बिहार : किसको हार, किसकी हार

    दिनांक 28-अक्तूबर-2020
Total Views |
संजीव कुमार
 
biha_1  H x W:
बिहार की एक चुनावी सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुखौटों के साथ समर्थक। 
इस बार के बिहार विधानसभा चुनाव में चार गठबंधन मैदान में हैं। वैसे तो हर गठबंधन अपनी जीत का दावा कर रहा है, लेकिन मुख्य मुकाबला राजग और महागठबंधन के बीच दिख रहा
बिहार विधानसभा का चुनाव दिलचस्प होता दिख रहा है। इस बार चार गठबंधन बने हैं और चारों ने अपने संभावित मुख्यमंत्रियों के नाम तय कर दिए हैं। किसी भी गठबंधन में चार से कम दल नहीं हैं। हर गठबंधन में कोई न कोई दल ऐसा है, जो राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान रखता है। भले ही चुनाव आयोग की नजर में वह राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त दल हो या न हो। इन चारों गठबंधन में तीन गठबंधन अपना मुकाबला राष्टÑीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से बता रहे हैं। इन गठबंधनों से परे चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी भी मैदान में है।
राज्य में सत्तारूढ़ राजग के घोषित मुख्यमंत्री उम्मीदवार वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं। इस गठबंधन में जदयू, भाजपा, हम (से) और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) हैं।
बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों में से जदयू 115, भाजपा 110, वीआईपी 11 और हम (से) 7 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। राजग की ओर से भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नीतीश कुमार सहित अनेक नेता कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हवा का रुख बदलने
के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पूरे बिहार में 12 रैलियां करने
वाले हैं।
लालू यादव की पार्टी राष्टÑीय जनता दल (राजद) के नेतृत्व में बने महागठबंधन ने भी अपने मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर दिया है। महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है। महागठबंधन में राजद, कांग्रेस और वाम दल हैं। राजद 144, कांग्रेस 70, भाकपा (माले) 19, भाकपा 6 और माकपा 4 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
पीपुल्स डेमोक्रेटिक एलायंस (पीडीए) ने अपने मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार पूर्व सांसद और जन अधिकार पार्टी के अध्यक्ष राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को बनाया है। पीडीए में चार दल हैं- जनाधिकार पार्टी, आजाद समाज पार्टी, बहुजन मुक्ति पार्टी और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आॅफ इंडिया। आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद उर्फ ‘रावण’ हैं। अपने स्तरहीन वक्तव्यों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले रावण अगस्त, 2020 से ही बिहार में सक्रिय हैं। बहुजन मुक्ति पार्टी बामसेफ की राजनीतिक इकाई है जो पहली बार किसी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रही है। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आॅफ इंडिया कुख्यात इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया (पीएफआई) की राजनीतिक इकाई है।
चौथा गठबंधन ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेकुलर फ्रंट है। इसके मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री और रालोसपा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा हैं। इस गठबंधन में छह दल हैं—रालोसपा, बसपा, ओवैसी की एआईएमआईएम, समाजवादी जनता दल (डेमोक्रेटिक), जनवादी पार्टी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी। इसमें बसपा और एआईएमआईएम के बारे में हर कोई जानता है। एआईएमआईएम ने कुछ वर्ष पहले किशनगंज विधानसभा उपचुनाव में जीत हासिल कर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी थी। ओवैसी पिछले कुछ वर्षों से बिहार में लगातार सक्रिय हैं। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी उत्तर प्रदेश में सक्रिय है।
इन सभी गठबंधनों के अलावा ‘प्लूरल्स पार्टी’ के नेता और कार्यकर्ता पुष्पम प्रिया चौधरी के नाम पर वोट मांग रहे हैं। वहीं लोजपा ने साफ कर दिया है कि वह राजग की सरकार तो चाहती है, पर उसे मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार पसंद नहीं है।
भले ही राजनीतिक दल चुनावी प्रचार में लगे हैं, पर ज्यादातर मतदाता मौन हैं। कुछ लोग यह जरूर कहते दिख जाते हैं कि बिहार में एक बार फिर से जंगलराज नहीं आना चाहिए। लालू-राबड़ी के राज (1990 से 2005 तक) को जंगलराज कहा जाता है।
इसका अर्थ बिहार के लोगों को बखूबी पता है। अब आप भी अनुमान लगा सकते हैं कि बिहार में क्या होने जा रहा है। *