ये भारत के डरे हुए मुसलमान हैं जो फ्रांस के कट्टर मुसलमानों का समर्थन कर रहे हैं

    दिनांक 31-अक्तूबर-2020
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फ्रांस की जनता इस्लामिक कट्टरवाद से जूझ रही है. मगर फ्रांस के कट्टर मुसलमानों के समर्थन में भारत के मुसलमान प्रदर्शन कर रहे हैं. ये वही लोग हैं जो कुछ महीने पहले सीएए और एनआरसी से ‘डरे’ हुए थे. वही कथित रूप से डरे हुए मुसलमान आज सड़कों पर उतर कर फ़्रांस के कट्टर मुसलमानों का समर्थन कर रहे हैं

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कश्मीर में बुरहान वानी मारा गया था तब भी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में नारेबाजी हुई थी. फ्रांस में लगातार हो रहे आतंकी हमलों के बा द फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल द्वारा कटृटरपं​थियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाए जाने के बाद एएमयू और देवबंद में प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
फ्रांस की जनता इस्लामिक कट्टरवाद से जूझ रही है. मगर फ्रांस के कट्टर मुसलमानों के समर्थन में भारत के मुसलमान प्रदर्शन कर रहे हैं. ये वही लोग हैं जो कुछ महीने पहले सीएए और एनआरसी से ‘डरे’ हुए थे. वही कथित रूप से डरे हुए मुसलमान आज सड़कों पर उतर कर फ़्रांस के कट्टर मुसलमानों का समर्थन कर रहे हैं.
अभी हाल ही में नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे मुसलमानों को डर था कि नागरिकता देने में धर्म के आधार पर भेदभाव हो रहा था. दूसरा डर उन्हें इस बात का था कि एनआरसी लागू होने वाला है. इसके विरोध में जगह-जगह हिंसक प्रदर्शन हुए. मुस्लिम महिलाओं ने महीने भर से ज्यादा समय तक सड़कों को जाम कर दिया था. गत बृहस्पतिवार और शुक्रवार को हिन्दुस्थान के कई शहरों में फ्रांस के राष्ट्रपति के खिलाफ मुसलमानों ने विरोध-प्रदर्शन किए. अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत, फ्रांस के साथ है. इसके बाद भी मुसलमानों ने सड़कों पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का विरोध किया. मैक्रों की तस्वीर को सड़कों पर चिपका कर उन्हें अपमानित करने का प्रयास किया. इस्लामिक कट्टरता का स्पष्ट सन्देश है कि अगर पैगम्बर का कार्टून भी किसी ने बनाया तो वह ज़िंदा नहीं बचेगा. शार्ली एब्दो को कार्टून प्रकाशित करने के बदले में क्रूरतम हिंसा का शिकार होना पड़ा था.
बावजूद इन सबके, उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू ) में गत बृहस्पतिवार को फ्रांस के राष्ट्रपति का विरोध हुआ. एएमयू एक ऐसा परिसर है जहां कश्मीर के बुरहान वानी के मारे जाने पर भी विरोध होता है और राष्ट्र विरोधी नारे लगाये जाते हैं. एएमयू में कुछ प्रदर्शनकारियों ने फ्रांस के राष्ट्रपति का विरोध किया और इस्लाम के पक्ष में नारेबाजी की. प्रदर्शकारियों का कहना था कि इस्लाम के खिलाफ काम करने वाले फ्रांस का विरोध किया जाएगा. फ्रांस के बने हुए उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान किया गया. विरोध करने वाले छात्र, पुरानी चुंगी पर एकत्र हुए और फिर वहां से नारेबाजी करते हुए सैय्यद गेट पर आकर रुके. विरोध – प्रदर्शन के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति के पोस्टर भी जलाए गए. छात्र नेता फरहान जुबैरी ने कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने जिस प्रकार की टिप्पणी इस्लाम के संबंध में की है. उसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.
अलीगढ़ के बाद सहरानपुर के देवबंद में भी फ्रांस के राष्ट्रपति का विरोध किया गया. जुमे की नमाज के बाद वहां पर भारी संख्या में मुसलमान एकत्र हुए. भीड़ देखते हुए भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात किया गया. दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मुफ़्ती आरिफ कासमी समेत कई मौलानाओं ने फ्रांस के उत्पाद का बहिष्कार करने का आह्वान किया.