‘‘समरसता के बिना समानता संभव नहीं’’

    दिनांक 26-अक्तूबर-2020   
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 कार्यक्रम को संबोधित करते श्री मोहनराव भागवत। मंच पर उपस्थित (बाएं से) श्री रविंद्र देशपांडे एवं
श्री गोविंददेव गिरि जी महाराज

‘‘दत्तोपंत ठेंगडी जी अपनी आखिरी सांस तक असमानता को समाप्त करने के बारे में सोचते थे। सद्भाव उनका विश्वास था। वे द्रष्टा थे और उसी से उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में संगठन बनाए और उनका देश-काल-स्थिति के अनुसार मार्गदर्शन किया। यह सब करते हुए उन्होंने हिन्दू समाज के संगठन के सिद्धांत को बनाए रखा यानी असमानता को समाप्त किया।’’ उक्त बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने कही।

वे गत दिनों पुणे में श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगडी जन्म शताब्दी समारोह समिति द्वारा आयोजित ‘सामाजिक सद्भाव के परिप्रेक्ष्य में दत्तोपंत ठेंगड़ी’ विषय पर व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे।

समारोह की अध्यक्षता समिति के सदस्य श्री गोविंददेव गिरि जी महाराज ने की। इस दौरान उन्होंने कहा कि दत्तोपंत जी द्वारा प्रस्तुत सद्भाव का विचार हमारी संस्कृति का आविष्कार है। उसके भीतर की एकरसता को पहचानना और उसका पालन करना आवश्यक है। इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन समिति के संयोजक श्री रविंद्र देशपांडे ने किया।