पाकिस्तानः सेना-पुलिस में टकराव, तो दूसरी तरफ एफएटीएफ की काली सूची में जाने का भी खतरा बढ़ा

    दिनांक 22-अक्तूबर-2020   
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इमरान खान सरकार चंद दिनों की मेहमान लगती है। पड़ोसी पाकिस्तान में न केवल पुलिस-सेना बेलगाम हो चुकी है बल्कि बुधवार सुबह उसकी आर्थिक राजधानी कराची की एक बिल्डिंग में आतंकवादियों ने धमाका कर अपने बेलगाम होने और इमरान सरकार के चलता होने का भी एहसास करा दिया। इस बीच पेरिस में शुरू हुई वित्तीय कार्यबल की बैठक के बाद पाकिस्तान के भूरे से काली सूची में डाले जाने जाने की संभावना बढ़ गई है।

इमरान खान सरकार चंद दिनों की मेहमान लगती है। पड़ोसी पाकिस्तान में न केवल पुलिस-सेना बेलगाम हो चुकी है बल्कि बुधवार सुबह उसकी आर्थिक राजधानी कराची की एक बिल्डिंग में आतंकवादियों ने धमाका कर अपने बेलगाम होने और इमरान सरकार के चलता होने का भी एहसास करा दिया। इस बीच पेरिस में शुरू हुई वित्तीय कार्यबल की बैठक के बाद पाकिस्तान के भूरे से काली सूची में डाले जाने जाने की संभावना बढ़ गई है।

पाकिस्तान के वित्तीय कार्यबल यानी एफएटीएफ की काली सूची में डाले जाने का मतलब है, उसपर पूर्ण प्रतिबंध। जैसा कि इस समय ईरान पर लगा हुआ है। उसके सभी देशों से रिश्ते काट दिए गए हैं। कहीं से कोई आर्थिक मदद भी नहीं मिल रही है, जिससे इस समय वह सभी तरह का संकट झेल रहा है। कराची के गुलशन-ए-इकबाल इलाके की एक बिल्डिंग में चलने वाले बैंक में ताजे धमाके में आतंकवादी संगठनों का नाम आया है। इसका अर्थ है कि वित्तीय कार्यबल की तमाम तरह की चेतावनियों के बावजूद पाकिस्तान में आतंकियों की गतिविधियां नहीं थमीं हैं।

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पाकिस्तान में बेलगाम स्थिति पिछले महीने इमरान खान के विरुद्ध 11 विपक्षी दलों के मोर्चा ‘पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट’ के गठन के साथ पैदा हुई है। 18 अक्तूबर को सिंध के शहर कराची में मोर्चा की पहली संयुक्त रैली के बाद से जैसे पूरा पाकिस्तान बेपटरी हो गया। रैली में उमड़ी भारी भीड़ से बौखलाई इमरान की सेना ने उसी रात एक होटल के कमरे का ताला तोड़ कर मियां नवाज शरीफ के दामाद एवं इमरान खान के लिए बड़ी चुनौती बनीं मरियम नवाज के पति कैप्टन सेवानिवृत मोहम्मद सफदर को गिरफ्तार कर लिया।

बिलावल भुट्टो जरदारी की पार्टी वाले सिंध प्रांत की पुलिस गिरफ्तारी का विरोध न करे, इसके लिए सेना ने आईजी आवास घेर लिया था। यही नहीं कराची के आईजी को कैप्टन सफदर को गिरफ्तार करने के लिए मजबूर किया गया। दबाव बनाने के लिए सेना ने उनके साथ मार-पीट की। सेना ने आईजी एवं डीआईजी को भी अगवा किया। तब से पाकिस्तान में हालात काबू में नहीं हैं। घटना के विरोध में सिंध के तमाम वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने लंबे अवकाश पर चले की घोषणा कर दी। इन अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा माहौल में उनके लिए अपने काम को अंजाम देने में कठिनाई आ रही है।

कराची के आईजी आवास पर पुलिस अधिकारियों के सामूहिक अवकाश पर जाने को लेकर एक बैठक भी हुई। इस बीच पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो एवं सिंध के मुख्यमंत्री आईजी आवास पर पुलिस अधिकारियों से मिले। हालांकि पाकिस्तानी सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने सिंध पुलिस से संपर्क कर पूरे प्रकरण की जांच कराने के आदेश दिए हैं। बावजूद इसके सिंध पुलिस निदेशालय की ओर से 20 अक्तूबर को पत्र जारी कर कैप्टन सफदर की गिरफ्तारी में सिंध के पुलिस कर्मियों एवं पुलिस अधिकारियों को प्रताड़ित करने पर कड़ा ऐतराज जताया गया है।

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पाकिस्तान की मौजूदा हालत देखकर नहीं लगता कि यहां फिलहाल माहौल शांत होने वाला है। ‘द इंटरनेशनल हेराल्ड’ ने इस प्रकरण को ‘सिविल वार इन पाकिस्तान’ की संज्ञा दी है। विदेश में रहकर निवार्सित जिंदगी जी रहे मियां नवाज शरीफ ने अधिकारियों के छुट्टी पर जाने पर इमरान खान सरकार को घेरा है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘कराची की घटना से इस विचार को बल मिलता है कि पाकिस्तान में राज्‍य से ऊपर राज्‍य है। केंद्र ने प्रांतीय सरकार को मिले जनमत का मजाक उड़ाया। परिवार की निजता तार-तार की गई। आदेश मनवाने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को अगवा किया गया। इसलिए सेना की फजीहत हुई।

विपक्षी दलों का गठबंधन रैलियों में बलूचिस्तान, गिलगित-बाल्टिस्तान के मुद्दे भी उठा रहा है। कराची की 18 अक्तूबर की रैली में कई दलों के नेताओं ने प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से इन प्रांतों में सेना की बढ़ती ज्यादतियों का विरोध किया। रैली में सबसे पहले इन प्रांतों में सेना के शिकार हुए लोगों को ‘बलिदान’ बताकर श्रद्धांजलि दी गई। कई वक्ताओं ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की एवं बाल्टिस्तान में पाकिस्तानी कब्जे को गैरवाजिब बताया। सेना द्वारा गिलगित बाल्टिस्तान के एक दर्जन नेताओं को गायब किए जाने के विरोध में दस दिनों से वहां धरना-प्रदर्शन का कार्यक्रम चल रहा है। कराची की रैली में पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो, पीएमएल-एन की उपाध्यक्ष मरियम नवाज, जमियत उलेमा-ए-इस्लाम के अध्यक्ष मौलाना फजलुर्रहमान आदि ने इस मुददे पर खुलकर अपनी राय रखी। मरियम एवं बिलावल ने सेना प्रमुख बाजवा की भी तीखी आलोचना की। ऐसा पहली बार हुआ कि सियासी मंच से खुले तौर पर सेना प्रमुख को आड़े हाथ लिया गया।

आपको बता दें कि रैली के बाद मरियम नवाज एवं उनके पति सेवानिवृत्त कैप्टन मोहम्मद सफदर कराची के ही एक होटल में रुक गए थे। लेकिन इसी बीच आधी रात को सेना ने कमरे का ताला तोड़कर सफदर को गिरफ्तार कर लिया। उन पर आरोप लगाए कि उन्होंने पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की दरगाह पर अवैध तरीके से नारे लगाए एवं जिन्ना की मजार का अपमान किया। जीओ टीवी के मुताबिक, सफदर की गिरफ्तारी के बाद से सिंध पुलिस और सेना के बीच जंग सा माहौल बना हुआ है।