राजस्थान की बेटियों को भी न्याय दिलवाओ राहुल-प्रियंका

    दिनांक 03-अक्तूबर-2020
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राहुल-प्रियंका कांग्रेस नेताओं और मीडिया की पलटन लेकर जिस तरह से नोएडा के रास्ते हाथरस को निकले, उससे साफ हो गया कि असल मकसद पीड़ित परिवार से मिलना नहीं, बल्कि कैमरों पर चेहरे ज्यादा दिखाना था

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हाथरस की घटना निश्चित रूप से निंदनीय है। अपराधियों को कठोरतम दंड मिलना चाहिए। उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन कर फार्स्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया है। पीड़िता के परिवार को आर्थिक सहायता, मकान और नौकरी दी गई है, लेकिन जिस तरह से दिल्ली में बैठा वामपंथी मीडिया और कांग्रेस पार्टी हाथरस की घटना पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का काम कर रही है। इसे अवसर के रूप में ले रही है, वो कम निंदनीय नहीं है। दुष्कर्म और दलित अत्याचार में खुद की पार्टी कांग्रेस शासित राजस्थान पर भाई-बहन की चुप्पी भी सवाल उठाती है, क्यों दोनों राजस्थान की बेटियों को न्याय दिलाने के लिए सड़क पर नहीं उतरते या टेलीविजन कैमरों के आगे मार्च करते हैं, क्या राजस्थान की बेटियों को न्याय नहीं मिलना चाहिए?
गुरुवार को कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी और उनकी बहन कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा ने जो नाटक टेलीविजन कैमरों के सामने किया, उसे पूरे देश ने देखा। राहुल-प्रियंका कांग्रेस नेताओं और मीडिया की पलटन लेकर जिस तरह से नोएडा के रास्ते हाथरस को निकले, उससे साफ हो गया कि असल मकसद पीड़ित परिवार से मिलना नहीं, बल्कि कैमरों पर चेहरे ज्यादा दिखाना था। राजनीतिक महत्वकांक्षा को पूरा करने के सिवाय कुछ नहीं है।
उत्तर प्रदेश से कहीं कम आबादी के राजस्थान में दलित अत्याचारों पर राहुल-प्रियंका के मुंह सिले हुए हैं। प्रियंका वाड्रा उत्तर प्रदेश की छोटी से छोटी घटना पर ट्वीट करके राज्य सरकार को कोसती हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का त्याग-पत्र मांगती हैं, लेकिन आज तक राजस्थान की एक भी दलित अत्याचार की घटना पर उन्होंने न तो ट्वीट नहीं किया और न ही मुख्यमंत्री से कुर्सी छोड़ने के लिए कहा है।
राजस्थान में महिला अपराध और विशेषकर दलितों के खिलाफ अत्याचार के मामले डराने वाले हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के साल 2019 के आंकड़ों को देखें तो राजस्थान में अन्य राज्यों की तुलना में दुष्कर्म की सबसे ज्यादा 6000 घटनाएं हुईं। राज्य में एक लाख की आबादी पर 11.7 दुष्कर्म के केस दर्ज हुए हैं। राजस्थान के बाद दूसरा नंबर 100 प्रतिशत साक्षरता वाले केरल का है, राज्य की वायनाड सीट से राहुल गांधी सांसद भी हैं, यहां एक लाख पर 10.7 दुष्कर्म के केस दर्ज हुए हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 3.7 है। उत्तर प्रदेश में 2019 में दुष्कर्म की 3065 वारदात दर्ज गईं थीं।
कांग्रेस को दलित महिलाओं की बेहद चिंता है, लेकिन राजस्थान में दलित महिलाओं के खिलाफ सबसे अधिक 554 दुष्कर्म की घटनाओं पर वो मौन धारण किए हुए है। सर्वाधिक दलित महिलाओं के खिलाफ दुष्कर्म की दर केरल में 5.0 तो दूसरे नंबर पर राजस्थान में यह दर 3.1 है। उत्तर प्रदेश में यह दर 1.3 है। केरल में हर चार घंटे पर एक महिला से दुष्कर्म हो रहा है।
साल 2020 के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्वयं राजस्थान पुलिस की रिपोर्ट कहती है कि अगस्त तक राज्य में दुष्कर्म के 3498 केस दर्ज हुए हैं, मतलब 14 वारदात रोजाना। पिछले साल यह आंकड़ा 3498 का था। महिलाओं और बच्चियों से छेड़छाड़ के 5779 केस अगस्त तक दर्ज हो चुके हैं, जबकि 2019 में यह आंकड़ा 6175 का था, मतलब 24 केस रोजाना। अभी इस साल को खत्म होने में अगस्त से चार महीने बाकी हैं।
बीते एक सप्ताह में राजस्थान के अलवर के तिजारा, सीकर, जयपुर के आमेर, सिरोही, अजमेर, बारां में दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म की वादरात हुई हैं। धौलपुर के बसेड़ी थानाक्षेत्र के एक गांव में नाबालिग से तमंचे की नोक पर हैवानियत की गई। नाबालिग ने दुष्कर्म के बाद लोकलाज के डर से आत्महत्या कर ली थी। सीकर में ब्लैकमेल कर नाबालिग से नौ महीने तक दुष्कर्म किया गया। शिकायत पर दरिंदों ने पीड़िता के परिजनों को प्रताड़ित किया।
जयपुर के आमेर क्षेत्र में स्कूल जा रही नाबालिग को अगवा कर दुष्कर्म किया गया। अजमेर जिले में दलित महिला को बंधक बनाकर दुष्कर्म की वारदात हुई। सिरोही के अनादरा में 7 साल की आदिवासी बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई। बारां जिले में दो नाबालिग बालिकाओं के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। ऐसे मामलों की सूची लंबी है।
यह स्थिति तो तब है, जब राजस्थान की कानून-व्यवस्था का जिम्मा स्वयं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत देखते हैं। सोशल मीडिया पर जब बारां समेत राजस्थान की दूसरी दुष्कर्म की घटनाओं को लोगों ने उजागर करना शुरू किया तो गहलोत सफाई देने लगे। उन्होंने ट्वीट किया कि इसकी हाथरस की घटना से तुलना न करें। आखिर क्यों? क्या हाथरस की बेटी और राजस्थान की बेटी में कोई फर्क है।
चंद रोज पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी वीडियो जारी कर हाथरस की घटना पर चिंता जताकर योगी सरकार पर प्रहार किए थे, लेकिन राजस्थान की घटनाओं पर उन्होंने भी अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा को दलितों के खिलाफ हो रहे अपराधों को रोकने की शुरुआत घर यानी कांग्रेस शासित राजस्थान से करनी चाहिए। यदि वो उत्तर प्रदेश की बेटी को न्याय दिलाना चाहते हैं तो पहले राजस्थान की बेटियों के हक की भी लड़ाई लड़ें। बेटी-बेटी में फर्क न करें। हाथरस की घटना के बाद जिस तरह से कांग्रेस पार्टी, उसके नेताओं ने रंग दिखाया है, उससे एक बात तो साफ और स्पष्ट हो गई है, अपनी राजनीतिक जमीन खोने से उनमें झटपटाहट है।