'कोरोना जिहाद' की साजिश को अंजाम देना चाहते थे आइएस के गुर्गे, खतरनाक थे मंसूबे

    दिनांक 28-अक्तूबर-2020
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अपने आरोप पत्र के जरिए कहा कि आतंकी संगठन आइएस के गुर्गों ने देश में कोरोना जिहाद के जरिए अराजकता और तबाही मचाने की साजिश रची थी

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एजेंसी ने यह जानकारी आइएस (इस्लामिक स्टेट) के आतंकियों से गहन पूछताछ के आधार पर दी है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अपने आरोप पत्र के जरिए कहा कि आतंकी संगठन आइएस के गुर्गों ने देश में कोरोना जिहाद के जरिए अराजकता और तबाही मचाने की साजिश रची थी।
एजेंसी ने यह जानकारी आइएस (इस्लामिक स्टेट) के आतंकियों से गहन पूछताछ के आधार पर दी है। गौरतलब है कि इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रॉविंस (आएसकेपी) के पकड़े गए पांच आतंकियों से मिली जानकारी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अपने आरोप पत्र में शामिल किया है। यह पांचों आतंकी सीएए के खिलाफ मुसलमानों को भारत सरकार के खिलाफ भड़काने की साजिश रच रहे थे। एजेंसी ने एक स्थानीय अदालत में सितंबर में पेश आरोप पत्र (चार्जशीट) में बताया कि इस मामले में पकड़ी गई आतंकी सादिया और डाक्टर इशफाक के बीच देश को कोरोना जिहाद से दहलाने की साजिश को अंजाम तक पहुंचाने के लिए बात हुई थी।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने कश्मीर के जहांजेब सामी व हिना बशीर बेग, पुणे की सादिया अनवर शेख और नबील सिद्दीक खत्री एवं हैदराबाद से अब्दुल्ला बासित को आरोपित किया है। जांच एजेंसी ने बताया कि ये पांचों आरोपित सरकार के खिलाफ नफरत फैलाने की साजिश रचने के अलावा हथियारों के लिए चंदा जुटाने, आइईडी के लिए विस्फोटक जुटाने, अपनी विचारधारा का विस्तार करने और विभिन्न समुदायों में वैमनस्य पैदा करने में जुटे थे। तथ्यों, परिस्थितियों और सुबूतों के आधार पर यह साफ है कि ये पांचों जहांजेब, हिना, बासित, सादिया और नबील कश्मीर में आइएस का अड्डा बनाकर देश में आतंकी संगठन को फैलाने की मंशा से काम कर रहे थे।
आरोपपत्र के अनुसार आइएस के इन गुर्गों का इरादा भीड़भाड़ वाले इलाकों में धमाके करने, मुसलमानों को भड़काकर आतंकी संगठन आइएस से जोड़ने, देश भर में छोटी-छोटी इकाइयां बनाने के अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों पर हमले करने की साजिश रच रहे थे ताकि देश को दंगों की आग में झोंका जा सके। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में चले आंदोलन की आड़ लेकर इन लोगों द्वारा मुसलमानों को भारतीय समाज के खिलाफ बरगलाने, सोशल मीडिया पर अराजक अभियान चलाने के अलावा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए इनके द्वारा साजिश रची गई थी।
सबसे पहले की थी कश्मीरी की गिरफ़्तारी
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले में सबसे पहले कश्मीरी दंपति की गिरफ्तारी की थी। इस बात की भनक लगते ही अन्य तीनों गुर्गों ने अपने फोन और लैपटॉप से सभी जानकारियां फार्मेट कर दी थीं। एजेंसी ने बताया कि नबील ने 2019 के अंत में पुणे में अपनी दुकान में ड्रेन क्लीनर, अल्युमिनियम पन्नी और पानी की मदद से ज्वलनशील हाइड्रोजन गैस बनाने की कोशिश की थी। दंगों के दौरान इस गैस से भरे गुब्बारों से आग लगाने की योजना थी, जिससे अधिक से अधिक हिन्दुओं की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा सके। इसी तरह एजेंसी का आरोप है कि जहांजेब और नबील पश्चिम एशिया के आतंकियों की मदद से भारत में फिदायीन हमलों को अंजाम देने और गणपति विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं को ट्रक से रौंदकर मारने की साजिश भी रच रहे थे। इसके अलावा इनकी साजिश का एक भाग यह भी था कि ये एनेस्थीसिया इंजेक्शन से बड़े नेताओं का खात्मा करना चाहते थे। राष्ट्रीय जांच एजेंसी की हिरासत के दौरान हिना को कोरोना हो गया था। उससे हुई पूछताछ के बाद बाकी तीन को आठ मार्च को गिरफ्तार किया गया था। बाद में यह मामला एनआइए को सौंप दिया गया था।