया जाने लगा। उसे भूखा रखा गया, पीटा गया, जलती सिगरेटों से दागा गया। शादी के एक महीने बाद ही यह खिलाड़ी अपने पैरों पर खड़े होने की स्थिति में नहीं थी।

तारा ने बताया कि रकीबुल हसन ने बंदूक के दम पर उसका शारीरिक शोषण किया। उसके परिवार को मार डालने की धमकी दी। तारा को अपने पति की हकीकत तब पता चली, जब रंजीत के लिए इफ्तार पार्टी का एक निमंत्रण आया। यह निमंत्रण झारखंड के एक मंत्री हाजी हुसैन अंसारी की तरफ से आया था। निमंत्रण पत्र पर जनाब रकीबुल हसन खान के नाम का संबोधन था। तारा चौंक उठी। इसके बाद हकीकत परत दर परत खुलती चली गई। 7 जुलाई को तारा की शादी रंजीत से हुई थी। 9 जुलाई को वही रंजीत अपने असली नाम रकीबुल हसन के साथ उसके सामने खड़ा था। फिर रकीबुल 20-25 मौलवियों को बुला लाया और सब घेरकर उस पर मुसलमान बनने का दबाव बनाने लगे। इस दौरान उसे न सिर्फ मारा-पीटा गया, बल्कि कुत्ते से भी कटवाया गया। जबान खोलने पर उसके भाई को मरवा देने की धमकी दी गई। टूटी हुई तारा को रक्षाबंधन के दिन रकीबुल रांची के किशोरगंज इलाके में स्थित उसके मायके ले गया। तारा ने मौका पाकर कागज के टुकड़े पर अपनी आपबीती लिखकर मेज के दराज में रख दी। उसने सोचा था कि किसी की नजर पड़ेगी तो उसके परिवार वाले उसकी मदद के लिए आएंगे। लेकिन इस चिट्ठी पर किसी की नजर नहीं पड़ी।

आखिरकार शादी के 41 दिन बाद 17 अगस्त को उसने घर में काम करने वाले एक नौकर से मोबाइल लेकर अपने भाई को पूरी बात बताई और आगाह किया कि वह पुलिस लेकर ही उसके घर आए। तारा को डर था कि उसका भाई अकेला आया तो मंत्रियों के साथ उठने-बैठे वाला रसूखदार रकीबुल उसके भाई को मामले में फंसा देगा। भाई पुलिस के साथ आया। तारा आजाद हुई और जून 2017 में उसे रकीबुल से तलाक मिल गया। इस तरह फंसाई गई तारा इकलौती लड़की नहीं है। देश में ऐसे हजारों मामले सामने आ रहे हैं। हिंदू लड़कियों को धोखा देकर इस्लाम कुबूल करवाने और निकाह करके फांसने की साजिशें की जा रही हैं। हिंदू नाम रखे, तिलक लगाए, हाथ में कलावा बांधे मुस्लिम लड़के मीडिया के कैमरों में भी पकडेÞ गए हैं। शिकार लड़कियों ने हलफनामे दाखिल किए हैं। यहां तक कि हिंदू नाम रखकर और पूरा नकली परिवार बनाकर लड़की के घरवालों से मिलने और शादी करने, फिर शादी के बाद जबरन इस्लाम कुबूल करवाने के मुकदमे देश की अदालतों में चल रहे हैं।

राजस्थान में ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जिसमें रकीबुल की तरह  छद्म जिहादियों ने लड़की के परिवार से दहेज के नाम पर 20 लाख रुपये ऐंठ लिए थे। जब असलियत खुली तो नवविवाहिता और उसके माता-पिता सन्न रह गए थे।

लव जिहाद के एक से बढ़कर एक सनसनीखेज मामले सामने आते हैं, जब पता चलता है कि मुस्लिम युवक ने हिंदू नाम रखकर किसी हिंदू लड़की से विवाह किया और बाद में पोल खुलने पर लड़की को प्रताड़ित किया या मार डाला तब बिंदी-झोला गिरोह भूमिगत हो जाता है।

फरेब और मक्कारी की ऐसी अनेक कहानियां हैं, जिन पर पर्दा डाला जाता रहा है। इसमें एक कानूनी या तकनीकी पेच भी है। कानून में लव जिहाद नाम का कोई शब्द तो है नहीं, इसलिए जब ऐसे मामले आते हैं तो वे घरेलू हिंसा, धोखाधड़ी, मजहब बदलने का दबाव, तलाक कानून आदि के अंतर्गत दर्ज किए जाते हैं। पुलिस और अदालतें भी इन्हीं कानूनी व्याख्याओं के तहत काम करती हैं।

समस्या है कट्टरपंथियों की प्रवृत्ति, जिसके जरिए वे हर तरह से अपनी संख्या बढ़ाते रहना चाहते हैं। इसके लिए ये योजनाबद्ध तरीके से काम करते हैं, धन-संसाधन मुहैया करवाते हैं और सुसंबद्ध प्रचार तंत्र चलाते हैं। इन उन्मादियों को छद्म सेकुलर गिरोह सहलाता है, इनकी चंपी-मालिश करता है, अखिला और उसके पति शफीन जहां को प्यार का पोस्टरबॉय  बनाता है, जबकि राहुल राजपूत और तारा शाहदेव के दुर्भाग्य पर मुंह फेर लेता है। इतना ही नहीं, उसे वे लोग भी सहन नहीं होते जो इन लोगों के हक की आवाज उठाते हैं।