भूखों का पेट भर रही ‘थाल सेवा’

    दिनांक 23-अक्तूबर-2020
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 एक गरीब को 5 रु. में भोजन की थाली देते हुए दिनेश मानसेरा (बाएं)
उत्तराखंड के हल्द्वानी में लिटिल मिरेकल्स फाउंडेशन गरीबों को 5 रु. में भोजन उपलब्ध करा रहा और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं दिला रहा
उत्तराखंड के दूसरे बड़े शहर हल्द्वानी में कुमाऊं के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पास जरूरतमंद लोगों को केवल 5 रुपये में भोजन उपलब्ध करवा रही है ‘थाल सेवा’। यह लिटिल मिरेकल्स फाउंडेशन (रजि.) का एक सेवा प्रकल्प है, जिससे संघ परिवार से जुड़े सदस्य और शहर के सम्मानित युवा समाजसेवी जुड़े हुए हैं। टीम थालसेवा ने 18 अक्तूबर, 2018 को इस सेवा प्रकल्प की शुरुआत की थी। तब से यह संस्था रोजाना करीब एक हजार जरूरतमन्दों को 5 रुपये प्रति थाली भोजन करा रही है। इसके साथ ही, निर्धन और भिक्षुओं को नि:शुल्क भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है।
‘थाल सेवा’ प्रकल्प बिना किसी सरकारी सहायता के चल रहा है। धन की व्यवस्था के लिए मददगारों को ‘थाल सेवक’ बनना पड़ता है। इसके लिए उन्हें सेवा स्वरूप पांच हजार रुपये देने होते हैं। इस धन का सदुपयोग राशन लाने में होता है। भोजन ग्रहण करने वालों से जो 5 रुपये लिए जाते हैं, उनसे रसोइये, गैस, बर्तन धुलाई और पैकिंग का खर्च निकाला जाता है। लिटिल मिरेकल्स फाउंडेशन के अध्यक्ष दिनेश मानसेरा बताते हैं कि इस सेवा प्रकल्प को शुरू करने के पीछे उद्देश्य यह था कि सुदूर पहाड़ों से लोग इलाज कराने के लिए मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी आते हैं। यहां उन्हें खाने की दिक्कत थी। अस्पताल से बाहर खाना महंगा मिलता है, जिससे लोगों पर आर्थिक बोझ पड़ता था। मरीजों को तो अस्पताल से भोजन मिलता है, लेकिन उनके साथ आए परिजनों को काफी परेशानी होती थी। इसलिए ऐसे लोगों को ध्यान में रखते हुए एक समय केवल 5 रुपये में भोजन उपलब्ध कराने का विचार मन में आया।
थाल सेवा शुरू करने से ऐसे लोगों को काफी राहत मिली है। शहर में भिक्षुओं और सड़क किनारे रहने वाले बावलों के लिए हमारी वैन भोजन देने जाती है। यह नि:शुल्क व्यवस्था है। थाल सेवा में दाल-चावल ही रखा गया है। चावल के साथ दाल रोजाना बदल जाती है। कभी चना, कभी राजमा और कभी लोबिया बनाया जाता है। थाल सेवा ने रात में भी एक सेवा प्रकल्प शुरू किया है। यहां एक फ्रिज रखा गया है, जिसमें लोग अपने घरों से जो भोजन, फल, बिस्कुट व अन्य खाद्य पदार्थ आदि लाते हैं, इसमें रख देते हैं। इसे रात दस बजे तक भिक्षुओं को नि:शुल्क वितरित किया जाता है। 
मानसेरा बताते हैं कि उनकी संस्था ने जरूरतमन्दों के लिए 5 रुपये में उपचार सेवा भी शुरू की है। उनकी टीम जरूरतमन्दों की पहचान कर चिकित्सकों से बात करने के बाद उनकी मदद करती है। उपचार सेवा के तहत सौ से ज्यादा दिव्यांगों को व्हीलचेयर, बैसाखी बांटे जा चुके हैं। साथ ही जल शक्ति अभियान के तहत 32 मिनट में 3,200 स्कूली बच्चों की मदद से 3,200 एकड़ में 3200 पेड़ लगाए गए, जिसे ‘पेड़ सेवा’ नाम दिया गया।
मानसेरा बताते हैं कि थाल सेवा टीम में दो दर्जन लोग हैं, जो बारी-बारी हर दिन तीन घंटे सेवा प्रबंधन में हिस्सा लेते हैं। हर व्यक्ति के लिए सेवा कार्य निश्चित है और कोई भी दूसरे के काम में हस्तक्षेप नहीं करता। लिटिल मिरकल्स फाउंडेशन के उपाध्यक्ष उमंग वासुदेवा बताते हैं कि टीम थाल सेवा ने न कभी सरकार से सहायता मांगी, न किसी के पास चंदा मांगने गई। लोग खुद ही हमारी मदद के लिए आगे आते हैं। इससे साबित होता है कि यदि प्रयास ईमानदार हो तो मदद करने वालों की कमी नहीं है। हमारे पास अगले 300 दिन तक जरूरतमन्दों को भोजन कराने की व्यवस्था है। कभी-कभी एक दिन में तीन-चार लोग भी थाल सेवक बन जाते हैं तो किसी दिन एक भी नहीं, लेकिन महीने में औसत खर्च निकल आता है। इसके बावजूद यदि कोई कमी होती है तो हमारी टीम उसकी भरपाई करती है।
टीम थाल सेवा ने लॉकडाउन में प्रशासन की देख-रेख में सवा दो लाख से भी अधिक भोजन के पैकेट जरूरतमन्दों को वितरित किए। इसके अलावा, 2,812 राशन किट जिसमें तीन सप्ताह का राशन होता था, वितरित किए गये। साथ ही, कोरोना योद्धाओं चिकित्सकों, पुलिस को पानी, जूस व भोजन भोजन उपलब्ध कराया। ल्ल प्रतिनिधि