विजयादशमी उत्सव: संकट का समाधान करेगा स्वनिर्भर भारत

    दिनांक 25-अक्तूबर-2020
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हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने नागपुर के रेशिमबाग स्थित संघ मुख्यालय पर विजयादशमी उत्सव में भाग लिया। इस अवसर पर श्री भागवत ने शस्त्र पूजन के बाद उपस्थित स्वयंसेवकों और गणमान्यजनों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने देश के सामने उपस्थित चुनौतियों की चर्चा की और उनके समाधान का मार्ग सुझाया
 हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने नागपुर के रेशिमबाग स्थित संघ मुख्यालय पर विजयादशमी उत्सव में भाग लिया। इस अवसर पर श्री भागवत ने शस्त्र पूजन के बाद उपस्थित स्वयंसेवकों और गणमान्यजनों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने देश के सामने उपस्थित चुनौतियों की चर्चा की और उनके समाधान का मार्ग सुझाया साथ ही कोरोना वायरस से जूझने में संगठित समाज और स्वयंसेवकों के सेवाभाव की सराहना की। कोरोना के जन्मदाता विस्तारवादी चीन के नापाक मंसूबों के प्रति सावधान रहकर अपनी सैन्य सामर्थ्य बढ़ाने का सुझाव देते हुए उन्होंने पर्यावरण के साथ ही जीवन के शाश्वत मूल्यों के प्रति जाग रहे विश्व में और समन्वय पर बल दिया। स्वनिर्भर भारत के लिए आवश्यक प्रयासों की चर्चा करते हुए उन्होंने हिन्दू चिंतन में स्वदेशी की अवधारणा स्पष्ट की।


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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री भागवत ने कहा कि आज के इस विजयादशमी उत्सव के प्रसंग पर हम सब देख रहे हैं कि उत्सव संख्या की दृष्टि से कम मात्रा में मनाया जा रहा है। कारण भी हम सबको पता है। कोरोना वायरस के चलते सभी सार्वजनिक क्रियाकलापों पर बंधन है। गत मार्च महीने से देश—दुनिया में घटने वाली सभी घटनाओं को कोरोना महामारी के प्रभाव की चर्चा ने मानो ढक दिया है। पिछली विजयादशमी से अब तक, चर्चा योग्य कम घटनाएं नहीं हुई हैं। संसदीय प्रक्रिया का अवलंबन करते हुए अनुच्छेद—370 को अप्रभावी करने का निर्णय तो विजयादशमी से पहले ही हो गया था। दीपावली के पश्चात्, 9 नवंबर, 2019 को श्रीरामजन्मभूमि के मामले में अपना निर्णय देकर सर्वोच्च न्यायालय ने इतिहास रचा। भारतीय जनता ने इस निर्णय को संयम और समझदारी का परिचय देते हुए स्वीकार किया। श्रीराम मंदिर निर्माण हेतु भूमिपूजन गत 5 अगस्त को संपन्न हुआ। अयोध्या में समारोह स्थल पर हुए कार्यक्रम में तथा देशभर में उस दिन सात्विक, हर्षोल्लासित परंतु संयमित, पवित्र व स्नेहपूर्ण वातावरण बना था। देश की संसद में नागरिकता संशोधन अधिनियम कानून पूरी प्रक्रिया को लागू करते हुए पारित किया गया। कुछ पड़ोसी देशों से सांप्रदायिक कारणों से प्रताड़ित होकर विस्थापित किए जाने वाले बन्धु, जो भारत में आयेंगे, उनको मानवता के हित में शीघ्र नागरिकता प्रदान करने का यह प्रावधान था। उन देशों में साम्प्रदायिक प्रताड़ना का इतिहास है। भारत के इस नागरिकता संशोधन अधिनियम कानून में किसी संप्रदाय विशेष का विरोध नहीं है। भारत में विदेशों से आने वाले अन्य सभी व्यक्तियों को नागरिकता दिलाने के कानूनी प्रावधान, जो पहले से अस्तित्व में थे, यथावत् रखे गए थे। परन्तु कानून का विरोध करने के इच्छुक लोगों ने देश के मुसलमान भाइयों के मन में यह भ्रम पैदा किया कि उनकी संख्या भारत में मर्यादित करने के लिए ही यह प्रावधान लाया गया है। उसको लेकर जो विरोध—प्रदर्शन आदि हुए उनमें ऐसे मामलों का लाभ उठाकर हिंसात्मक तथा प्रक्षोभक तरीके से उपद्रव उत्पन्न करने वाले तत्व प्रवेश कर गए। देश का वातावरण तनावपूर्ण बन गया तथा साम्प्रदायिक सौहार्द पर आंच आने लगी। इससे उबरने के उपाय का विचार पूर्ण होने से पहले ही कोरोना की परिस्थिति आ गई, संचार माध्यमों व जनता में ये बातें चर्चा में से लुप्त हो गईं। उपद्रवी तत्वों द्वारा इन बातों को उभार कर विद्वेष व हिंसा फैलाने के षड्यंत्र पृष्ठभूमि में अब भी चल रहे हैं। परन्तु जनमानस को दिखाई दिए अथवा उन तत्वों के पृष्ठपोषण का काम करने वालों को छोड़कर, अन्य माध्यमों में उनको प्रसिद्धि मिल सके, कोरोना की चर्चा के बीच ऐसा न हो सका।